hindi sahitya – Samachar Seva https://samacharseva.in Mission Patrkarita Sat, 20 Jun 2020 06:05:16 +0000 en-GB hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://samacharseva.in/wp-content/uploads/2025/06/cropped-samacharsevalogo-channel-pic-32x32.png hindi sahitya – Samachar Seva https://samacharseva.in 32 32 मज़दूर के आंसू https://samacharseva.in/labor-tears/ Fri, 01 May 2020 04:26:55 +0000 https://samacharseva.in/?p=8956 निष्प्राण, निस्पृह, निस्पंदित

मजदूर की आंखो की पुतलियों में

शून्य होता आसमान

स्वयं को निगलती धरती,

अनंत में विलीन होती ओस

सूखे अश्रुओं के मरासिम

दे जाते हैं अनाज,

घर परिवारों को

स्पंदन के साज़

उम्र गुजार कर

टाट पट्टी की गरीब

टपकती झोपड़ियों में,

उम्मीद की बालियां और

फसल की आत्मा होती हैं रूबरू

क्योंकि

खाली नहीं जाते कभी

मज़दूर के आंसू!होती हैं उनमें तैरती

ख्वाबों की मछलियां

तोले नहीं जाते कभी

मज़दूर के आंसू!

-डॉ. मेघना शर्मा

कवयित्री कथाकार

बीकानेर, राजस्थान

 

 

 

राजस्थान प्री वेटरनरी टेस्ट में ऑनलाइन आवेदन की तिथि 30 जून तक बढ़ाई
बीकानेर, (samacharseva.in)वेटरनरी विश्वविद्यालय द्वारा स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए आयोजित राजस्थान प्री वेटरनरी टेस्ट 2020 की ऑनलाइन आवदेन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 जून कर दिया गया है। आर.पी.वी.टी. समन्वयक प्रो. हेमन्त दाधीच ने बताया कि विलम्ब शुल्क सहित ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि अब 6 जुलाई 2020 कर दी गई हैं। आर.पी.वी.टी. में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी को राजस्थान का मूल निवासी और आयु 31 दिसम्बर, 2020 तक न्यूनतम 17 वर्ष होनी चाहिए। आवेदक को सीनियर हायर सैकेण्डरी (जीव विज्ञान/बायोटेक्नालॉजी) से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। जो अभ्यर्थी इस वर्ष सीनियर सैकेण्डरी परीक्षा में शामिल हुए है एवं उनका परीक्षा परिणाम शेष है, वे भी इस टेस्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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कवयित्री अभिलाषा पारीक ‘अभि’ की काव्य कृति ‘सरद पुन्यूं को चांद’ लोकार्पित https://samacharseva.in/book-sarda-punyun-ko-chand-of-kavitri-abhilasha-pareek-abhi-released/ Sun, 22 Dec 2019 08:25:33 +0000 https://samacharseva.in/?p=7664 जयपुर, (समाचार सेवा)।कवयित्री अभिलाषा पारीक ‘अभि’ की  सद्य प्रकाशित राजस्थानी काव्य कृति ‘सरद पुन्यूं को चांद’ का लोकार्पण शनिवार को जयपुर की कलानेरी आर्ट गैलरी में हुआ। समारोह में कवयित्री अभिलाषा ने अपनी लेखन की प्रेरणा से रचना प्रक्रिया तक की यात्रा साझा की।

लोकार्पित कृति पर आलोचनात्मक पत्र सरोज बीठू ने प्रस्तुत किया। समारोह में साहित्यकार रवि पुरोहित ने कहा कि कवयित्री अभिलाषा पारीक ‘अभि’ की कविताएं और गीत राजस्थानी सांस्कृतिक मूल्यों का अनुरक्षण और सामाजिक संचेतना का उपक्रम है। पुरोहित ने कहा कि आज जब राजस्थानी की एक बड़ी शब्दावली आधुनिक मूल्यों, सुख-सुविधाओं और परिवेश के कारण विलोपित हो रही है, ऐसे में घर-परिवार, तीज-त्यौंहार, मेले-मगरिये, सम्बन्ध-संवेदना, खेल और ऋतुओं को अभि ने पूरी शिद्दत से जीया और रचा है, जो उनकी सामाजिक प्रतिबद्धताओं के प्रति आश्वस्त करता है।

