Sahasrabuddhe – Samachar Seva https://samacharseva.in Mission Patrkarita Fri, 22 Nov 2019 08:51:00 +0000 en-GB hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://samacharseva.in/wp-content/uploads/2025/06/cropped-samacharsevalogo-channel-pic-32x32.png Sahasrabuddhe – Samachar Seva https://samacharseva.in 32 32 विश्व बंधुत्व के सेतु थे डॉ. टैस्सीटोरी – रंगा https://samacharseva.in/dr-tassitori-was-the-bridge-of-world-brotherhood-ranga/ Fri, 22 Nov 2019 08:23:58 +0000 https://samacharseva.in/?p=7190 बीकानेर, (समाचार सेवा) राजस्थानी युवा लेखक संघ के प्रदेश अध्‍यक्ष व वरिष्ठ कवि-कथाकार कमल रंगा ने कहा कि महान् इटालियन विद्वान, राजस्थानी पुरोधा, डॉ. लुईजि पिऔ टैस्सीटोरी विश्व बंधुत्व के सेतु थे। रंगा शुक्रवार को डॉ. टैस्सीटोरी की 100वीं पुण्यतिथि पर राजस्थानी युवा लेखक संघ एवं प्रज्ञालय संस्थान द्वारा डॉ. टैस्सीटोरी समाधि स्थल पर आयोजित होने वाले समारोह के प्रथम दिन ‘पुष्पांजलि’ और ‘विचारांजलि’ कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि डॉ. टैस्‍सी टौरी ने सभी सीमाओं को लांघकर राजस्थानी भाषा, साहित्य, संस्कृति और पुरातत्त्व के लिए समर्पित भाव से काम किया। वे बहुभाषाविद् एवं भाषा वैज्ञानिक थे साथ ही उन्होंने कुशल सम्पादन करते हुए राजस्थानी के महत्त्वपूर्ण ग्रन्थों को प्रकाश में लाने का कार्य किया। ऐसी महान् विभूति को नमन करना अपनी विरासत को याद करना है। उनके कार्यों को जन-जन तक पहुंचाना एक सृजनात्मक दायित्व निर्वहन करना है। इससे पूर्व सभी साहित्यकारों एवं अन्य कला से जुड़े गणमान्यों आदि ने डॉ. टैस्सीटोरी के समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

कार्यक्रम का दूसरे भाग में डॉ. टैस्सीटोरी के व्यक्तित्त्व और कृतित्त्व पर ‘विचारांजलि’ का वरिष्ठ रचनाकार नरपतसिंह सांखला की अध्यक्षता में हुआ। जिसमें वरिष्ठ शायर जाकिर अदीब ने राजस्थानी मान्यता के सवाल को उठाते हुए डॉ. टैस्सीटोरी को याद किया। वहीं वरिष्ठ कथाकार मोहन थानवी ने डॉ. टैस्सीटोरी के नाम से एक सांस्कृतिक और साहित्यिक भवन की मांग रखी। इतिहासविद् डॉ. फारूक चौहान ने कहा कि डॉ. टैस्सीटोरी गंभीर पुरातत्त्वविद् थे। डॉ. प्रकाशचन्द्र वर्मा ने डॉ. टैस्सीटोरी समाधि-स्थल की समुचित व्यवस्थाओं की मांग उठाई।

कवियत्री डॉ. मनीषा आर्य सोनी ने कहा कि राजस्थानी की मान्यता मिलना ही डॉ. टैस्सीटोरी को सच्‍ची श्रद्धांजलि होगी। संस्कृतिकर्मी शिवशंकर भादाणी ने कहा कि डॉ. टैस्सीटोरी महामानव थे और राजस्थानी संस्कृति के गहरे उपासक थे। वरिष्ठ कवियत्री मधुरिमा सिंह ने उन्हें नमन करते हुए कहा कि राजस्थानी मान्यता आंदोलन को ऐसे आयोजनों से गति मिलेगी और साथ ही हमें संस्था के साथ जुड़कर राजस्थानी भाषा आंदोलन में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। शायर कासिम बीकानेरी ने कहा कि डॉ. टैस्सीटोरी सगो अर्थों में राजस्थानी के गंभीर अध्येता थे।

