SAHITYA GATIVIDHI – Samachar Seva https://samacharseva.in Mission Patrkarita Sat, 21 Sep 2024 02:00:41 +0000 en-GB hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://samacharseva.in/wp-content/uploads/2025/06/cropped-samacharsevalogo-channel-pic-32x32.png SAHITYA GATIVIDHI – Samachar Seva https://samacharseva.in 32 32 होती है बेटी की ही विदाई, किसने ये रीत बनायी? https://samacharseva.in/it-is-the-daughters-farewell/ Sun, 11 Aug 2024 10:44:06 +0000 https://samacharseva.in/?p=22857
होती है बेटी की ही विदाई, किसने ये रीत बनायी?
घर- परिवार, सब बदल जाता है..
अपना था जो कल तक, सब पराया हो जाता है…
बिताया हो जहाँ बचपन,
उस आँगन का कण-कण पीछे छूट जाता है.
रिश्ते-नाते और सखी-सहेली ही नहीं..
एक बेटी का तो जैसे अस्तित्व ही बदल जाता है..
नये लोग, नया वातावरण
ओढ़े नित दिन, नया आवरण
नये घर की नयी रीत…
कैसे छूटे सबसे प्रीत?
तितली जैसी चंचल थी जो,
सब करते,अब स्थिरता की उम्मीद,
ढेरों अपेक्षा है… और अनेक परीक्षा है,
होती है बेटी की ही विदाई, किसने ये रीत बनायी?
माँ बाप से मिलने जाने को भी,
कई घरों में अनुमति लेनी पड़ती है..
त्योहारों पर परिजनों की,
भले कितनी याद सताती है..
नये परिजनों संग वो त्योहार,
तब भी क्या खूब मना लेती है..
अनजान थे जो रिश्ते कभी,
उन संग वो उम्र बिता देती है.
ये बेटियां इतना कैसे निभा लेती है?
होती है बेटी की ही विदाई, किसने ये रीत बनायी?
ख़ुशक़िस्मत है वो आत्मनिर्भर बेटी,
जिनका परिवार से अलग भी वर्चस्व है ,
विवाह बाद, भले बदले घर-बार.. पास -पड़ोस…
कर्मक्षेत्र में तो अपना अलग व्यक्तित्व है,
मान है.. सम्मान है..,
अपने नाम से पहचान है,
वरना, ससुराल में तो प्रारम्भ में,
नया ही नाम है, नयी ही पहचान है !!!
होती है बेटी की ही विदाई,किसने ये रीत बनायी?
-शिप्रा मोहता
]]>
बड़ा कवि  Great poet https://samacharseva.in/great-poet/ Sun, 20 Dec 2020 13:34:03 +0000 https://samacharseva.in/?p=13618 – मईनुदीन कोहरी नाचीज़ बीकानेरी 

बीकानेर, (samacharseva.in)। बड़ा कवि  Great poet, साहित्यकारों की फौज के बड़े कवि के काव्यपाठ को सुनकर कुछ मंझले,कुछ छोटे नो सिखिये तथाकथित कवियों ने वाह वाह तालियों से काव्यपाठ की समझ से ज्यादा बड़े कवि से नजदीकियां बढाने में अति उत्साह को दर्शाया,  ऐसा लग रहा था।  

Great poet

Great poet

जाजम पर बैठे कुछेक  लोग घुसफुस – घुस्फुस करते,कानों ही कानों में कहने लगे, क्या पढ़ा बड़े कवि ने  ? – अपन की समझ से तो ऊपर से निकल गया है।  काव्यपाठ खत्म हुआ, अल्पहार का दौर-अब स्टेज तक एक के बाद एक बधाई देते बड़े कवि का आशीर्वाद पाने  में ही व्यस्त  नजर आ रहे थे  …!!

