Loading Now

updates

रसोई गैस की कमी: जिम्मेदारी और जागरूकता दोनों जरूरी

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। बीकानेर भी में इन दिनों  रसोई गैस सिलेंडर की कमी को लेकर घर घर चर्चा है।हालांकि इस संकट की वास्तविक स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन आम उपभोक्ताओं के बीच चिंता और असमंजस का माहौल जरूर बन गया है। घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति में आ रही कमी ने लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है, क्योंकि आज के समय में रसोई गैस हर घर की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है।

बताया जा रहा है कि व्यावसायिक गैस सिलेंडरों पर सरकार द्वारा कुछ प्रतिबंध लगाए जाने या उनकी उपलब्धता कम होने के कारण भी यह स्थिति पैदा हुई है। जिन स्थानों पर पहले व्यावसायिक सिलेंडरों का उपयोग हो रहा था, वहां अब संभव है कि घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल बढ़ गया हो। यदि ऐसा हो रहा है तो इससे घरेलू सिलेंडरों की मांग अचानक बढ़ना स्वाभाविक है और परिणामस्वरूप आम उपभोक्ता को सिलेंडर मिलने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। यह भी सच है कि आपूर्ति तंत्र में थोड़ी सी भी गड़बड़ी या मांग में अचानक वृद्धि होने पर सबसे ज्यादा परेशानी आम नागरिक को ही उठानी पड़ती है।

ऐसे में प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे स्थिति का स्पष्ट आकलन करें और आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग केवल घरेलू कार्यों के लिए ही हो और उनका व्यावसायिक दुरुपयोग न हो।

केवल प्रशासनिक समस्या मानकर छोड़ देना भी उचित नहीं

दूसरी ओर इस स्थिति को केवल प्रशासनिक समस्या मानकर छोड़ देना भी उचित नहीं होगा। आम नागरिकों को भी संसाधनों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाना होगा। गैस का उपयोग सोच-समझकर करना, कम गैस में अधिक काम करने की आदत विकसित करना और ऊर्जा की बचत को जीवन शैली का हिस्सा बनाना समय की मांग है। यदि खाना बनाने की ऐसी पद्धतियां अपनाई जाएं जिनमें गैस की खपत कम हो, तो इससे न केवल संकट के समय राहत मिल सकती है बल्कि दीर्घकाल में संसाधनों का संरक्षण भी संभव होगा।

दरअसल रसोई गैस जैसी आवश्यक सुविधा की उपलब्धता केवल सरकारी व्यवस्था पर निर्भर नहीं रह सकती। इसके लिए उपभोक्ताओं की जागरूकता और जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बीकानेर में पैदा हुई यह स्थिति एक संकेत है कि हमें ऊर्जा के उपयोग को लेकर अधिक सजग और संयमित बनने की जरूरत है। यदि प्रशासन और आमजन दोनों मिलकर जिम्मेदारी निभाएं, तो ऐसे संकटों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।

Share this content:

You May Have Missed