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चुनाव जीतने में नहीं बल्कि जनहित में निहित है लोकतंत्र की आत्मा

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। लोकतंत्र की आत्मा केवल चुनाव जीतने में नहीं बल्कि जनहित की सच्ची सेवा में निहित होती है। राजनीति का मूल उद्देश्य समाज और राष्ट्र के व्यापक हितों की रक्षा करना होना चाहिए, न कि केवल सत्ता प्राप्ति के लिए भीड़ जुटाना या शक्ति प्रदर्शन करना। आज के परिवेश में यह चिंता बढ़ती जा रही है कि राजनीतिक सफलता का मापदंड नैतिक मूल्यों के बजाय जनसमूह की संख्या और प्रदर्शन की ताकत बनता जा रहा है। यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर चुनौती है।

वास्तविक राजनीति में भीड़ का नहीं, बल्कि नैतिकता का महत्व सर्वोपरि होना चाहिए। इतिहास गवाह है कि जिन नेताओं ने सत्य, ईमानदारी और पारदर्शिता को अपनाया, उन्होंने न केवल जनता का विश्वास जीता बल्कि स्थायी और समावेशी विकास की नींव भी रखी। इसके विपरीत, जब राजनीति केवल संख्या बल और प्रभाव दिखाने का माध्यम बन जाती है, तब निर्णयों में दूरदर्शिता और जनहित गौण हो जाते हैं।

प्रजातंत्र में मत प्राप्त करना केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। मतदाता का विश्वास तभी अर्जित किया जा सकता है जब राजनीतिक दल और नेता सत्यनिष्ठा के साथ अपने वादों को प्रस्तुत करें और उन्हें निभाने की प्रतिबद्धता भी दिखाएं। यदि चुनाव केवल भीड़ जुटाने और भावनाओं को भड़काने का माध्यम बन जाएं, तो यह लोकतंत्र के मूल स्वरूप को कमजोर करता है। ऐसी स्थिति में नीतियां जनहित के बजाय तात्कालिक लाभ और राजनीतिक स्वार्थों के आधार पर बनती हैं।

समाज में बढ़ता है विभाजन और अविश्वास   

शक्ति प्रदर्शन और भीड़ के आधार पर सरकारों का बनना और बिगड़ना विकास की अवधारणा को पीछे धकेलता है। इससे न केवल नीतिगत अस्थिरता पैदा होती है, बल्कि समाज में विभाजन और अविश्वास भी बढ़ता है। विकास के लिए आवश्यक है कि निर्णय विवेकपूर्ण, दीर्घकालिक और समावेशी हों, जिनमें सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखा जाए।

यह समय की मांग है कि राजनीति में नैतिकता, पारदर्शिता और जनसेवा को पुनः केंद्र में लाया जाए।

सच्ची शक्ति भीड़ में नहीं

नेताओं को यह समझना होगा कि सच्ची शक्ति भीड़ में नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और अपने सिद्धांतों की दृढ़ता में होती है। जब राजनीति नैतिक मूल्यों के आधार पर संचालित होगी, तभी लोकतंत्र सशक्त होगा और विकास की संकल्पना साकार हो सकेगी।