साहित्यकार नंद भारद्वाज ने कहा कि घर-परिवार और समाज के जीवन मूल्यों को जीते तो सभी हैं, पर कवि उसे एक पृथक दृष्टि से देखता है। यह अलग अलहदा नजर ही कवि की रचना का फलक तैयार करती है और इस नवरस के माध्यम से लोक जुड़ाव का मार्ग पशस्त करती है। चिंतक प्रमोद शर्मा ने कहा कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद यदि राजस्थानी में सृजन हो रहा है तो यह उसकी आंतरिक शक्ति है। क्षेत्रीय भाषाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बाजार चाहे कितना ही पसराव कर ले,  इन्हें कोई खतरा नहीं है।

पत्रकार प्रवीण नाहटा ने पत्रकारिता और साहित्य के अन्तर्सम्बन्धों को व्याख्यायित किया। अनुराग सोनी के संयोजन में हुए इस समारोह में अनेक शिक्षाविद, संपादक, चिकित्साविद्, साहित्यकार और पत्रकार सहभागी रहे।

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विश्व बंधुत्व के सेतु थे डॉ. टैस्सीटोरी – रंगा https://samacharseva.in/dr-tassitori-was-the-bridge-of-world-brotherhood-ranga/ Fri, 22 Nov 2019 08:23:58 +0000 https://samacharseva.in/?p=7190 बीकानेर, (समाचार सेवा) राजस्थानी युवा लेखक संघ के प्रदेश अध्‍यक्ष व वरिष्ठ कवि-कथाकार कमल रंगा ने कहा कि महान् इटालियन विद्वान, राजस्थानी पुरोधा, डॉ. लुईजि पिऔ टैस्सीटोरी विश्व बंधुत्व के सेतु थे। रंगा शुक्रवार को डॉ. टैस्सीटोरी की 100वीं पुण्यतिथि पर राजस्थानी युवा लेखक संघ एवं प्रज्ञालय संस्थान द्वारा डॉ. टैस्सीटोरी समाधि स्थल पर आयोजित होने वाले समारोह के प्रथम दिन ‘पुष्पांजलि’ और ‘विचारांजलि’ कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि डॉ. टैस्‍सी टौरी ने सभी सीमाओं को लांघकर राजस्थानी भाषा, साहित्य, संस्कृति और पुरातत्त्व के लिए समर्पित भाव से काम किया। वे बहुभाषाविद् एवं भाषा वैज्ञानिक थे साथ ही उन्होंने कुशल सम्पादन करते हुए राजस्थानी के महत्त्वपूर्ण ग्रन्थों को प्रकाश में लाने का कार्य किया। ऐसी महान् विभूति को नमन करना अपनी विरासत को याद करना है। उनके कार्यों को जन-जन तक पहुंचाना एक सृजनात्मक दायित्व निर्वहन करना है। इससे पूर्व सभी साहित्यकारों एवं अन्य कला से जुड़े गणमान्यों आदि ने डॉ. टैस्सीटोरी के समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

कार्यक्रम का दूसरे भाग में डॉ. टैस्सीटोरी के व्यक्तित्त्व और कृतित्त्व पर ‘विचारांजलि’ का वरिष्ठ रचनाकार नरपतसिंह सांखला की अध्यक्षता में हुआ। जिसमें वरिष्ठ शायर जाकिर अदीब ने राजस्थानी मान्यता के सवाल को उठाते हुए डॉ. टैस्सीटोरी को याद किया। वहीं वरिष्ठ कथाकार मोहन थानवी ने डॉ. टैस्सीटोरी के नाम से एक सांस्कृतिक और साहित्यिक भवन की मांग रखी। इतिहासविद् डॉ. फारूक चौहान ने कहा कि डॉ. टैस्सीटोरी गंभीर पुरातत्त्वविद् थे। डॉ. प्रकाशचन्द्र वर्मा ने डॉ. टैस्सीटोरी समाधि-स्थल की समुचित व्यवस्थाओं की मांग उठाई।

कवियत्री डॉ. मनीषा आर्य सोनी ने कहा कि राजस्थानी की मान्यता मिलना ही डॉ. टैस्सीटोरी को सच्‍ची श्रद्धांजलि होगी। संस्कृतिकर्मी शिवशंकर भादाणी ने कहा कि डॉ. टैस्सीटोरी महामानव थे और राजस्थानी संस्कृति के गहरे उपासक थे। वरिष्ठ कवियत्री मधुरिमा सिंह ने उन्हें नमन करते हुए कहा कि राजस्थानी मान्यता आंदोलन को ऐसे आयोजनों से गति मिलेगी और साथ ही हमें संस्था के साथ जुड़कर राजस्थानी भाषा आंदोलन में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। शायर कासिम बीकानेरी ने कहा कि डॉ. टैस्सीटोरी सगो अर्थों में राजस्थानी के गंभीर अध्येता थे।

