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अंतिम रिपोर्ट(एफआर) की बढ़ती प्रवृत्ति पर सवाल

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)।  किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस व्यवस्था का मूल उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अपराधियों को न्याय के कटघरे तक पहुंचाना होता है। पुलिस पर यह जिम्मेदारी भी होती है कि वह प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित जांच करे। किंतु हाल के वर्षों में राजस्थान पुलिस द्वारा मामलों में अंतिम रिपोर्ट (FR) लगाने की बढ़ती प्रवृत्ति कई सवाल खड़े करती है।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज मामलों में लगभग 31.83 प्रतिशत मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगाई गई, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 30.44 प्रतिशत था। इसका अर्थ यह है कि लगभग हर तीन में से एक मामला ऐसा माना गया जिसमें अपराध सिद्ध नहीं हुआ या मामला झूठा पाया गया। यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में कोई भी व्यक्ति बड़ी कठिनाई से पुलिस थाने तक पहुंच कर अपनी शिकायत दर्ज करवाता है।

मामला दर्ज करवाना आसान नहीं

समाज में प्रचलित धारणा यह है कि पुलिस में मामला दर्ज करवाना आसान नहीं होता। पीड़ित व्यक्ति अक्सर सामाजिक दबाव, आर्थिक परेशानियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद ही शिकायत दर्ज करवाता है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में मामलों को अंतिम रिपोर्ट के माध्यम से बंद कर दिया जाए तो इससे पीड़ितों का भरोसा कमजोर पड़ना स्वाभाविक है। विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में भी बड़ी संख्या में एफआर लगना चिंता का विषय है।

निस्संदेह यह भी सच है कि कुछ मामलों में व्यक्तिगत द्वेष, पारिवारिक विवाद या अन्य कारणों से झूठी शिकायतें दर्ज करवाई जाती हैं। किंतु यह मान लेना कि औसतन 30 से 35 प्रतिशत मामले झूठे ही होते हैं, न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। यदि कुछ प्रतिशत मामलों में झूठ की संभावना है, तो भी यह जरूरी है कि पुलिस प्रत्येक मामले की गंभीरता से जांच करे और पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद बनाए रखे।

समाज का भरोसा अत्यंत आवश्यक

पुलिस व्यवस्था पर समाज का भरोसा बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए आवश्यक है कि जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और संवेदनशील हो। अंतिम रिपोर्ट लगाने की प्रवृत्ति को भी विवेकपूर्ण ढंग से अपनाया जाए ताकि पीड़ित व्यक्ति को यह महसूस न हो कि उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया।

पुलिस यदि जनता की सुरक्षा और न्याय की भावना को केंद्र में रखकर कार्य करे तो न केवल अपराध नियंत्रण मजबूत होगा, बल्कि समाज में कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास भी और अधिक सुदृढ़ होगा।

 

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