समाचार सेवा प्रवाह-संपादकीय
MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। जल जीवन का आधार है। यह केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि पृथ्वी पर हर सजीव के अस्तित्व की शर्त है। जल के बिना जीवन की कल्पना असंभव है। विडंबना यह है कि जिस पृथ्वी पर जल की प्रचुरता दिखाई देती है, उसमें से पीने योग्य पानी की मात्रा अत्यंत सीमित है। ऐसे में जल का संरक्षण और उसका समुचित प्रबंधन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। भारत सरकार द्वारा हर घर तक नल से जल पहुंचाने के उद्देश्य से जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजना चलाई जा रही है।
इसका लक्ष्य है कि देश के प्रत्येक घर को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो। लेकिन केवल पाइपलाइन बिछा देने या नल लगा देने से यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो सकता। जब तक समाज में जल के महत्व को लेकर व्यापक जन-जागरूकता नहीं पैदा की जाएगी और जल संरक्षण को जन आंदोलन नहीं बनाया जाएगा, तब तक यह प्रयास अधूरा ही रहेगा। विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों में जल की समस्या अधिक गंभीर है। बीकानेर जिले में एक लाख से अधिक घरों का आज भी पर्याप्त जल सुविधा से वंचित होना चिंता का विषय है।
सामाजिक और पर्यावरणीय चेतावनी
यह स्थिति केवल प्रशासनिक चुनौती ही नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय चेतावनी भी है। यदि समय रहते जल के संरक्षण और प्रबंधन पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में यह संकट और भी गहरा सकता है। इस समस्या का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों जैसे तालाब, कुएं और जोहड़ों का पुनर्जीवन, तथा जल के विवेकपूर्ण उपयोग की आदत विकसित करना जरूरी है। साथ ही, जल के अनावश्यक अपव्यय को रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
जल संरक्षण के लिए स्कूलों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों के माध्यम से व्यापक जन-जागृति अभियान चलाने की आवश्यकता है। लोगों को यह समझाना होगा कि जल बचाना केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करना है। अंततः यह समझना होगा कि जल केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। यदि हम आज जल का सम्मान और संरक्षण करना सीख लें, तो ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित कर पाएंगे। क्योंकि सच यही है,जल है तो कल है।


