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अफवाह का आतंक और जिम्मेदारी का सवाल

महेंद्र सिंह शेखावत

राजस्थान के बीकानेर में गुरुवार सुबह  कोर्ट परिसर में बम होने की अफवाह ने पूरे शहर को कुछ घंटों के लिए असामान्य स्थिति में ला खड़ा किया। एक अज्ञात ई-मेल के माध्यम से फैलाई गई इस सूचना ने प्रशासन, पुलिस और आम नागरिकों के बीच भारी चिंता और अफरातफरी का माहौल पैदा कर दिया। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस और प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करते हुए अदालत परिसर खाली करवाना पड़ा, परिसर को सील करना पड़ा और व्यापक जांच अभियान चलाना पड़ा। स्वाभाविक है कि ऐसी स्थिति में सरकारी कामकाज प्रभावित होता है और दूर-दराज से आए लोग भी भारी असुविधा का सामना करते हैं।

दरअसल यह घटना केवल एक अफवाह नहीं, बल्कि उस मानसिकता का उदाहरण है जिसमें कुछ सिरफिरे लोग मजाक या सनक में ऐसी हरकतें कर बैठते हैं जिनके गंभीर सामाजिक परिणाम होते हैं। एक ई-मेल या फोन कॉल से फैली अफवाह पूरे शहर की धड़कनें बढ़ा देती है। अदालत जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की झूठी सूचना देना न केवल गैर जिम्मेदाराना है बल्कि कानून और व्यवस्था के साथ खिलवाड़ भी है। इस तरह की घटनाओं का एक बड़ा दुष्परिणाम यह भी होता है कि पुलिस और प्रशासन को अपने नियमित कार्यों को छोड़कर पूरी ताकत इस तरह की जांच में लगानी पड़ती है। परिणामस्वरूप अन्य जरूरी कार्य बाधित होते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। अदालतों में आने वाले वादकारियों, वकीलों और कर्मचारियों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है।

सबसे चिंताजनक पहलू

न्यायिक कार्य रुक जाता है, सुनवाई टल जाती है और लोगों को आर्थिक व मानसिक दोनों तरह का नुकसान झेलना पड़ता है।सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ऐसी घटनाएं समाज में भय और असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं। जब किसी शहर के प्रमुख संस्थान,जैसे अदालत, अस्पताल या रेलवे स्टेशन के बारे में बम की अफवाह फैलती है तो आम नागरिक के मन में स्वाभाविक रूप से डर पैदा होता है। यह डर ही ऐसे लोगों की सनकी मानसिकता की असली सफलता होता है। इसलिए जरूरी है कि ऐसे मामलों को केवल शरारत या मजाक समझकर नजरअंदाज न किया जाए। पुलिस और प्रशासन को तकनीकी संसाधनों की मदद से इस तरह की अफवाह फैलाने वाले व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। कठोर दंड ही ऐसे लोगों के लिए वास्तविक संदेश बन सकता है कि समाज और व्यवस्था के साथ खिलवाड़ की कोई जगह नहीं है।

इसके साथ ही आम नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि वे किसी भी अपुष्ट सूचना को बिना पुष्टि के आगे न बढ़ाएं। सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के दौर में अफवाहें बहुत तेजी से फैलती हैं, इसलिए संयम और सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। बीकानेर जैसे शांत और सांस्कृतिक शहर में इस प्रकार की घटना निश्चय ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उम्मीद की जानी चाहिए कि दोषी व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की सनक भरी हरकत करने से पहले सौ बार सोचे। समाज और व्यवस्था की शांति बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

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