रंगकर्मी मीनू गौड़ ने उनकी सेवाओं को रेखांकित करते हुए उन्हें बहुआयामी बताया। वहीं श्रीमती कृष्णा वर्मा ने उन्हें समर्थ आलोचक बताया। डॉ. तुलसीराम मोदी ने उन्हें अ छा व्याकरणविद् कहा तो कवि गिरिराज पारीक ने उन्हें भारतीय आत्मा बताते हुए उन्हें नमन् किया। कवि मईनुद्दीन कोहरी ने उनके कार्यों का स्मरण किया। इस अवसर पर शायर माजिद खां गौरी, संस्कृतिकर्मी मुनीन्द्र अग्निहोत्री, घनश्याम सिंह, बी.डी. भादाणी ने डॉ. टैस्सीटोरी के कार्यों को याद करते हुए उन्हें नमन् किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ रचनाकार नरपतसिंह सांखला ने डॉ. टैस्सीटोरी की महत्त्वपूर्ण पुरातत्त्व सेवाओं के साथ-साथ उनके समर्पित राजस्थानी कार्य को स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया। इस अवसर पर कवि व्यास योगेश राजस्थानी, संजय, जगदीश, विवेक व्यास, हनिरारायण आचार्य, अशोक शर्मा, भवानीसिंह, कार्तिक मोदी, सिराजुद्दीन भुट्टा आदि सहित सभी राजस्थानी समर्थकों ने डॉ. टैस्सीटोरी के कार्यों को नमन करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

संचालन शायर कासिम बीकानेरी ने किया जबकि सभी का आभार व्यंग्यकार आत्माराम भाटी ने ज्ञापित किया।

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अब लेखक की कलम से अंगारे निकले ताकि संस्कृति को नष्ट होने से बचाया जा सके – सोमगिरिजी https://samacharseva.in/ab-lekhak-ke-kalam-se-nikale-angare/ Sat, 19 May 2018 20:47:41 +0000 https://samacharseva.in/?p=1317 बीकानेर, (समाचार सेवा)। शिवबाडी स्थित लालेश्‍वर महादेव मंदिर से जुडे संत स्‍वामी संवित सोमगिरिजी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में लेखक की कलम से अंगारे निकले तभी संस्कृति को नष्ट होने से बचाया जा सकेगा। सोमगिरी महाराज शनिवार को बीकानेर के पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के सभागार में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के दो दिवसीय प्रादेशिक अधिवेशन व साहित्यकार समारोह के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राष्ट्र विचार रखने वाले  साहित्यकारों को मां भारती का सच्चा पुत्र बताया तथा अपना आशीर्वाद दिया।

उद्घघाटन सत्र में स्वामी सवित सोमगिरि जी महाराज ने आशीर्वचन कहते हुए बताया कि हमारे यहां  5 हजार वर्ष पूर्व सरस्वती नदी बहती थी। यहाँ के रेत के दौरे सागर रूपी वेला को लिये हुये हैं।  उन्‍होंने कहा कि सारा जगत महाकाव्य हैं। साहित्य समाज को संस्कृत करता है।  सांसारिक तनाव से मुक्ति के लिए वह समाज में सद्विचारों की स्थापना के लिए साहित्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि समाज में सत्साहित्य के माध्यम से मानवीय गुणों का विकास किया जा सकता है।साहित्य समाज का दर्पण हैं से आशय समाज को दिशा देने से है। स्वामी जी ने कहा कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद सभी उत्सवो  का आयोजन करती हैं एवम सभी महापुरषो की जयंती को  पर्व रूप में मनाती हैं।

ऐसा लगातार  करते हुए   साहित्य की अलख जगाए  हुए है तथा साहित्यकार वह हैं  कि जो किसी भी तथ्य के गहराई अर्थात मूल में चलता चला जाता हैं तथा अपनी लेखनी से मां शारदा को प्रकट करता है। लेखक साहित्य की गहराई को जानकर पटल पर रखता हैं। समाज विभाजन रुपी साहित्य को स्वीकार नही किया जा सकता हैं।

हमारे समक्ष बहुत चुनोतियाँ हैं। साहित्यकारों को जोड़ने के लिए साहित्य रूपी दर्शन की आवश्यकता होती हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीधर पराड़कर ने कहा कि शब्द के सामर्थ्य की पहचान करके साहित्यकार समाज को सही दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य परिषद समाज में सद्विचारों की स्थापना के लिए प्रयत्न करता है।

