nrcc bikaner – Samachar Seva https://samacharseva.in Mission Patrkarita Tue, 10 Jan 2023 13:50:32 +0000 en-GB hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://samacharseva.in/wp-content/uploads/2025/06/cropped-samacharsevalogo-channel-pic-32x32.png nrcc bikaner – Samachar Seva https://samacharseva.in 32 32 अब देशभर में उपलब्‍ध हो सकेगा ऊँटनी का दूध https://samacharseva.in/now-camel-milk-will-be-available-across-the-country/ Tue, 10 Jan 2023 13:50:32 +0000 https://samacharseva.in/?p=20657 राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्धान केन्द्र बीकानेर व पर्ल लेक्टो कम्‍पनी के बीच हुआ एमओयू

NEERAJ JOSHI (समाचार सेवा) बीकानेर। अब देशभर में उपलब्‍ध हो सकेगा ऊँटनी का दूध, राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्धान केन्द्र (एनआरसीसी) बीकानेर द्वारा ऊँटनी के दूध पाउडर की नूतन प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण से अब देश भर में ऊँटनी के दूध की उपलब्धता सुलभ हो सकेगी।

इस संबंध में मंगलवार को एनआरसीसी तथा पर्ल लेक्टों कंपनी के मध्य एमओयू साइन किया गया। एनआरसीसी के निदेशक डॉ. आर्तबन्‍धु साहू एवं पर्ल लेक्टो कंपनी के संस्थापक अमन ढिल द्वारा हस्ताक्षर किए गए।

Now camel milk will be available across the country..

Now camel milk will be available across the country..

अब केन्द्र द्वारा विकसित तकनीकी से पर्ल लेक्टो कंपनी कैमल मिल्क पाउडर का उत्पादन कर सकेगी। अब एनआरसीसी द्वारा पर्ल लेक्टो कंपनी के साथ तकनीकी हस्तांतरण को लेकर किए गए इस एमओयू से ऊँटनी के दूध का पाउडर व इससे निर्मित उत्पाद जरूरतमंद उपभोक्ताओं को सुलभ हो सकेंगे।

पर्ल लेक्टो डेयरी के संस्थापक अमन ढिल ने बताया कि कम्पनी मुख्य तौर पर गाय के दूध का व्यापार कार्य कर रही है, कंपनी  की मंशा है कि औषधीय गुणवत्ता युक्‍त ‘कैमल मिल्क’ को बाजार में लाया जाना चाहिए ताकि दूध के व्यवसाय के साथ-साथ जरूरतमंद एवं आमजन को इसका लाभ मिल सके।

डॉ. आर्तबन्धु साहू ने कहा कि केन्द्र के वैज्ञानिकों ने नवीन तकनीकों का उपयोग करके गुणवत्तायुक्त उत्पाद बनाने की विधि विकसित की है। इससे ऊँटनी के दूध में मौजूद औषधीय गुण भी बरकरार रहते हैं। डॉ.साहू ने कहा कि ऊँटनी का दूध मधुमेह, क्षय रोग, ऑटिज्म आदि के प्रबंधन में कारगर है।

एमओयू को ऊँट पालकों के लिए विशेष महत्व वाला बताते हुए डॉ.साहू ने कहा कि ऊँट पालकों को इसका सीधा लाभ मिल सकेगा। कार्यक्रम में प्रधान वैज्ञानिक डॉ.आर.के.सावल, डॉ.योगेश कुमार, डॉ.योगेश, डॉ.राकेश रंजन, डॉ.वेद प्रकाश, प्रशासनिक वर्ग से अखिल ठुकराल तथा पर्ल लेक्टो कम्पनी के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

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रेगिस्तान का जहाज़ ऊंट और राईका https://samacharseva.in/%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a5%9b-%e0%a4%8a%e0%a4%82%e0%a4%9f-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b0/ Thu, 03 Jan 2019 11:50:10 +0000 https://samacharseva.in/?p=4996 डॉ ज़िया उल हसन क़ादरी

बीकानेर, (समाचार सेवा)। ऊंट एक मज़बूत लेकिन उज्जड जानवर है। ये बोझा ढोने और बिना कुछ खाये पिए लम्बा सफर करने में माहिर है।

ये किसी ज़माने में रेगिस्तानी ज़िन्दगी की जान होता था और बहुत हद तक अब भी है। लेकिन कभी कभी ये खतरनाक भी हो जाता है।

खासकर सर्दियों में जब इसको मादा की ज़रूरत महसूस होती है। तब इस पर एक जूनून सवार हो जाता है। मुंह से झाग निकलते हैं और खाना पीना तक छोड़ देता है।

इसको “झूठ” में आना कहते हैं। ऐसी हालत में ये कई बार अपने मालिक ही की जाना ले लेता है। राजस्थान में “राईका” एक ऐसी जाती है जो ऊंटों को इंसान के लायक बनाती है।