रंगकर्मी मीनू गौड़ ने उनकी सेवाओं को रेखांकित करते हुए उन्हें बहुआयामी बताया। वहीं श्रीमती कृष्णा वर्मा ने उन्हें समर्थ आलोचक बताया। डॉ. तुलसीराम मोदी ने उन्हें अ छा व्याकरणविद् कहा तो कवि गिरिराज पारीक ने उन्हें भारतीय आत्मा बताते हुए उन्हें नमन् किया। कवि मईनुद्दीन कोहरी ने उनके कार्यों का स्मरण किया। इस अवसर पर शायर माजिद खां गौरी, संस्कृतिकर्मी मुनीन्द्र अग्निहोत्री, घनश्याम सिंह, बी.डी. भादाणी ने डॉ. टैस्सीटोरी के कार्यों को याद करते हुए उन्हें नमन् किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ रचनाकार नरपतसिंह सांखला ने डॉ. टैस्सीटोरी की महत्त्वपूर्ण पुरातत्त्व सेवाओं के साथ-साथ उनके समर्पित राजस्थानी कार्य को स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया। इस अवसर पर कवि व्यास योगेश राजस्थानी, संजय, जगदीश, विवेक व्यास, हनिरारायण आचार्य, अशोक शर्मा, भवानीसिंह, कार्तिक मोदी, सिराजुद्दीन भुट्टा आदि सहित सभी राजस्थानी समर्थकों ने डॉ. टैस्सीटोरी के कार्यों को नमन करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

संचालन शायर कासिम बीकानेरी ने किया जबकि सभी का आभार व्यंग्यकार आत्माराम भाटी ने ज्ञापित किया।

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इंदिराजी ने धर्म निरपेक्षता और कौमी एकता को मजबूत बनाने में दिया अविस्मरणीय योगदान – डॉ. कल्ला https://samacharseva.in/indira-ji-made-unforgettable-contribution-in-strengthening-secularism-and-communal-unity-dr-kalla/ Wed, 20 Nov 2019 09:08:10 +0000 https://samacharseva.in/?p=7149 जयपुर, (समाचार सेवा)। इंदिराजी ने धर्म निरपेक्षता और कौमी एकता को मजबूत बनाने में दिया अविस्मरणीय योगदान – डॉ. कल्‍ला, कला, साहित्य और संस्कृति मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने देश के नवनिर्माण में स्व. इंदिरा गांधी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इंदिरा जी एक ऐसी महान शख्सियत थी, जिन्होंने धर्मनिरपेक्षता और कौमी एकता को मजबूत बनाने के साथ देश में हरित क्रांति और धवल क्रांति के लिए अविस्मरणीण कार्य किया।

डॉ. कल्‍ला मंगलवार रात जयपुर के रवीन्द्र मंच पर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी की 102वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरे के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि इंदिरा जी देश में विकास के नए आयाम स्थापित करते हुए विश्व में भारत की धाक जमाई, वे तीसरी दुनियां की सशक्त नेता थी। उन्होंने बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर बैंकों के द्वार रिक्शेवाले और खोमचेवाले जैसे निचले तबके के लोगों और आम आदमी के लिए खोल दिए।

डॉ. कल्ला ने मुशायरे में आए शायर, गीतकार, कवियत्री और कवियों का इस्तकबाल करते हुए कहा कला-संगीत और साहित्य व्यक्ति के व्यक्तित्व को परिपूर्ण बनाते हैं, इनके बिना मानव जीवन अधूरा है। उन्होंने गीतकार गोपालदास ‘नीरज‘ की स्मृतियों को नमन करते हुए कहा कि साहित्य की दुनियां में उनके अतुलनीय योगदान को सदैव अविस्मरणीय रहेगा। इससे पहले कला, साहित्य एवं संस्कृति डॉ. बी.डी. कल्ला, सूचना एवं जनसम्पर्क मंत्री डॉ. रघु शर्मा और मुख्य सचिव ने रवीन्द्र मंच पर लगाई गई राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन वृत से संबंधित छायाचित्रों की प्रदर्शनी का गहनता से अवलोकन किया।

