नीरज जोशी, बीकानेर, (समाचार सेवा)। इंदिरा नहर- पानी चोरी पर नियंत्रण और अंतिम छोर तक जल पहुंचाना आज भी चुनौती, इंदिरा गांधी नहर परियोजना ने पश्चिमी राजस्थान के कृषि विकास और जनजीवन को नई दिशा दी है, लेकिन पानी की उपलब्धता, चोरी पर नियंत्रण और अंतिम छोर तक समान रूप से जल पहुंचाना आज भी परियोजना के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं। परियोजना के मुख्य अभियंता विवेक गोयल ने बताया कि नहरों से सायफन लगाकर पानी चोरी करना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में पानी की चोरी रोकने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था की जरूरत बनी हुई है। इस संबंध में नहर क्षेत्र में अलग से आरएसी बटालियन तैनात करने की जरूरत भी महसूस की जा रही है, ताकि पानी चोरी और उससे जुड़े विवादों से इंजीनियरिंग स्टाफ को राहत मिले और वे परियोजना के तकनीकी कार्यों पर अधिक ध्यान दे सकें।
टेल क्षेत्र के किसानों की परेशानी
राजस्थान के हिस्से का पूरा पानी नहीं मिलने से नहर के अंतिम छोर यानी टेल क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए परेशानी पर मुख्य अभियंता गोयल ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए पंजाब सरकार और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के स्तर पर भी प्रयास किए जा रहे हैं। जानकारी में रहे कि करीब 8 हजार करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इंदिरा गांधी नहर परियोजना राजस्थान की जीवन रेखा है। विश्व की सबसे लंबी नहरों में शामिल इस परियोजना से प्रतिवर्ष 26 हजार करोड़ रुपये से अधिक की आय अर्जित होने का अनुमान है।
स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति प्रमुख
16 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई कर यह परियोजना क्षेत्र के लोगों का जीवन स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। समय के साथ इंदिरा नहर परियोजना में कई बदलाव किए गए हैं। इनमें स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति प्रमुख है। इससे पानी का बेहतर उपयोग करते हुए अधिकतम क्षेत्र में सिंचाई संभव हो सकती है। भविष्य में जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए पाइप आधारित सिंचाई परियोजनाओं पर भी काम किया जाएगा।
