अल्पहार का आनन्द लेते हुए एक मसखरे ने बड़े कवि से हंसते हुए कह ही दिया,आदरणीय क्षमा करना आपने क्या पढ़ा अपन के तो पल्ले ही नहीं पड़ा! बड़े कवि ने भौंए खींचते,चश्मे के ऊपर से झांकते हुए कहा – आपको जल्दी से समझ आ जावेगा तो फिर हमें बड़ा कवि कौन मानेगा ?

सब स्तब्ध: …….!  बड़े कवि ने झुंझलाते -हमारे शब्दों की बुनघट कुछ ऐसी होती है कि हम इशारों इशारों में अपनी बात कह जाते हैं हर किसी को पल्ले पड़ जाए तो फिर हमें…..। बड़े कवि के ज़मीर यानि अंतरात्मा की आवाज़ से कुछ वहाँ के चहेते साहित्यकारों की तरफ  इशारा करते 

(ईनाम-इकराम की कतार में खड़े चेले चांटियों की तरफ ) हुए – ये वाह वाह , तालियाँ बजाने वाले मेरे काव्य को समझते हैं तभी तो मैं बड़ा कवि हूँ ।

अब तो शायद आप समझ गये, तालियों की गडगड़ाहट  -सभी कुछ बड़े कवि के बारे में——!!!!!!

    व्यंग्य-बाण- मईनुदीन कोहरी नाचीज़ बीकानेरी        

 मोहल्ला कोहरियांन बीकानेर

मो. 9680868028

]]>
प्रभात गोस्वामी का व्यंग्य ‘पहचान कौन’ बना श्रेष्ठ व्यंग्य https://samacharseva.in/prabhat-goswamis-satire-pahachan-koun-became-the-best-satire/ Sat, 12 Dec 2020 15:58:15 +0000 https://samacharseva.in/?p=13484 बीकानेर, (samacharseva.in)। प्रभात गोस्वामी का व्यंग्य ‘पहचान कौन’ बना श्रेष्ठ व्यंग्य, व्यंग्य के क्षेत्र में देश की प्रतिनिधि त्रैमासिक पत्रिका’ व्यंग्य यात्रा’ के संयुक्तांक (जनवरी-जून) में प्रकाशित व्यंग्यकार प्रभात गोस्वामी की व्यंग्य रचना’ पहचान कौन ?’, श्रेष्ठ व्यंग्य रचना चुनी गई है।

रचना का चयन व्यंग्यकार सुनीता शानू ने किया। व्यंग्य यात्रा पत्रिका के हर अंक में प्रकाशित रचनाओं में श्रेष्ठ रचना के चयन पर डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’, द्वारा ग्यारह सौ रूपए का पुरस्कार अर्पित किया जाता है। पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. प्रेम जनमेजय ने बताया कि गोस्वामी का यह व्यंग्य, पत्रिका में प्रकाशित सभी व्यंग्य रचनाओं की गहन समीक्षा के बाद निर्णायक सुनीता शानू द्वारा चयनित किया गया।

पत्रिका के प्रत्येक अंक के लिए देश के सुपरिचित व्यंग्यकारों में से किसी एक व्यंग्यकार को निर्णायक बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि व्यंग्य यात्रा पत्रिका व्यंग्य विधा की श्रीवृद्धि एवं व्यंग्य के उन्नयन की दिशा में पूरी प्रतिबद्धता से समर्पित है।श्रेष्ठ व्यंग्य चयन पर निर्णायक सुनीता शानू ने कहा कि प्रभात गोस्वामी ने अपने व्यंग्य पहचान कौन ? के माध्यम से पहचान खो चुके लोगों पर कटाक्ष किया है।

]]>
कन्हैया लाल सेठिया राजस्थानी भाषा सेवा सम्मान  इस वर्ष राष्ट्र भाषा हिंदी प्रचार समिति श्रीडूँगरगढ़ को https://samacharseva.in/kanhaiya-lal-sethia-rajasthani-bhasha-seva-samman-this-year-to-rashtra-bhasha-hindi-prachar-samiti-sridungargarh/ Sun, 01 Nov 2020 07:50:03 +0000 https://samacharseva.in/?p=13127 बीकानेर, (samacharseva.in)। कन्हैया लाल सेठिया राजस्थानी भाषा सेवा सम्मान  इस वर्ष राष्ट्र भाषा हिंदी प्रचार समिति श्रीडूँगरगढ़ को, मरुदेश संस्थान की ओर से वर्ष 2020 का महाकवि कन्हैयालाल  सेठिया राजस्थानी भाषा सेवा सम्मान राष्ट्र भाषा हिंदी प्रचार समिति श्रीडूंगरगढ़ को दिया जाएगा।