कवि सम्मेलन, मुशायरे का आयोजन

राज्य के कला, साहित्य और पुरातत्व विभाग की ओर से अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन कवि और गीतकार गोपाल दास ‘नीरज‘ की स्मृति में किया गया। मुशायरे का शुभारम्भ प्रदेश के कला, साहित्य और संस्कृति मंत्री डा. बी. डी. कल्ला, सूचना एवं जनसम्पर्क मंत्री डा. रघु शर्मा एवं मुख्य सचिव डी. बी. गुप्ता ने ज्योति प्रज्वलित कर किया। मंगलवार देर रात तक चले इस मुशायरे में देश और प्रदेश के नामचीन कवि, कवयित्री और शायरों ने अपनी रचनाओं से प्रेम, भाईचारे, देशप्रेम और कौमी एकता का संदेश देते हुए समां बांधा।

मुशायरे में खचाखच भरे रवीन्द्र मंच के सभागार में डॉ. कुमार विश्वास, प्रो. वसीम बरेलवी, हसन कमाल, डॉ. कुंवर बैचेन, शीन काफ निजाम, डॉ. विष्णु सक्सेना. संतोष आनंद, रामेन्द्र त्रिपाठी, प्रभा ठाकुर, मलका नसीम, शकील आजमी, डॉ. कीर्ति काले, डॉ. ताहिर फराज, डॉ. अंजना सिंह सैंगर, डॉ. अशोक अंजुम, मंजीत सिंह, अम्बर आबिद, मुमताज नसीम, अबरार कासिफ और अखिलेश तिवाड़ी जैसे ख्यातनाम कवि, कवियत्री और शायरों ने अपनी कविता, शायरी, गजल और नज्मों से जयपुर शहर कि फिजा में साहित्य के रंग भरते हुए उपस्थित लोगों की भरपूर दाद हासिल की।

कार्यक्रम में मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला एवं डॉ. रघु शर्मा, मुख्य सचिव डी. बी. गुप्ता, कला एवं संस्कृति विभाग की प्रमुख सचिव श्रेया गुहा, विवेक बंसल और राजीव अरोड़ा ने सभी कवि, कवियत्री और एवं शायरों का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। कार्यक्रम में कार्मिक विभाग की प्रमुख सचिव रोली सिंह, सम्भागीय आयुक्त के. सी. वर्मा, विवेक बंसल मौजूद रहे।

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जयपुर फुट लगाकर शान से जी रहे हैं 30 देशों के दिव्‍यांग https://samacharseva.in/jaipur-foot-laakar-shan-se-jee-rahe-hai-30-eshon-ke-diyang/ Thu, 17 May 2018 04:14:11 +0000 https://samacharseva.in/?p=1262 बीकानेर, (समाचार सेवा) जयपुर फुट लगाकर शान से जी रहे हैं 30 देशों के दिव्‍यांग। विश्‍व के 30 देशों के दिव्‍यांग गुलाबी शहर जयपुर में निर्मित कृत्रिम अंग ‘जयपुर फुट’ लगाकर आज सम्‍मान से और शान से जीवन जी रहे हैं। जयपुर फुट पर एक विशेष प्रदर्शनी इन दिनों न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र संघ के स्थानीय मुख्यालय भवन की गैलरी में चल रही है।

प्रदर्शनी का आयोजन  संयुक्त राष्ट्र संघ के सान्निध्य में भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि मिशन और ‘जयपुर फुट, अमेरिका’ द्वारा किया गया है। प्रदर्शनी  को अब तक हज़ारों अमेरिकी और अन्य देशों के पर्यटकों ने उत्सुकता से देखा है। प्रदर्शनी में जयपुर कृत्रिम अंग की उपयोगिता और उसके  लाभ की पचास वर्षों की कहानी प्रदर्शित की गयी है।

संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन बताते हैं, ‘जयपुर  फुट’ भारत का पहला ऐसा उत्पाद है जिसके प्रदर्शन की स्वीकृति संयुक्त राष्ट्र संघ ने केवल इस कारण दी है क्यों कि मानव सेवा के क्षेत्र में ‘जयपुर फुट’ की अद्भुत भूमिका है।

