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मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है खरपतवार-गाजर घास- डॉ. शीश पाल सिंह

 नीरज जोशी, बीकानेर, (समाचार सेवा) कृषि अनुसंधान केन्द्र बीकानेर के वैज्ञानिक डॉ. शीश पाल सिंह ने कहा कि पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस या गाजर घास एक आक्रामक खरपतवार है, जो फसलों और स्थानीय जैव विविधता को प्रभावित करने के साथ मानव एवं पशु स्वास्थ्य के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है।

डॉ. सिंह बुधवार को खरपतवार-गाजर घास के प्रतिकूल प्रभावों व प्रबंधन की जानकारी हेतु कृषि अनुसंधान केन्द्र में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने किसानों व विद्यार्थियों को गाजर घास से स्वास्थ्य, पर्यावरण व खेती पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की जानकारी दी। डॉ रूपेश मीना ने गाजर घास में पाए जाने वाले विषाक्त पदार्थों व उनके प्रभाव के बारे में बताया।

रोगाणुओं एवं कीट-पतंगों के लिए आश्रय स्थल

डॉ. बी.डी.एस. नाथावत ने गाजर घास को विभिन्न बीमारियों से जुड़े रोगाणुओं एवं कीट-पतंगों के लिए आश्रय स्थल बताते हुए इसके समयबद्ध नियंत्रण पर जोर दिया। डॉ. ब्रिज सिंह मीना ने गाजर घास के नियंत्रण की विभिन्न विधियों की जानकारी दी। डॉ भूपेंद्र सिंह ने कहा कि फूल एवं बीज बनने से पहले ही नियंत्रित कर गाजर घास को समूल नष्ट करने के प्रयास किए जाएं।

कार्यक्रम के समापन पर कृषि महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने जागरूकता रैली निकाली। विद्यार्थियों ने “गाजर घास भगाओ—पर्यावरण बचाओ” और “गाजर घास भगाओ—कृषि बचाओ” नारे लगाए। गौरतलब है कि 16 से 22 अगस्त तक पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस जागरूकता सप्ताह आयोजित किया जा रहा है।

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