नीरज जोशी, बीकानेर, (समाचार सेवा)। केंद्रीय कारागार बीकानेर में जेल विभाग, राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय और मलंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में दस दिवसीय ‘थियेटर टू ट्रांसफॉर्मेशन’ कार्यशाला का शुभारंभ संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यशाला का उद्देश्य रंगमंच के माध्यम से बंदियों में आत्मबोध, भावनात्मक अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करना है।
पहले दिन प्रशिक्षक अजहर गौड़ ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कृति ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियों के माध्यम से वीर रस का अभ्यास करवाया। वहीं, प्रशिक्षक आरती उपाध्याय ने ‘नाम क्रीड़ा’, ‘रिफ्लेक्शन’ और ‘मूवमेंट’ जैसी थिएटर तकनीकों से संवाद, एकाग्रता और सामूहिक सहभागिता की गतिविधियां करवाईं। संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने कहा कि कला और रंगमंच आत्मसंवाद तथा सकारात्मक बदलाव का सशक्त माध्यम हैं।
कुलसचिव देवाराम सैनी और कारागार अधीक्षक निरंजन शर्मा ने इसे बंदियों के सुधार एवं पुनर्वास की दिशा में उपयोगी पहल बताया। मलंग फाउंडेशन के दीपक व्यास ने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से बंदियों को अपनी रचनात्मक क्षमताएं पहचानने और भविष्य के प्रति नई उम्मीद विकसित करने का अवसर मिलेगा।
















