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शार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट की पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन का कार्य शुरू

Digitization work of manuscripts of Shardul Rajasthani Research Institute begins

NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)। शार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट की सैंकड़ों वर्ष पुरानी पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए डिजिटाइजेशन का कार्य सोमवार को शुरू हुआ। भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ज्ञान भारतम् मिशन के जनवरी में जयपुर के विश्व गुरुदीप आश्रम शोध संस्था और इंस्टीट्यूट के मध्य इन पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए एमओयू हुआ था।

डिजिटाइजेशन का यह कार्य संस्थान के तकनीकी विशेषज्ञों आश्रम के मोहित बिस्सा और लव कुमार देराश्री द्वारा इंस्टीट्यूट के पदाधिकारियों की देखरेख में होगा। उन्होंने बताया कि इंस्टीट्यूट की 250 से अधिक पांडुलिपियों को संरक्षित किया जाएगा। इंस्टीट्यूट के सचिव राजेन्द्र जोशी ने बताया कि इंस्टीट्यूट की अनमोल हस्तलिखित पांडुलिपियां डिजिटल रूप में सुरक्षित होंगी, जो राजस्थानी साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन को नई दिशा प्रदान करेगा।

इस दौरान वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मदन सैनी, जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक डॉ. हरिशंकर आचार्य, गीतकार राजाराम स्वर्णकार तथा पुस्तकालयाध्यक्ष विमल शर्मा अतिथि के रूप में मौजूद रहे।