कार्यक्रम संयोजक शिक्षाविद डॉ. हेमंत कृष्ण मिश्र ने बताया कि साहित्य मनीषी सेठियाजी की बारहवीं पुण्य तिथि पर कलक्टर नागौर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी के मुख्य आतिथ्य में 11 नवम्बर को प्रातः 11 बजे सेठ सूरजमल तापड़िया आचार्य संस्कृत महाविद्यालय जसवन्तगढ़ में आयोजित समारोह में यह सम्मान दिया जायेगा।

सम्मान के अंतर्गत मान पत्र, प्रतीक चिन्ह, शॉल, पुष्पहार व साहित्य भेंट किया जायेगा। समारोह में समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार श्याम महर्षि, उपाध्यक्ष डॉ. मदन सैनी ,मंत्री रवि पुरोहित, संयुक्त मंत्री, विजय महर्षि सहित आमंत्रित साहित्यकार व गणमान्यजन भाग लेंगे। आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए संस्था के सचिव कमलनयन तोषनीवाल, किशोर सैन, सुमनेश शर्मा, रतनलाल सैन आदि जुटे है।

संस्थान के अध्यक्ष डॉ. घनश्याम नाथ कच्छावा ने बताया कि यह सम्मान उन संस्थाओं, संगठनों और प्रतिष्ठानों को दिया जाता है जो मातृभाषा राजस्थानी  के प्रचार प्रसार हेतु निष्ठापूर्वक कार्य कर रहे है। उन्‍होंने बताया कि राष्ट्र भाषा हिंदी प्रचार समिति, श्रीडूंगरगढ़ साहित्य, संस्कृति, शोध व कला के क्षेत्र में 60 वर्षों से कार्यरत है।

]]>
सीकर के रमेश जोशी को साहित्यश्री व बीकानेर के शंकरसिंह राजपुरोहित को मिलेगा राजस्थानी सृजन पुरस्कार  https://samacharseva.in/ramesh-joshi-of-sikar-will-receive-sahityashree-and-shankar-singh-rajpurohit-of-bikaner-will-receive-rajasthani-srijan-award/ Tue, 13 Oct 2020 06:05:24 +0000 https://samacharseva.in/?p=12896 बीकानेर, (samacharseva.in)। सीकर के रमेश जोशी को साहित्यश्री व बीकानेर के शंकरसिंह राजपुरोहित को मिलेगा राजस्थानी सृजन पुरस्कार , श्री मलाराम माली स्मृति साहित्यश्री सम्मान और राजस्थानी साहित्य सृजन हेतु  दिए जाने वाले  राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है। इस वर्ष साहित्यश्री सम्मान सीकर के शिक्षाविद,  साहित्यकार,  संपादक  रमेश जोशी को और राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार बीकानेर के लोकप्रिय व्यंग्यकार कवि शंकरसिंह राजपुरोहित को उनकी चर्चित व्यंग्य पुस्तक ‘म्रित्यु रासौ’ के लिए घोषित किया गया है। पुरस्कार श्रीडूंगरगढ में आयोज्य भव्य समारोह में अर्पित किए जायेंगे।  

सम्मान व पुरस्कार स्वरूप 11 हजार रूपये नगद राशि के साथ सम्मान-पत्र, स्मृति-चिह्न, शॉल अर्पित किए जायेंगे। डॉ. नंदलाल महर्षि स्मृति हिन्दी साहित्य सृजन पुरस्कार मनोहरपुर के कैलाश मनहर को पूर्व में ही घोषित किया जा चुका है। ये पुरस्‍कार राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, श्रीडूंगरगढ द्वारा भाषा, साहित्य व संस्कृति के क्षेत्र में सुदीर्घ सेवा के लिए श्री मलाराम माली स्मृति में प्रदान किए जाते हैं।