न्‍यूयार्क में ‘विक्लांगता’ पर हुई संगोष्ठी में संयुक्त राष्ट्र में अनेक देशों के प्रतिनिधियों के बीच ‘जयपुर फुट’ की उत्पादक संस्था भगवन महावीर विकलांग सहायता समिति के संस्थापक और मुख्य संरक्षक डी आर मेहता ने बताया कि कि भारतीय विदेश मंत्रालय के सहयोग से प्रति वर्ष विदेशों में विशेष शिविरों के आयोजन से 5 हज़ार दिव्यांगों के पैर लगाए जाएंगे।

इसकी शुरुआत अगले माह वियतनाम में शिविर लगा कर की जायेगी। इसके बाद इराक, म्यानमार, नेपाल और बांग्ला देश में शिविरों का आयोजन होगा। जयपुर फुट-यू एस ए द्वारा आयोजित इस समारोह की मेज़बानी संस्था के उपाध्यक्ष मनीष ढड्डा ने की। राज्य सभा सांसद नारायण पांचोरिया ने संसद कोश से 25 लाख रूपए का अनुदान  ‘जयपुर फुट’ को देने की घोषणा की।

युवा अशिता ढड्डा ने अमेरिका में जयपुर फुट की सहयता के लये किये गए प्रयासों का विवरण दिया। संगोष्‍ठी के दौरान अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में रह रहे व्यवसायी राजीव डागा और नीता डागा ने ‘जयपुर फुट’ के लिए एक करोड़ 35 लाख रुपए के सहयोग की घोषणा की। डागा परिवार प्रति वर्ष ‘जयपुर फुट’ को आर्थिक सहयोग देता रहा है।

संगोष्ठी में राज्य सभा सदस्य डॉ विनय सहस्रबुद्धे, राज्य सभा में भारतीय जनता पार्टी की मुख्य सचेतक नारायण लाल पंचारिया तथा जम्मू-कश्मीर के मंत्री एस ए कोहली सहित न्यू यॉर्क में रहने वाले भारतीय भी उपस्थित थे।

संगोष्‍ठी में नाइजीरिया के नागरिक जॉन माटेस ने, जिन्हें जयपुर फुट के कारण चलना-फिरना संभव हुआ है, विदेशी प्रतिनिधियों के बीच चल कर प्रदर्शन किया। उन्‍होंने बताया कि उनका ‘जयपुर पैर’ विदेशों में बनने वाले 15 लाख रूपए की कीमत वाले कृत्रिम पैर से कहीं ज्यादा उपयोगी है।

उल्लेखनीय है कि ‘जयपुर फुट’ ब्रांड के पैर की कीमत भारत में सिर्फ 30 डॉलर है। जयपुर में ज़रूरतमंद दिव्यांगों को यह निःशुल्क लगाया जाता है।  ‘जयपुर फुट, यू एस ए’ के अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्हीं के प्रयासों से ‘जयपुर फुट’ के पचास वर्ष की गौरव गाथा को आज विश्व भर में प्रसिद्धि मिल रही है।

जयपुर फुट के बाद अब जयपुर हैंड बनाने की तैयारी

‘जयपुर फुट’ की उत्पादक संस्था भगवन महावीर विकलांग सहायता समिति के संस्थापक और मुख्य संरक्षक डी आर मेहता ने घोषणा की कि ‘जयपुर फुट’ के बाद अब कृत्रिम हाथ ‘जयपुर हैंड’ का निर्माण किया जाएगा।

मेहता ने यह घोषणा इन दिनो न्‍यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र संघ के स्थानीय मुख्यालय भवन की गैलरी में चल जयपुर फुट की एक प्रदर्शनी के दौरान की है।

उन्‍होंने बताया कि अमेरिकी विश्वविद्यालयों में जयपुर हैंड पर शोध हो रहा है और उच्च गुणवत्ता वाले इस कृत्रिम हाथ से मानव सेवा शीघ्र शुरू होगी।

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