साहित्य के माध्यम से समाज के उज्जवल पक्ष को प्रकाशित करना परिषद का प्रमुख धैय है। राष्ट्रीय चित्रों के माध्यम से देश के गौरवपूर्ण अतीत का स्मरण और वर्तमान की समस्याओं के समुचित समाधान तथा स्वर्णिम भविष्य के निर्माण के लिए साहित्य परिषद देशभर में निरंतर साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से समाज को जगाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज के साहित्य में फलश्रुति गायब है।

यही वजह है कि विभक्ति का ज्ञान रखने वाला वक्त नहीं बन पाता साहित्य कारों को अपने समाज की समृद्ध परंपराओं बुनियादी मूल्यों और अतीत का ज्ञान होना चाहिए ताकि देश काल परिस्थिति के अनुरूप यथोचित साहित्य का सृजन किया जा सके। राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉक्टर इंदुशेखर तत्पुरुष ने नई पीढ़ी के युवाओं से साहित्य की समृद्धि से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण भर नहीं है बल्कि यह समाज को श्रेष्ट बनाने की साधना का दूसरा नाम है।

डॉ इंदुशेखर तत्पुरुष  ने कहा कि जितना आप पढेगे उसके बाद लिखेगे तो गहराई ज्यादा होती हैं। साहित्य चरित्र गढ़ता हैं। राम के चरित्र कितने धीर, कितने गम्भीर, कितने चिंतनशील को साहित्य बताता हैं और हम पढ़ते हुए रोने लगेगे ।यह साहित्य का सामर्थ्य हैं।

दूसरे सत्र साहित्य का सामर्थ्य व हमारा अधिवेशन में मंच संचालन मोनिका गोड़ ने किया। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर अन्नाराम शर्मा ने  परिषद का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए अब तक हुए विभिन्न कार्यक्रमों में गतिविधियों पर प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि साहित्य परिषद प्रदेश भर में साहित्य की अलख जगाने के लिए समर्पित भाव से प्रयासरत हैं।

उन्होंने कहा कि साहित्य परिषद प्रदेश भर में साहित्य की अलख जगाने के लिए समर्पित भाव से प्रयासरत हैं। उन्होंने आगंतुक अतिथियों का परिचय देते हुए परिषद की ओर से उनका स्वागत भी किया। उद्घाटन समारोह में भारतीय जनता पार्टी के शहर जिला अध्यक्ष डॉक्टर सत्य प्रकाश आचार्य, महापौर नारायण चोपड़ा ने भी शिरकत की।

दो दिवसीय प्रादेशिक अधिवेशन व साहित्यकार समारोह में प्रथम सत्र में साहित्य का सामर्थ्य और हमारा अधिष्ठान विषय पर चर्चा की गई।  दूसरे सत्र में साहित्य का सामर्थ्य राष्ट्रबोध पर मुख्य वक्ता डॉक्टर मोहनलाल गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय विचार का बौद्ध साहित्य को सही दिशा प्रदान करता है। कार्यक्रम में ओम प्रकाश भार्गव ने बीज वक्तव्य दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर सुरेंद्र सोनी ने की वही मंच पर डॉक्टर विमला सिंघल ने सानिध्य प्रदान किया। इस सत्र का संचालन डॉक्टर ममता जोशी ने किया। तीसरे सत्र में वर्तमान सामाजिक सांस्कृतिक चुनौतियां और युवा लेखन पर बीज वक्तव्य देते हुए प्रदुमन कुमार वर्मा ने आज के समय की चुनौतियों के मद्देनजर युवा लेखन की विविध आयामों पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता डॉक्टर गोविंद शरण शर्मा ने समकालीन युवा लेखन के परिदृश्य पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि आज का युवा अपने परिवेश के प्रति पूर्णतया सजग और सतर्क है।

कार्यक्रम में श्रीमती आशा शर्मा ने अपने विचार रखे। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ शैलेंद्र स्वामी ने की और मंच संचालन का दायित्व डॉक्टर अखिलेश ने निर्वाहन किया। आज की संगोष्ठी से मुख्यरूप से बात निकल कर आयी कि किशोर व युवा साहित्यकार नवोदित रचनाकार कियात्मक व अनुकरणात्मक लेखन नही करता  वह सद साहित्य नही है।

लेखन से पूर्व लिखने का उद्देश्य व सांस्कृतिक मूल्यों व निष्ठा की पहचान होना आवश्यक हैं अपनी जमीन पर खड़े होकर स्वाध्याय करने व बाद में लिखा गया लेखन ही सार्थक बनेगा। इससे पूर्व प्रादेशिक महाधिवेशन एवम सहित्यकार सम्मेलन में शनिवार को अधिवेशन की  विधिवत शुरूआत सरस्वती पूजन दीप प्रज्ज्वलन  सरस्वती वंदना के साथ की गई।

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