संस्थाध्यक्ष श्याम महर्षि ने बताया कि 20 वर्ष से अधिक समय तक की सेवा के लिए  प्रतिवर्ष दिया जाने वाला और राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध श्री मलाराम माली स्मृति साहित्यश्री सम्मान और राजस्थानी के मौलिक साहित्य सृजन के लिए प्रतिष्ठित पं. मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

विडंबनाओं के सृजन के लिए चर्चित रमेश जोशी 

अपने सृजनकाल में उदारीकरण के बाद की विडंबनाओं के सृजन के लिए खासे चर्चित रहे  रमेश जोशी का जन्‍म 18 अगस्त 1942  को चिड़ावा में हुआ। केन्द्रिय विद्यालय संगठन से जुड़े रहे जोशी की कर्जे के ठाठ, रामधुन, बेगाने मौसम, कौन सुने इकतारा और पिता शीर्षक से काव्य कृतियां प्रकाशित हैं।

अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति अमेरिका की प्रसिद्ध त्रैमासिकी ‘विश्वा’ के संपादक जोशी कई राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थानों व विश्वविद्यालयों से समादृत हो चुके हैं।  रास्ते में अटकी उपलब्धियां, कुड़क मुर्गियों का लोकतंत्र,  निर्गुण कौन देस को बासी,  देवता होने का दुःख,  झुमका खोने की स्वर्ण जयंती, मूर्तियों से बंधे पशु,  लोकतंत्र का ब्लू व्हेल गेम,

जगदुरु जी टॉयलेट में हैं,  ईश्वर के साथ सेल्फी,  माई लेटर्स टू जार्ज बुश,  लीला का लाइसेंस,  ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया,  इश्क का एन्साइक्लोपीडिया और एक गधे का धर्म परिवर्तन जैसी रचनाओं से चर्चा में रहे जोशी पत्र-पत्रिकाओं के लिए स्तम्भ लेखन लेखन से भी निरंतर जुड़े रहे हैं।

कवि, व्यंग्यकार, संपादक व अनुवादक शंकर सिंह राजपुरोहित   

कवि, व्यंग्यकार, संपादक व अनुवादक के रूप में ख्यात स्वर्ण पदक विजेता शंकर सिंह राजपुरोहित का जन्‍म 12 सितम्बर 1969 को हुआ। राजपुरोहित अपने रचनात्मक शिल्प वैशिष्ट्य के लिए जाने जाते हैं।

व्यंग्य की तीखी धार और हास्य कविताओं से मंचों पर बेहद पसंद किए जाने वाले शंकरसिंह साहित्य अकादमी, दिल्ली के अनुवाद पुरस्कार, राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर के पैली पोथी पुरस्कार व भत्तमाल जोशी महाविद्यालय पुरस्कार, नगर विकास न्यास, राव बीकाजी संस्थान, नेम प्रकाशन, डेह  सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं।

सुण अरजुण, आभै रै उण पार, म्रित्यु रासौ जैसी मौलिक कृतियों के साथ गणनायक, कितने पाकिस्तान, उपरवास कथात्रयी, गांधी’ज आउटस्टैंडिंग लीडरशिप और बाइबल के न्यू टेस्टामेंट के अनुवाद लोकप्रिय रहे हैं।  

