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Neeraj Joshi
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राष्ट्रपति ने शांतिवन आबूरोड में किया महिला सम्मेलन का उद्घाटन
आबू रोड (समाचार सेवा)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि दया याचिका के अधिकार को ऐसे केस में जो पॉक्सो एक्ट में घटनाएं होती हैं उनको ऐसे दया याचिका के अधिकार से वंचित कर दिया जाए। उन्हें ऐसे किसी भी प्रकार के अधिकार की जरूरत नहीं है। श्री कोविन्द शुक्रवार को ब्रह्माकुमारीज संस्थान में महिला सम्मेलन का उद्घाटन अवसर को संबोधित कर रहे थे। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र, संस्थान की मुख्य प्रशासिका दादी जानकी और राजस्थान के केबिनेट मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने दीप प्रज्जवलित कर किया।

समारोह में राष्ट्रपति ने कहा कि इस प्रकार के जो दोषी होते हैं उनको संविधान में दया याचिका का अधिकार दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस पर पुन: विचार की आवश्यकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि अब ये सब संसद पर निर्भर करता है कि संविधान संशोधन हो।
राष्ट्रपति ने कहा कि बेटियों पर होने वाले आसुरी प्रहारों की वारदातें देश की अंतर आत्मा को अंदर तक झकझोर कर रख देती हैं। उन्होंने कहा कि लड़कों में महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी हर माता-पिता की है, हर नागरिक की है। ब्रह्माकुमारीज संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय आबू रोड स्थित शांतिवन परिसर में महिला सशक्तीकरण द्वारा सामाजिक परिवर्तन विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि महिला सुरक्षा बहुत ही गंभीर विषय है जिसका सम्मेलन में उल्लेख भी किया गया है। इस विषय पर बहुत काम हुआ है लेकिन अभी बहुत काम करना बाकी है।
विश्व पटल पर प्रभावी भूमिका निभा रहा है संस्थान
राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि लगभग विश्व के 140 देशों में आठ हजार से अधिक सेवाकेंद्र के माध्यम से ब्रह्माकुमारीज संस्थान विश्व पटल पर अपनी प्रभावी भूमिका निभा रहा है। पूरे विश्व में ये सबसे बड़ी आध्यात्मिक संस्था है। संस्थान ने पूरे विश्व में भारत का गौरव बढ़ाया है। महिलाओं के सशक्तीकरण, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, स्वच्छता के क्षेत्र में संस्थान सामाजिक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहा है। राष्ट्रपति ने ब्रह्माकुमारीज के शांतिवन में सहभोज की व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि यहां सभी वर्गों, जाति-धर्म को लोगों को लिए एकसमान सहभोज की व्यवस्था सराहनीय है।

बेटियों का हो रहा सशक्तीकरण, बांसवाड़ा बेहतर उदाहरण राष्ट्रपति ने कहा कि देश में चाइल्ड सेक्स रेशियों में सुधार हो रहा है। महिलाओं का सशक्तीकरण हो रहा है। आज देश में दस लाख से अधिक महिलाएं पंचायती राज में जिम्मेदारी संभाल रही हैं। देश में पहली बार 78 महिला सांसद निर्वाचित होकर संसद पहुंची हैं। जनधन योजना के तहत खोले गए खातों में 52 फीसदी खाते महिलाओं के हैं।
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में प्रति हजार बेटों पर 1005 बेटियां पैदा होना ये सब बातें नारी सशक्तीकरण को बढ़ावा देती हैं। महिलाओं के विकास से ही समाज का विकास संभव राष्ट्रपति कोविंद ने जोर दिया कि महिलाओं को आगे बढ़ाने और उनके विकास में ही राष्ट्र का विकास संभव है। शिक्षा सशक्तीकरण का आधार होता है। आज बालिकाओं की शिक्षा को सुविधाजनक बनाया जा रहा है। स्कूलों में शौचालय से लेकर अन्य व्यवस्थाएं होने से छात्राओं को सुविधा मिली है।



