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संसाधनों व पर्याप्‍त शिक्षकों के अभाव में आफत बने क्रमोन्‍नत विद्यालय

विद्यालयों के अनुपात में शिक्षण इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध नहीं होना बड़ी विसंगति

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)।  राज्‍य में बड़ी संख्या में विद्यालयों को क्रमोन्नत कर सीनियर सेकंडरी स्तर तक विकसित किया है। इस कदम को शिक्षा के प्रसार की दिशा में सकारात्मक माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ जुड़ी कई व्यावहारिक समस्याएं भी अब सामने आने लगी हैं। वरिष्ठ अध्यापक संघ (कला) के प्रदेशाध्यक्ष और शिक्षाविद सुभाष जोशी का कहना है कि सरकार का यह कदम प्रशासनिक दृष्टि से भले ही सराहनीय हो, लेकिन इसकी वास्तविक उपयोगिता तभी साबित हो सकती है जब स्कूलों में पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षक और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

उनका मानना है कि केवल विद्यालयों का स्तर बढ़ा देने से शिक्षा की गुणवत्ता स्वतः नहीं सुधरती, इसके लिए समुचित योजना और संसाधन भी जरूरी हैं। इससे साफ है कि राजस्थान में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण बहस सामने आ रही है। भौगोलिक दृष्टि से देश के सबसे बड़े राज्य में पहली से बारहवीं कक्षा तक की शिक्षा का संचालन बीकानेर स्थित माध्यमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा निदेशालयों के माध्यम से किया जाता है। हाल के वर्षों में राज्य सरकार ने शिक्षा के विस्तार और सुलभता को ध्यान में रखते हुए विद्यालयों को क्रमोन्नत किया है।

आवश्यक आधारभूत ढांचे और शिक्षकों की व्यवस्था जरूरी

जानकारों का कहना है कि सरकार ने विद्यालयों को बड़े स्तर पर सीनियर सेकंडरी में क्रमोन्नत तो कर दिया, लेकिन उसी अनुपात में आवश्यक आधारभूत ढांचे और शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की गई। परिणामस्वरूप कई स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी बनी हुई है, वहीं प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और अन्य शैक्षणिक संसाधनों का भी अभाव देखा जा रहा है। ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। दूसरी ओर शिक्षा विभाग में पदोन्नतियों को लेकर भी एक बड़ी विसंगति सामने आई है। जानकारी के अनुसार, कई शिक्षकों ने पदोन्नति के उद्देश्य से अपनी मूल विषय स्ट्रीम से अलग विषयों में पोस्ट ग्रेजुएशन कर लिया। इससे पदोन्नति प्रक्रिया में असंतुलन पैदा हो गया है।

लंबे समय तक पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित

हालांकि वर्ष 2021 के बाद सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि शिक्षक उसी विषय में पदोन्नति के पात्र होंगे जिसमें उन्होंने स्नातक किया है और उसी स्ट्रीम में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है। इसके बावजूद शिक्षक संगठनों का आरोप है कि 2021 से पहले लगभग 15 हजार शिक्षक स्ट्रीम से अलग विषयों में पोस्ट ग्रेजुएशन कर चुके हैं, जिससे पदोन्नतियों में जटिलता और असंतुलन उत्पन्न होना तय है। इस स्थिति के कारण विभाग में लंबे समय तक पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित रह सकती है, जिससे शिक्षकों में असंतोष भी बढ़ सकता है।

इसके अलावा, थर्ड ग्रेड शिक्षकों के तबादलों का मुद्दा भी लंबे समय से लंबित है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्षों से स्थानांतरण नहीं होने के कारण कई शिक्षक अपने गृह क्षेत्र से दूर कार्य करने को मजबूर हैं। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत और पारिवारिक स्थिति प्रभावित होती है, बल्कि कार्यक्षमता पर भी असर पड़ता है।

इस समस्या के समाधान के लिए शिक्षक संगठनों ने परस्पर (म्यूचुअल) ट्रांसफर की व्यवस्था लागू करने की मांग की है। उनका मानना है कि यदि आपसी सहमति से स्थानांतरण की अनुमति दी जाती है तो इससे शिक्षकों की कमी भी संतुलित रहेगी और पदों पर भी कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

राजस्थान में शिक्षा के विस्तार के लिए उठाए गए कदमों के साथ-साथ अब गुणवत्ता, संसाधन और प्रशासनिक संतुलन पर ध्यान देना जरूरी हो गया है। यदि इन चुनौतियों का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन और बढ़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ेगा।

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