एमजीएसयू की डॉ. मेघना का अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में संबोधन
NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय (एमजीएसयू) बीकानेर के इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मेघना शर्मा ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने ऐसे समय में शिक्षित महिलाओं को लोक से जोड़ने का काम किया जब अंग्रेज़ी माध्यम से शिक्षित वर्ग लोक संस्कृति को पिछड़ी हुई मानकर तिरस्कृत करने में लगा हुआ था।
डॉ. मेघना शनिवार को जोधपुर के जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा आयोजित राजस्थान की लोक संस्कृति विभिन्न आयाम विषयक त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद ने विपरीत परिस्थितियों में ऋषि मेलों, लोक गीतों में सुधारवादी दृष्टिकोण का विकास और शिक्षित महिलाओं को लोक से जोड़ने का काम प्रमुखता से किया।
डॉ. मेघना ने कहा कि दयानंद ने लोक आचरण, लोक आस्थाओं, लोक परंपराओं को हूबहू स्वीकार करने के बजाय वैदिक तर्कवाद के मापदंड पर उन्हें तोलकर उनमें सुधार की संभावनाएं देखीं। लोक साहित्य खासकर लोक भाषाओं के उत्थान में दयानंद और आर्य समाज का विशेष योगदान रहा।
तकनीकी सत्र की अध्यक्षता की

डॉ. मेघना शर्मा ने इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन के प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता भी की। उनके साथ मंच पर सह अध्यक्ष के रूप में बनस्थली विद्यापीठ के इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शिल्पी गुप्ता, सोफिया कॉलेज अजमेर के इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पर्सिस लतिका दास व बेल्जियम की मारग्रेट योंकेरी शामिल रहीं।
उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत द्वारा किया गया। अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. ललित पंवार द्वारा सभी का मंच से धन्यवाद ज्ञापित किया गया।



