MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। बीकानेर की बेटी ट्विंकल अरोड़ा ने संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा में 91वीं रैंक प्राप्त की है। उन्होंने बताया कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता पाने के लिए धैर्य, अनुशासन और सकारात्मक सोच बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता और निरंतर मेहनत करने वाला व्यक्ति एक दिन अवश्य सफल होता है। ट्विंकल ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उस दिशा में निरंतर प्रयास किया जाए तो सफलता निश्चित रूप से प्राप्त की जा सकती है।
अपनी सफलता के सूत्र साझा करते हुए ट्विंकल अरोड़ा ने कहा कि नियमित अध्ययन और निरंतर अभ्यास ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। ट्विंकल अरोड़ा स्वयं को आशावादी और भाग्यवादी भी मानती हैं। उनका कहना है कि मेहनत के साथ-साथ भाग्य का साथ होना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई बार जीवन में ऐसे अवसर और परिस्थितियां बनती हैं जो व्यक्ति के प्रयासों को नई दिशा दे देती हैं। उनके अनुसार यह देखना भी दिलचस्प होता है कि कोई व्यक्ति कहां से अपनी यात्रा शुरू करता है और आगे चलकर किस मुकाम तक पहुंच जाता है।
ट्विंकल का मानना है कि शासन व्यवस्था में जनता की भागीदारी बढ़ाना किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होनी चाहिए। उनका कहना है कि भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि आम नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम है। बातचीत में ट्विंकल अरोड़ा ने कहा कि प्रशासन तभी प्रभावी और सफल हो सकता है जब जनता और प्रशासन के बीच संवाद और विश्वास मजबूत हो। उन्होंने कहा कि एक आईएएस अधिकारी को केवल आदेश देने वाला प्रशासक नहीं बल्कि जनता की समस्याओं को समझने वाला संवेदनशील प्रतिनिधि भी होना चाहिए।
आम लोगों की भागीदारी भागीदारी जरूरी
यदि योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में आम लोगों की भागीदारी बढ़ेगी तो शासन अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगा। ट्विंकल ने कहा कि प्रशासनिक सेवा में आने वाले अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों को हमेशा सर्वोपरि रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि चाहे काम का दबाव कितना ही अधिक क्यों न हो, अधिकारियों के सामने हर समय देश की आन, बान और शान को बनाए रखने का दायित्व रहता है। उनके अनुसार प्रशासनिक पद केवल अधिकार का प्रतीक नहीं बल्कि सेवा और समर्पण का माध्यम है।


