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प्रदेश के 12 इंजीनियरिंग कॉलेजों का ‘राजकीय’ गड़बड़झाला

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बीकानेर (श्याम शर्मा)। प्रदेश के 12 इंजीनियरिंग कॉलेजों का ‘राजकीय’ गड़बड़झालाप्रदेश के 12 इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक भी सरकारी नहीं है लेकिन राज्य सरकार की एक चूक से यहां के सभी स्वायतशासी इंजीनियरिंग कॉलेज 7 साल से खुद को राजकीय कॉलेज घोषित कर हजारों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों से निकले छात्रों का प्लेसमेंट आसानी से होता है लेकिन इन 12 कॉलेजों से निकले छात्रों को न तो कोई नौकरी देता है और न ही इनकी डिग्री की कोई कीमत है।

इसलिए अब तक इन कॉलेजों के नाम के साथ लिखे ‘राजकीय’ शब्द पर भरोसा करने वाले सैकड़ों छात्रों का समय, श्रम और भविष्य बर्बाद हो चुका है। यहां से निकले इंजीनियरों की प्लेसमेंट की दर 10 प्रतिशत भी नहीं है।

हैरत की बात तो यह है कि राज्य सरकार के ध्यान में लाने के बावजूद वह अपने इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। कांग्रेस के शासन में रची साजिश – कांग्रेस और भाजपा सरकारों ने बजट की कमी बताकर सभी संभागों में स्ववित्त पोषित इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की अनुमति दी थी।

स्वायत्तशासी कॉलेजों में राजकीय कॉलेजों के मुकाबले फीस ज्यादा होती है लेकिन पढ़ाई की गुणवत्ता उस स्तर की नहीं होती। इसलिए यहां छात्र कम संख्या में आ रहे थे।

इन कॉलेजों की शासी परिषद (बोर्ड ऑफ गवर्नर्स) ने तत्कालीन तकनीकी शिक्षा मंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीय को वर्ष 2011 में इस बात के लिए राजी कर लिया कि यदि सभी कॉलेज अपने नाम के आगे ‘राजकीय’ शब्द लगा लें तो छात्रों की संख्या बढ़ सकती है।

मालवीय की अध्यक्षता में 18 जुलाई 2011 में हुई बैठक में यह प्रस्ताव पारित होते ही सभी कॉलेजों ने अपने नाम के आगे ‘राजकीय’ शब्द जोड़ लिया।

GOVERNMENT ENGINEERING COLLEGE BIKANER

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अपराध है राजकीय शब्द का अवैध उपयोग

इन इंजीनियरिंग कॉलेजों का पंजीयन सोसायटी एक्ट में हुआ है इसलिए इनके नाम में परिवर्तन नहीं किया जा सकता।

विधानसभा में अधिनियम बनाकर राज्यपाल के अनुमोदन के बाद ही इनके नाम के आगे ‘राजकीय’ शब्द जोड़ा जा सकता है।

रजिस्ट्रार सहकारी समितियां के सामने यह मामला आया तो उन्होंने 31 अगस्त 2016 को इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर के प्राचार्य को पत्र लिखकर चेतावनी भी दी कि कॉलेज के आगे अवैध तरीके से ‘राजकीय’ शब्द का उपयोग करना अपराध की श्रेणी में आता है।

इसके लिए आप खुद जिम्मेदार होंगे, लेकिन उन पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

डिग्री में राजकीय शब्द नहीं लिखते

इंजीनियरिंग कॉलेजों ने राजकीय शब्द बोर्ड और अपनी वेबसाइट पर तो जोड़ लिया लेकिन मार्कशीट और डिग्री में वे राजकीय नहीं लिखते।

यहां के छात्रों की डिग्री देखने से पता चलता है कि सभी छात्रों को बीकानेर इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम से डिग्री दी जा रही है। ये छात्र जब कहीं नौकरी के लिए आवेदन करते हैं तो उनकी डिग्री को मान्यता नहीं मिलती जितनी राजकीय कॉलेजों की डिग्री को मिलती है।

इसलिए प्रदेश के अधिकतर इंजीनियरिंग के छात्र बेरोजगार घूम रहे हैं। इस घपले का छात्रों के अभिभावकों को पता चला तो उन्होंने कॉलेज प्रशासन के सामने शिकायत की लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई।

ऐसे ही एक अभिभावक एडवोकेट सुरेश कुमार गोस्वामी ने तो जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, शासन सचिवालय से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंचाई लेकिन सरकार पूरी ताकत से इसे दबाने में लगी है।

इनका कहना है

यह बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का पुराना निर्णय है। चूंकि तकनीकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री इसकी अध्यक्ष हैं इसलिए कॉलेज के आगे राजकीय शब्द लिखते हैं।

अजय गुप्ता

प्राचार्य

इंजीनियरिंग कॉलेज, बीकानेर