MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। पश्चिमी राजस्थान जैसे मरुस्थलीय क्षेत्र में पानी का महत्व जीवनरेखा से कम नहीं है। यहां खेती, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार ही सिंचाई व्यवस्था पर टिका हुआ है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सिंचित क्षेत्र विकास विभाग (सीएडी) की स्थापना की गई थी। इस विभाग का उद्देश्य नहरों से मिलने वाले पानी का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना और खेतों तक जल पहुंचाने की व्यवस्थाओं का विकास करना था। एक समय था जब यह विभाग पश्चिमी राजस्थान में कृषि विकास का महत्वपूर्ण आधार माना जाता था।
सीएडी विभाग के अंतर्गत सिंचित क्षेत्र विकास आयुक्त तथा अतिरिक्त सिंचित क्षेत्र विकास आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी तैनात रहते थे। इनके अधीन अनेक आरएएस अधिकारी, मुख्य अभियंता और तकनीकी स्टाफ कार्य करते थे। विभाग का मुख्य कार्य वॉटर कोर्स का निर्माण, नहरों से खेतों तक पानी की सुचारु आपूर्ति सुनिश्चित करना और सिंचाई तंत्र को सुदृढ़ बनाना था। इस व्यवस्था के कारण हजारों किसानों को सीधे लाभ मिला और रेगिस्तानी इलाके में भी कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली।
लेकिन समय के साथ इस महत्वपूर्ण विभाग की स्थिति कमजोर होती चली गई। वर्तमान में स्थिति यह है कि विभाग में कई इकाइयां तो मौजूद हैं, लेकिन उनके पास करने के लिए कोई ठोस कार्य नहीं है। प्रशासनिक संरचना तो बनी हुई है, परन्तु उसकी सक्रियता और प्रभावशीलता लगभग समाप्त होती नजर आती है। वॉटर कोर्स निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी अब अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहे हैं।
कृषि व्यवस्था पर असर
यह स्थिति केवल एक विभाग की कमजोरी का प्रश्न नहीं है, बल्कि इससे सीधे तौर पर क्षेत्र के किसानों और कृषि व्यवस्था पर असर पड़ता है। पश्चिमी राजस्थान में नहरों के माध्यम से आने वाले पानी का सही प्रबंधन यदि नहीं होगा तो सिंचाई का पूरा ढांचा प्रभावित होगा। इससे जल का दुरुपयोग भी बढ़ सकता है और कई खेतों तक पानी पहुंचने में बाधा भी उत्पन्न हो सकती है।
उपयोगिता पर पुनर्विचार करे सरकार
सरकार को चाहिए कि वह सिंचित क्षेत्र विकास विभाग की भूमिका और उपयोगिता पर पुनर्विचार करे। यदि यह विभाग किसानों और सिंचाई व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है तो इसे फिर से सक्रिय और प्रभावी बनाया जाना चाहिए। पर्याप्त संसाधन, स्पष्ट कार्य योजना और जवाबदेही सुनिश्चित कर इस विभाग को पुनर्जीवित करना समय की आवश्यकता है। पश्चिमी राजस्थान जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जल प्रबंधन की अनदेखी भविष्य में गंभीर समस्याएं खड़ी कर सकती है, इसलिए इस विषय पर गंभीरता से ध्यान देना अनिवार्य है।
वरिष्ठ पत्रकार-महेन्द्र सिंह शेखावत