उनको ट्रेंड करती है।

ऊंट राईका के एक इशारे पर कण्ट्रोल होते हैं। एक राईका बीसों ऊंटों को कण्ट्रोल कर लेता है। राईका लोग ऊंटनी का दूध पीते हैं जिस की वजह से ये तन्दुरुस्त और मज़बूत रहते हैं। बहुत सी बीमारियां इनसे दूर रहती हैं। खासकर शूगर।

राईका को उमूमन शूगर नहीं होता। बीकानेर के गाड़वाला गांव में लगाये गए मेडिकल केम्प में राईका जाती के किसी भी मर्दो औरत में शूगर नहीं पाया गया।

आजकल तो केन्सर में भी ऊंट के खून से बनी दवा कारगर साबित हो रही है। इसके अलावा बीकानेर के केमल इंस्टिट्यूट में ऊंटनी के दूध से बनी कुल्फी और आइसक्रीम और कॉफी भी बेचीं जा रही है। यहाँ पर सुबह शाम ऊंटनी का दूध भी फरोख्त (विक्रय) किया जाता है।

एक ज़माना था जब राईका लोगों के पास 100 ऊंटों तक का टोला (झुण्ड) रहता था लेकिन अब चारागाह की कमी और मांग में गिरावट के चलते इनके लिए ये घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

इसलिए इनके पास कम ही ऊंट बचे हैं। सरकार ने जब से ऊंट को “राज्य पशु” बनाया है तब से राजस्थान के बाहर के लोग ऊंट खरीद नहीं सकते है।

जिससे ऊंटों की मांग और कीमत में भारी गिरावट आई है। फिलहाल ऊंटों के मास्टर तो अब भी राईका ही हैं।

साभार- डॉ ज़िया उल हसन क़ादरी की फेसबुक वाल से

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बटर स्कॉच, वनीला, पाईनएप्पल और केसर फ्लेवर में खाइये ऊँटनी के दूध से बनी आइसक्रीम https://samacharseva.in/kulfi-made-from-camel-milk-now-eat-in-butter-scotch-vanilla-pineapple-and-saffron-flavors/ Wed, 31 Oct 2018 13:33:43 +0000 https://samacharseva.in/?p=4327 बीकानेर 31 अक्टूबर। बटर स्कॉच, वनीला, पाईनएप्पल और केसर फ्लेवर में खाइये ऊँटनी के दूध से बनी आइसक्रीम, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् -राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र, बीकानेर ने ऊँटनी के दूध से विकसित उत्पादों की श्रंखला में एक और इजाफा करते हुए हाल ही में लॉन्च कैमल मिल्क आइसक्रीम की बिक्री प्रारम्भ कर दी है।

यह उष्‍ट्र अनुसंधान केन्द्र स्थित मिल्क पार्लर में 20 रुपये से प्रारम्भ होकर विभिन्न आकर्षक पैकिंग में ‘करभ आइसक्रीम‘ के नाम से उपलब्ध है।

आकर्षक पैकिंग में करभ आइसक्रमके नाम से उपलब्ध

यह उत्पाद बटर स्कॉच, वनीला, पाईनएप्पल और केसर सहित अलग अलग में फ्लेवर में बिक्री हेतु उपलब्ध रहेगा। एनआरसीसी में आइसक्रीम की यह सुविधा समारोह आदि आयोजन हेतु भी पूर्व बुकिंग/सूचना के आधार पर उपलब्ध रहेगी।

कैमल मिल्क आइसक्रीम की बिक्री के शुभारम्भ पर केन्द्र निदेशक डॉ.एन.वी.पाटिल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केन्द्र पिछले डेढ़ दशक से ऊँटनी को एक दुधारू पशु के रूप में स्थापित करने की कवायद में लगा रहा।

इसकी क्रियान्विति हेतु केन्द्र ने न केवल अनुसंधान द्वारा इसकी दूध की औषधीय गुणवत्ता को सिद्ध किया बल्कि कैमल डेरी एवं मिल्क पार्लर की स्थापना कर ऊँट पालकों को इस व्यवसाय हेतु प्रेरित किया है।

केन्द्र ने ऊँटनी के दूध के विभिन्न दुग्ध उत्पाद विकसित कर इनकी आमजन में स्वीकार्यता को सिद्ध किया, इसी कड़ी में इस दूध के मूल्य संवर्धन को ध्यान में रखते हुए इसके दूध से करभ नामक आइसक्रीम का उत्पादन प्रारम्भ किया गया है।

अन्य दूध उत्पादों सहित इसके मार्फत ऊँट पालकों की आय में आशातीत वृद्धि की जा सकती है।