]]>
गोइन्का साहित्य पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित https://samacharseva.in/entries-invited-for-goinka-literary-awards/ Thu, 08 Oct 2020 09:53:55 +0000 https://samacharseva.in/?p=12858 बैंगलूरू/चूरू, (samacharseva.in) गोइन्का साहित्य पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित, साहित्य एवं सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में संलग्न कमला गोइन्का फाउण्डेशन अपने साहित्यिक पुरस्कारों की शृंखला में हिंदी एवं राजस्थानी के मुख्य पुरस्कारों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। साहित्‍यकार 15 नवंबर 2020 तक अपनी प्रविष्टि फाउण्डेशन के बैंगलूरू कार्यालय में भिजवा सकते हैं। चूरू निवासी एवं बैंगलूरू प्रवासी तथा कमला गोइन्का फाउण्डेशन के प्रबंध न्यासी श्यामसुन्दर गोइन्का ने बताया कि सम्पूर्ण भारत के राजस्थानी व हिंदी साहित्यकारों इन पुरस्कारों के लिए अपनी प्रविष्टियां भेज सकते हैं।

फाउण्डेशन की ओर से राजस्थानी भाषा में मातुश्री कमला गोइन्का राजस्थानी पुरस्कार, रमादेवी गोइन्का महिला राजस्थानी साहित्य पुरस्कार तथा हिंदी भाषा में स्नेहलता गोइन्का व्यंग्यभूषण पुरस्कार, यशस्वी सत्यनारायण गोइन्का हिन्दी साहित्य पुरस्कार, रत्नीदेवी गोइन्का वाग्देवी पुरस्कार के लिए साहित्यकार अपनी प्रविष्टि फाउण्डेशन के बैंगलूरू कार्यालय में भिजवा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि कमला गोइन्का फाउण्डेशन द्वारा प्रवर्तित 1 लाख 11 हजार 111 रुपये का “मातुश्री कमला गोइन्का राजस्थानी पुरस्कार” राजस्थान के साहित्यकारों द्वारा लिखित सर्वश्रेष्ठ प्रकाशित मूल राजस्थानी पुस्तक के लिए प्रदान किया जाता है

वहीं 1 लाख 11 हजार 111 रुपये का “स्नेहलता गोइन्का व्यंग्यभूषण पुरस्कार” सम्पूर्ण भारत के व्यंग्यकार साहित्यकारों द्वारा लिखित सर्वश्रेष्ठ व्यंग्य विधा में प्रकाशित पुस्तक के लिए प्रदान किया जाता है। 1 लाख 11 हजार 111 रुपये का “यशस्वी सत्यनारायण गोइन्का हिन्दी साहित्य पुरस्कार” सम्पूर्ण भारत के हिन्दी साहित्यकारों द्वारा लिखित सर्वश्रेष्ठ हिन्दी के किसी भी विधा में प्रकाशित पुस्तक के लिए दिया जाता है। 51 हजार रुपये का “रत्नीदेवी गोइन्का वाग्देवी पुरस्कार” सम्पूर्ण भारत के महिला साहित्यकारों द्वारा लिखित सर्वश्रेष्ठ हिन्दी के किसी भी विधा में प्रकाशित पुस्तक के लिए तथा 51 हजार रुपये का “रमादेवी गोइन्का महिला राजस्थानी साहित्य पुरस्कार” सम्पूर्ण राजस्थान के महिला साहित्यकारों द्वारा लिखित सर्वश्रेष्ठ राजस्थानी के किसी भी विधा में प्रकाशित पुस्तक के लिए प्रदान किया जाता है।

पुरस्कारों के लिए अपनी प्रविष्टि भेज सकते हैं

गोइन्का ने बताया कि जो भी हिन्दी व राजस्थानी साहित्यकार फाउण्डेशन द्वारा सम्मानित किये जा चुके हैं, वे इस वर्ष से इन पुरस्कारों के लिए अपनी प्रविष्टि भेज सकते हैं। फाउण्डेशन के कार्यकारी सचिव कमलेश यादव ने बताया कि द्विवर्षीय कालावधि में वर्ष 1999 से प्रदान किए जाते आ रहे हैं यह पुरस्कार गत पांच वर्षों में लिखित व प्रकाशित हिन्दी तथा राजस्थानी भाषा की पुस्तकों व साहित्यकारों के साहित्य के प्रति किये गये समग्र-योगदान के आधार पर दिया जाता है।

