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राष्ट्रीय चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति है हिन्दी- डॉ. केवलिया

Hindi is a powerful expression of national consciousness – Dr. Kevaliya

नीरज जोशी, बीकानेर, (समाचार सेवा) वरिष्ठ साहित्यकार-शिक्षाविद् डॉ. मदन केवलिया ने कहा कि राष्ट्रीय एकता के सशक्तीकरण में हिन्दी का अभूतपूर्व योगदान है, इसने पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में बांधा है। हिन्दी राष्ट्रीय चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति है। डॉ. केवलिया हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को प्रतिमान संस्थान, सादुलगंज की ओर से आयोजित राष्ट्रीय एकता का सशक्तीकरण और हिन्दी विषयक संगोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भी हिन्दी समाचार पत्र-पत्रिकाओं का अविस्मरणीय योगदान रहा है।

हिन्दी भाषा भारत की विविधताओं को जोड़ने वाली एक ऐसी कड़ी है, जिसमें देश की मिट्टी की खुशबू, लोकजीवन की सहजता और समृद्ध परंपराओं के साक्षात दर्शन होते हैं। यह पूरे देश की सम्पर्क भाषा बन गयी है। राजकीय डूंगर महाविद्यालय में सहायक आचार्य, हिन्दी डॉ. शशि बेसरवारिया ने कहा कि हिन्दी दिवस हमें अपनी मातृभाषा और राजभाषा के प्रति सम्मान एवं गौरव की भावना को और मजबूत करने का अवसर देता है। संपूर्ण विश्व में हिन्दी भाषा को उल्लेखनीय मान-सम्मान मिल रहा है, हिन्दी देश की एकता-अखंडता को सशक्त कर रही है। पूर्व हिन्दी व्याख्याता कमलनारायण पुरोहित ने कहा कि हिन्दी ने साहित्य, पत्रकारिता, शिक्षा, सिनेमा और जनसंचार के क्षेत्र में अपना विशिष्ट स्थान बनाया है व हिन्दी इनके माध्यम से राष्ट्रीय एकता के सशक्तीकरण में उल्लेखनीय योगदान दे रही है।

एस.डी. पी.जी. महाविद्यालय, खाजूवाला के प्राचार्य डॉ. मिर्जा हैदर बेग ने कहा कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में भारत की राजभाषा का दर्जा दिया था। देश की एकता और सांस्कृतिक अस्तित्व की रक्षा में हिन्दी का अविस्मरणीय योगदान रहा है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए सी.ए. खुशी केवलिया ने कहा कि हिन्दी दुनिया की सबसे सरल, समृद्ध व वैज्ञानिक भाषाओं में से है। कथाकार शरद केवलिया ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रभावती पुरोहित, सितारा परवीन, इंदिरा केवलिया, अवनि बेसरवारिया, मन्मथ केवलिया, उर्विजा, आदिल मिर्जा, अद्रिजा सहित अनेक लोग उपस्थित थे।