निदेशक डॉ.पाटिल ने इस तकनीकी के प्रसार के बारे में कहा कि केन्द्र में निर्मित ऊँटनी के दुग्ध उत्पादों के निर्माण की पद्धति को जानने-सीखने हेतु किसान व उद्यमी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं ताकि वे अपने स्तर पर व्यवसाय को शुरू कर सके।

डॉ.देवेन्द्र कुमार, प्रभारी उष्ट्र दुग्ध प्रसंस्करण इकाई ने जानकारी दी कि केन्द्र के इस उत्पाद में ऊँटनी के दूध में क्रीम, शुगर, फूड ग्रेड कलर व सुगन्ध का इस्तेमाल किया गया है।

डॉ.देवेन्द्र ने कहा कि हाल में आइसक्रीम प्लान्ट लगाया गया है जिसमें मिल्क होमोजेनाईजर, बैच आइसक्रीम फ्रीजर और आइसक्रीम हार्डनिंग कैबिनेट शामिल है।

आशा है कि सैलानियों एवं आमजन में इस उत्पाद के रसास्वादन का अधिक क्रेज रहेगा।

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एनआरसीई में स्‍कूली बच्‍चों ने लिया घुडसवारी का आनंद https://samacharseva.in/nrce-me-schooli-bachon-ne-liya-ghudsavari-ka-anand/ Tue, 22 May 2018 19:41:19 +0000 https://samacharseva.in/?p=1385 बीकानेर, (समाचार सेवा)। स्‍कूली बच्‍चों ने लिया घुडसवारी का आनंद अश्व अनुसन्धान केन्द्र बीकानेर में इन दिनों समर केम्प चल रहे हैं। यहां स्‍कूली बच्चों की बहार आ रही है। पिछले दो दिनों में सेंट विनस एवं अन्य विद्यालयों के बच्चों की धूम रही।

केन्द्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. एस. सी. मेहता ने बताया की विभिन्न विद्यालयों द्वारा इन दिनों बच्चों को समर केम्प में वह कला सिखाने का प्रयास किया जा रहा है जिनको वह शिक्षा सत्र के दौरान नहीं सिखा सकते हैं।

बीकानेर में हमने हाल ही में इस केन्द्र पर इको-टूरिजम  प्रारम्भ किया एवं हम इन समर केम्प के बच्चों को घुड़ सवारी, तांगा सवारी, बग्गी, फोटोग्राफी के साथ साथ झूलों एवं प्राकृतिक हरियाली का आनंद लेने की सुविधा प्रदान कर रहे हैं।

आजके समय में बच्चों पर पढाई को लेकर शिक्षा सत्र के दौरान बहुत तनाव होता है एवं हम उनके बचपन के वो रंग निखारने में मदद कर रहे हैं जो इस  आपा –धापी में कहीं खो जाते हैं।

बीएसएनएल की सेवायें गडबडाई

बीकानेर (समाचार सेवा)शहर में बीएसएनएल फोन, मोबाईल फोन तथा इंटरनेट कनेक्‍शन कब अचानक ठप हो जाएंगे ये कोई कह नहीं सकता।

अनेक लोग बीएएसएनएल की व्‍यवस्‍थायें ठप होने पर विभाग को फोन लगाते हैं तो वहां फोन उठाने वाला कोई नही होता है। यदि कस्‍टमर बीएसएनएल कार्यालय पहुंच जाए तो भी उनकी समस्‍या सुनने वाला कोई नहीं होता है। कोई मिलता है तो वो यही जवाब देता है कि समस्‍या चंडीगढ से है।

वहां से जैसे ही ठीक होगी बीएसएनएल की व्‍यवस्‍थायें सुचारू हो जाएंगी। परेशान लोग दूसरी टेलीफोन कंपनियों की ओर मुड जाते हैं।

 गडबडाई शहर की सफाई व्‍यवस्‍था

बीकानेर (समाचार सेवा)बीकानेर में सफाई व्‍यवस्‍था गडबडाई हुई हे। अनेक लोगों व संगठनों ने नगर

निगम को ज्ञापन भेजकर सफाई व्‍यवस्‍था सुचारू करने की मांग की मगर व्‍यवस्‍था सुचारू नहीं हो सकी। कहीं विवाह स्‍थलों के बाहर गंदगी को हटाने की व्‍यवस्‍था नहीं है तो कहीं नालों को सफाई करने की सुचारू व्‍यवस्‍था को लेकर बार बार आग्रह करने के बावजूद नाले गंदगी से अटे पडे हैं।

सडकों के गडढे तो और भी हालात खराब करने वाले हैं। आवारा पशुओं व सडक के गडढों ने राहगीरों को कई बार चोटिल किया है। जिला प्रशासन किसी भी प्रकार की जिम्‍मेदारी नहीं लेता है।

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