इन पुरस्कारों के लिए वर्ष 2016-2020 के बीच की अवधि में प्रकाशित पुस्तक की तीन-तीन प्रतियां प्रविष्टि के संग साहित्यकारों का साहित्य के प्रति अन्य योगदान की भी विस्तृत जानकारी के साथ प्रस्ताव-पत्र एवं पासपोर्ट आकार की दो फोटो फाउण्डेशन के बैंगलूरू कार्यालय में 15 नवंबर 2020 तक भेजी जा सकती हैं।

यादव ने बताया कि प्रविष्टि-पत्र, नियमावली एवं अधिक जानकारी के लिए फाउण्डेशन के बैंगलूरू कार्यालयनंबर 6, केएचबी इंडस्ट्रियल एरिया, दूसरा क्रॉस, यलहंका न्यू टाऊन, बैंगलोर-560064, मो. 9900020161 ई-डाक : kgf@gogoindia.com या visit us at : www.kgfmumbai.com या साधारण पत्र द्वारा संपर्क किया जा सकता है।

]]>
‘ईश्वर, हाँ, नहीं, तो..’, के लेखक सुधीर सक्सेना को चार्वाक सम्मान’ https://samacharseva.in/charvak-award-to-sudhir-saxena-author-of-eeshvar-haan-nahin-to/ Wed, 26 Aug 2020 05:11:01 +0000 https://samacharseva.in/?p=12262 कोटो में 20 दिसम्बर को होगा सम्‍मान समारोह  

बीकानेर, (samacharseva.in)। ‘ईश्वर, हाँ, नहीं, तो..’, के लेखक सुधीर सक्सेना को चार्वाक सम्मान’, लैम्प (लिटरेचर एंड म्यूज़िक प्रमोटर्ज़)  की ओर से बुधवार को प्रथम ‘चार्वाक सम्मान’ की घोषणा कर दी गई है।

संस्‍थान की विज्ञप्ति के अनुसार प्रथम ‘चार्वाक सम्मान’ कवि और संपादक सुधीर सक्सेना को अर्पित किया जाएगा। डॉ. वीरेंद्र सिंह गोधारा ने बताया कि कवि सक्‍सेना को यह सम्मान उनके काव्य-संग्रह  ‘ईश्वर, हाँ, नहीं, तो..’, के लिए अर्पित किया जा रहा है।

लैम्प तथा चार्वाक सम्मान ज्यूरी  रघुराज सिंह (भोपाल), अमृता बेरा दिल्ली, डॉ. नीरज दइया बीकानेर, असंगघोष जबलपुर, महेन्द्र नेह कोटा और  डॉ. वीरेंद्र सिंह गोधारा कोटा ने यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया। पुरस्कार समारोह के संयोजक बीकानेर के कवि-आलोचक डॉ. नीरज दइया ने बताया कि कवि और ‘दुनिया इन दिनों’ के संपादक सुधीर सक्सेना को ‘चार्वाक सम्मान’ रविवार 20 दिसम्बर 2020 को भव्य समारोह में कोटा में अर्पित किया जाएगा।

उन्हें सम्मान स्वरूप संस्था द्वारा 11 हजार रुपये, साफा, शॉल, श्रीफल और मान-पत्र प्रदान किया जाएगासुधीर सक्सेना कवि के रूप में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से कविता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।  सक्सेना का जन्म 30 सितम्बर 1955 को लखनऊ में हुआ।

]]>
‘साहित्‍य बीकानेर’ पुस्‍तक रूप में लायेगा सोशल मीडिया पर प्रकाशित रचनायें https://samacharseva.in/sahityai-bikaner-will-be-brought-compositions-published-on-social-media-in-the-a-book/ Mon, 17 Aug 2020 06:22:03 +0000 https://samacharseva.in/?p=11903 बीकानेर, (samacharseva.in)।‘साहित्‍य बीकानेर’ पुस्‍तक रूप में लायेगा सोशल मीडिया पर प्रकाशित रचनायें,  “साहित्य बीकानेर” का ऑनलाइन पेज “नई आवाज” बीकानेर संभाग के 35 वर्ष तक के युवा रचनाकारों की प्रतिनिधि रचनाओं का संकलन है। इसके तहत फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और ब्लॉग सभी सोशल मीडिया एकाउंट्स पर रोजाना किसी एक रचनाकार की रचना पोस्ट की जाती है।

