पालनहार योजना
MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। बीकानेर जिले में सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सामाजिक एवं न्याय अधिकारिता विभाग द्वारा पालनहार योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत जिले में ऐसे 13,736 बच्चे, जिनके माता–पिता नहीं हैं या केवल मां है, को आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है। इन बच्चों की देखभाल 7,304 संरक्षकों द्वारा की जा रही है।
सामाजिक एवं न्याय अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक एल डी पंवार के हवाले से सहायक निदेशक डॉ अरविंद आचार्य ने बताया कि यह योजना समाज के सबसे कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा, पोषण और सुरक्षित भविष्य देने के उद्देश्य से लागू की गई है।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत जीरो से छह वर्ष तक की आयु के उन बच्चों को, जिनकी माता विधवा है, नाता प्रथा के तहत अलग रह रही है या माता–पिता दिव्यांग हैं, 750 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जाती है। वहीं छह से अठारह वर्ष की आयु के ऐसे बच्चों को 1,500 रुपये प्रतिमाह का लाभ प्रदान किया जा रहा है।
परवरिश और शिक्षा में न आए कोई बाधा
इसके अतिरिक्त, यदि बच्चे के माता–पिता दोनों नहीं हैं और वह पूर्णतः अनाथ है, तो उसे जीरो से छह वर्ष की आयु तक 1,500 रुपये प्रतिमाह तथा छह से अठारह वर्ष तक 2,500 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि दी जाती है। यह राशि सीधे संरक्षक के माध्यम से बच्चे की आवश्यकताओं पर खर्च की जाती है, जिससे उसकी परवरिश और शिक्षा में कोई बाधा न आए।
शिक्षा को विशेष प्राथमिकता
योजना के अंतर्गत बच्चों की शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए नियमित विद्यालय अध्ययन अनिवार्य किया गया है। बच्चों का शैक्षणिक रिकॉर्ड शाला दर्पण पोर्टल से मैप किया जाता है, ताकि उनकी उपस्थिति, कक्षा प्रगति और पढ़ाई की निरंतर निगरानी की जा सके। यदि बच्चा विद्यालय से अनुपस्थित रहता है या पढ़ाई छोड़ देता है, तो योजना का लाभ प्रभावित हो सकता है।
बुनियादी जरूरतों का रखा ध्यान
डॉ आचार्य ने बताया कि आर्थिक सहायता के साथ–साथ योजना में बच्चों की बुनियादी जरूरतों का भी ध्यान रखा गया है। इसी क्रम में साल में एक बार 2,000 रुपये की अतिरिक्त राशि ड्रेस एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए प्रदान की जाती है, जिससे बच्चे आत्मसम्मान के साथ विद्यालय जा सकें।
सामाजिक सुरक्षा और बाल संरक्षण
विभाग का मानना है कि पालनहार योजना न केवल आर्थिक मदद है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा और बाल संरक्षण का एक सशक्त माध्यम भी है। इससे निराश्रित और अनाथ बच्चों को परिवार जैसा वातावरण मिलता है और वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ पाते हैं। बीकानेर जिले में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से यह स्पष्ट है कि सरकारी प्रयासों और संरक्षकों की सहभागिता से ऐसे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित और उज्ज्वल बनाया जा सकता है।


