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भ्रामक खबरें और भीड़ का मनोविज्ञान

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। आज के सूचना युग में जहां खबरें पल भर में फैल जाती हैं, वहीं भ्रामक सूचनाएं समाज के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। अफवाहों के प्रभाव में आकर बिना सत्यापन के प्रतिक्रिया देना न केवल व्यक्तिगत विवेक की कमी को दर्शाता है, बल्कि सामूहिक रूप से सामाजिक असंतुलन को भी जन्म देता है। हाल के समय में यह देखा गया है कि डीजल, पेट्रोल या रसोई गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं की कमी की झूठी खबरें फैलते ही लोग बिना सोचे-समझे भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं। यह प्रवृत्ति चिंताजनक है।

लोकतंत्र हमें अभिव्यक्ति और स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन इसके साथ-साथ हमारे कर्तव्यों का भी निर्धारण करता है। केवल अधिकारों की बात करना और कर्तव्यों की अनदेखी करना लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ अन्याय है। जब लोग अफवाहों के आधार पर अनावश्यक भीड़ इकट्ठी करते हैं, तो वे न केवल व्यवस्था पर दबाव डालते हैं, बल्कि वास्तविक जरूरतमंदों के लिए भी कठिनाइयाँ उत्पन्न करते हैं।

वास्तविकता यह है कि अधिकांश समय इन आवश्यक वस्तुओं की कोई वास्तविक कमी नहीं होती। प्रशासन द्वारा नियमों को सख्ती से लागू करने के प्रयासों को भी कई बार लोग गलत समझ लेते हैं और इसे संकट की स्थिति मान बैठते हैं। परिणामस्वरूप कृत्रिम कमी उत्पन्न हो जाती है, जो पूरी तरह से मानवीय व्यवहार की देन होती है, न कि किसी वास्तविक आपूर्ति संकट की।

शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं

यह स्थिति हमारे समाज में व्याप्त अज्ञानता और जागरूकता की कमी को उजागर करती है। शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमें सामाजिक जिम्मेदारी और विवेकपूर्ण आचरण भी सिखाना चाहिए। बिना पुष्टि के किसी सूचना को आगे बढ़ाना या उसके आधार पर निर्णय लेना समाज में भ्रम और अव्यवस्था को बढ़ावा देता है।  आवश्यक है कि नागरिक सजग और जिम्मेदार बनें। किसी भी सूचना पर विश्वास करने से पहले उसके स्रोत की पुष्टि करें और अफवाहों से दूरी बनाए रखें। प्रशासन पर भरोसा रखें और नियमों का पालन करें।

यदि हम अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन करें, तो लोकतंत्र में किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न नहीं होगी। vयह समझना होगा कि समस्याएँ अक्सर बाहरी नहीं, बल्कि हमारी सोच और व्यवहार से उत्पन्न होती हैं। विवेक, धैर्य और जिम्मेदारी ही एक सशक्त और संतुलित समाज की नींव हैं।

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