पेज के संपादक सोनू लोहमरोड ने बताया कि 09 अप्रेल 2020 से शुरू हुई इस योजना के अंतर्गत अब तक 131 युवा साहित्यकारों को मंच दिया जा चुका है। जल्द ही ये संख्या 151 तक पहुंच जाएगी। उसके बाद इसको एक किताब के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। लोहमरोड ने बताया कि इसमें शामिल होने वाले रचनाकार से किसी भी तरह का कोई शुल्क नहीं लिया जाता।

जब किताब के रूप में ये संग्रह आएगा तब भी कोई शुल्क नहीं लिया जायेगा। जानकारी के अनुसार पेज के संपादक सुनील कुमार लोहमरोड़ ‘सोनू’ , पूनमचंद गोदारा और देवीलाल महिया हैं। रचनाओं का चयन चयन समिति के सदस्यों दवारा किया जाता है। इस समिति के सदस्‍यों के नाम गोपनीय हैं।

]]>
डॉ. मेघना शर्मा की ‘एक नई महाभारत’ https://samacharseva.in/dr-meghna-sharmas-a-new-mahabharata/ Sun, 16 Aug 2020 17:18:29 +0000 https://samacharseva.in/?p=11891 बीकानेर, (samacharseva.in)।   डॉ. मेघना शर्मा की ‘एक नई महाभारत’, डॉ मेघना शर्मा वर्तमान में महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग की सहायक प्रोफेसर होने के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में भी अपनी नाम रखती हैं। आज आप अपनी कविता ‘एक नई महाभारत’ के माध्यम से देश की समस्याओं के बारे में महाभारत के चरित्रों को जोड़ते हुए बात कर रही हैं और बताना चाहती हैं कि किस प्रकार महाभारत युग की परेशानियां आज भी जीवंत हैं।

किस प्रकार आज भी वह सभी चरित्र हमें अपने आसपास पसरे हुए दिखाई देते हैं किंतु फर्क सिर्फ इतना है कि आज भीम सा दमखम दिखाने वाले लोग कम रह गए हैं। हम बुरे चरित्रों को पहचान नहीं पा रहे क्योंकि वो पहले आपके मित्र बनकर विश्वासघात भी करने लगे हैं। आज के युवा हमारे युधिष्ठिर ठीक उसी युग की तरह मजबूर ज्यादा दिखाई देते हैं।आज दुर्योधन और दु:शासन जैसे लोग अपने आपको ज़्यादा मज़बूत कर बुराई और अत्याचार का वर्चस्व फैलाने में सफल हो रहे हैं।

किंतु कुछ अच्छे लोग, कुछ साहसी लोग यदि आगे बढ़े तो इन समस्याओं से हमारा देश पार पा सकता है। स्वतंत्रता दिवस मनाने का अधिकार हम तभी पा सकते हैं जब हम देश की असल समस्याओं तक पहुंचे, उनकी मूल भावना तक पहुंचे और हाशिए पर पड़े हुए मुद्दों को उठाकर अपने बाहुबल के आधार पर कुछ नवाचार करें। सबसे अहम बात यह है कि देश के हालात सुधारने की पहल करें तभी सच्चे मायनों में हम श्रद्धांजलि दे पाएंगे उन बलिदानियों को जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर हमें यह आजा़द हवा सांस लेने के लिए दी।

