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सृजन का दिव्य अनुष्ठान: विनय त्रिवेदी के कैनवास पर गणेश का आधुनिक व आध्यात्मिक स्वरूप

जयपुर के वरिष्ठ चित्रकार एवं शिक्षक विनय त्रिवेदी की कला यात्रा पर एक विशेष आलेख:

योगेंद्र  कुमार पुरोहित, बीकानेर, (समाचार सेवा)॥ विनयेऽपि सौन्दर्यं प्रतिबिम्बितं भवति ॥ विनय और विनम्रता में ही सच्चा सौंदर्य प्रतिबिंबित होता हैयह उक्ति जयपुर के प्रतिष्ठित चित्रकार और शिक्षक विनय त्रिवेदी के व्यक्तित्व और उनकी कला साधना पर पूर्णतः सटीक बैठती है। सेठ आनंदी लाल पोद्दार बधिर विद्यालय, जयपुर में व्याख्याता (चित्रकला) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे विनय त्रिवेदी भारतीय कला, परंपरा और पौराणिक कथाओं को आधुनिक संवेदनशीलता के साथ कैनवास पर जीवंत करते हैं।

 

गणेश श्रृंखला: परंपरा, आधुनिकता और प्रयोगात्मक रंगों का संगम

चित्रकार विनय त्रिवेदी ने अपनी नवीन चित्र श्रृंखला में भगवान श्री गणेश को केंद्र में रखते हुए रंगों और रेखाओं का एक मनोरम एवं अद्भुत संसार रचा है। उनकी कला की सबसे बड़ी विशेषता उनका प्रयोगात्मक दृष्टिकोण है!

परत-दर-परत रंगों का संयोजन- 

कैनवास पर रंगों को परत-दर-परत (layering technique) लगाकर वे गणेश के विभिन्न भावों, स्मृतियों और अनुभूतियों को उजागर करते हैं। पौराणिक एवं आधुनिक समन्वय-  वे गणेश को केवल पारंपरिक या शास्त्रीय रूप में ही सीमित नहीं रखते, बल्कि आधुनिक तत्वों, माध्यमों और कल्पनाशील रंगों के साथ उन्हें एक नया कलात्मक आयाम देते हैं। प्रतीकात्मकता और केले के पत्ते-  अपनी कृतियों में उन्होंने गणेश को केलों के पत्तों, विभिन्न मुद्राओं तथा शुभ प्रतीकों के साथ बेहद कलात्मक ढंग से संयोजित किया है।

अथर्वशीर्ष के मंत्र और सकारात्मक ऊर्जा का संचार –

भारतीय कला संस्कृति में गणेश चित्र केवल सौंदर्यपरक आकर्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे दिव्य ऊर्जा के सशक्त संवाहक हैं। विनय त्रिवेदी अपनी कलाकृतियों में गणेश अथर्वशीर्ष के मंत्रों तथा मंगलकारी भारतीय प्रतीकों का समावेश करते हैं। यह आध्यात्मिक संयोजन दर्शक को न केवल कलात्मक आनंद देता है, बल्कि उसके परिवेश में एक सकारात्मक और दिव्य ऊर्जा का संचार भी करता है। सदियों की कलात्मक प्रगति और गहन आध्यात्मिक विश्वासों की झलक उनकी कृतियों में स्पष्ट दिखाई देती है।

अनुभूति की स्वतंत्रता और निरंतर गतिशील सृजन-यात्रा –

द्वि-आयामी सतह से परे, विनय त्रिवेदी की कला दर्शक के भीतर एक नई आंतरिक यात्रा की शुरुआत करती है! आंतरिक संसार का चित्रण- वे अमूर्त और मूर्त कला के बीच के सेतु हैं, जो केवल दृश्य रूप को नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर छिपे अनुभवों, स्मृतियों और वर्तमान के संवाद को चित्रित करते हैं। शैली में निरंतर विस्तार – एक निश्चित शैली में बंधने के बजाय वे रंग, बनावट (texture), रेखा और सतह के साथ लगातार नए प्रयोग करते हैं। कला की अनुभूति की स्वतंत्रता ही विनय त्रिवेदी के चित्रों को एक जीवंत, स्पंदनशील और कालजयी स्वर प्रदान करती है।

चित्रकार परिचय संक्षेप  

नाम: विनय त्रिवेदी (जन्म: 02 अगस्त 1968). योग्यता: डिप्लोमा इन ड्राइंग एंड पेंटिंग, एम.ए. पद: व्याख्याता (चित्रकला), सेठ आनंदी लाल पोद्दार बधिर विद्यालय, जयपुर. स्टूडियो: ‘चित्रांकन’, बाबा जी की चक्की, बेनाड रोड, रेलवे स्टेशन के पास, जयपुर ! मैं विनय त्रिवेदी जी की इस सनातनी कला यात्रा के अनवरत जारी रहने की मंगल कामना के साथ उन्हें बधाई भी देता हूँ इस लिए की वे संकल्पित होकर भगवान श्री गणेश जी महाराज की तन मन और रंग से सेवा करने में  लीन है आत्म आनंद से परमानन्द के मार्ग तक पहुँचने को! चित्रकार योगेंद्र  कुमार पुरोहित मास्टर ऑफ़  फाइन आर्टनेशनल डिज़ाइनर / वस्त्र  मंत्रालय भारत सरकार बीकानेर, इंडिया

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