इस कविता के माध्यम से यही विचार संप्रेषित करने का प्रयास किया गया है कि जवानों आगे बढ़ो और देश की समस्याओं को समझने का प्रयास करो, सच्चे मायनों में केवल झंडा फहराने से स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाया जाता। स्वतंत्रता चाहिए सामुदायिक व्याधियों से, स्वतंत्रता चाहिए भ्रष्टाचारियों से, स्वतंत्रता चाहिए बेरोजगारी से, स्वतंत्रता चाहिए अराजकता से, स्वतंत्रता चाहिए सांप्रदायिकता से, स्वतंत्रता चाहिए गरीबी से, स्वतंत्रता चाहिए प्रवसन की मजबूरियों से।

जब तक हम यह सब हासिल करने के प्रयास नहीं करते तब तक इन महा उत्सवों को सच्चे मायनों में मनाने के अधिकारी नहीं कहला सकते।

]]>
प्रेमचंद की कलम स्त्री विमर्श की श्रेष्ठ वाहक : डॉ. मेघना शर्मा https://samacharseva.in/premchand-ki-kalam-stree-vimarsh-kee-shreshth-vahak-dr-meghna-sharma/ Sat, 01 Aug 2020 05:25:42 +0000 https://samacharseva.in/?p=11058 प्रेमचंदजयंती पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्य गोष्ठी में डॉ मेघना ने किया राजस्थान का प्रतिनिधित्व

बीकानेर, (samacharseva.in) प्रेमचंद की कलम स्त्री विमर्श की श्रेष्ठ वाहक : डॉ. मेघना शर्मा, मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर शुक्रवार को आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्य वेबिनार में बीकानेर की कवयित्री कथाकार डॉ. मेघना शर्मा ने राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया। वेबिनार का विषय प्रेमचंद साहित्य की सशक्त नारी और वर्तमान परिदृश्य रहा।

महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर के इतिहास विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. मेघना शर्मा ने अपने उद्बोधन में प्रेमचंद युग को आधुनिक भारतीय इतिहास के सक्रांति काल की संज्ञा देते हुए उनकी कलम को नारी मुक्ति व नारी जागरण का संप्रेषक बताया।

premchand ki kalam stree vimarsh kee shreshth vahak dr. meghna sharma

धर्म सुधार आंदोलनों के युग में उपन्यास सम्राट प्रेमचंद की कलम उत्तर 19वीं सदी व 20वीं सदी के पूर्वार्द्ध की सड़ी गली मान्यताओं, अंधविश्वासों, खोखली परंपराओं और सामाजिक जड़ता के खिलाफ चली तो वहीं दूसरी तरफ नारी की प्रगति व आर्थिक स्वतंत्रता के पक्ष में पुरजो़र प्रतिनिधित्व करती हुई प्रतीत हुई।

डॉ. मेघना ने कहा कि प्रेमचंदजी के उपन्यासों की नारी चरित्र भारतीय संस्कृति की पताका फहराती, सेवा, उदारता, पवित्रता, भक्ति, सहिष्णुता, त्यागमयी भावना, उच्चतम आदर्शों की वाहक थी। उनकी नारी प्रगतिशील विचारों वाली शिक्षित नारी थी।

डॉ मेघना ने प्रेमचंद के उपन्यास सेवासदन, निर्मला, प्रतिज्ञा, गबन, गोदान आदि के महिला चरित्रों की मन: स्थिति व अंतर्निहित संवादों के माध्यम से अपनी बात की पुष्टि की।

dms

साहित्यकार ममता कालिया की अध्यक्षता में आयोजित वेबिनार में डॉ मेघना के अलावा लंदन से ज्योतिर्मय ठाकुर, मॉरीशस से कल्पना लालजी, डॉ शिक्षा गुजाधुर, पटना, बिहार से डॉ नीरज कृष्ण और जमशेदपुर से डॉ मुदिता चंद्रा व डॉ. जूही समर्पिता वक्ता के रूप में शामिल हुए।

संयोजनकर्ता जमशेदपुर, झारखंड से प्रकाशित होने वाली गृहस्वामिनी राष्ट्रीय पत्रिका की प्रधान संपादक अर्पणा संत सिंह रहीं जिन्होंने सभी अतिथियों और वक्ताओं का आभार व्यक्त किया।

]]>