bikaner ke kahanikar – Samachar Seva https://samacharseva.in Mission Patrkarita Sun, 15 Jul 2018 19:15:55 +0000 en-GB hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://samacharseva.in/wp-content/uploads/2025/06/cropped-samacharsevalogo-channel-pic-32x32.png bikaner ke kahanikar – Samachar Seva https://samacharseva.in 32 32 संगीत सभा सागर से निकली भजनों की सरिता https://samacharseva.in/sangeet-sabhasagar-se-nikali-bhajano-ki-sarita/ Sun, 15 Jul 2018 19:15:55 +0000 https://samacharseva.in/?p=2769 बीकानेर संगीत सभा सागर bikaner ke से निकली भजनों की सरिता। विरासत संवर्धन संगीत सभा परिसर में गंगाशहर में चयनित प्रशिक्षु कलाकारों ने रविवार 15 जुलाई को अपनी गायन कला का प्रदर्शन किया।

मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन व वन्दना से शुरू की गई इस संगीत सभा में अंशु शर्मा ने राजस्थानी भजन हो जी थांनै अरज करै राधा प्यारी प्रस्तुत किया।

तबले पर गुलाम हुसैन-ताहिर हुसैन तथा पर हारमोनियम पर पुखराज शर्मा की संगत के साथ सभा में प्रशिक्षु सोमेश जावा ने भजन-राम का गुण-गान करिए गाया।

मानसी तिवारी ने ताल दादरा में चौमासा, आस्था पारीक ने मीरा का भजन सांसों की माला, गोपाल चांवरिया ने शास्त्रीय संगीत, सुनीता स्वामी ने उप शास्त्रीय ताल दादरा, कशिश ने गजल, किरण सैन ने लोक गीत जल्लो म्हारै जोड रौ गीत गाया।

सभा में मोनिका पारीक ने भजन, ओमप्रकाश चांवरिया ने लोकगीत बंजारा, मुकेश चांवरिया ने राग कहरवा में एक गजल शहर दर शहर लिए फिरता हूं तन्हाई को, नूतन सुराणा, सरिता स्वामी, हेमंत शर्मा, सरोजकुमारी और मनोज चारण ने संगीत की प्रस्तुतियां देकर प्रशिक्षु कलाकारों का हूनर संगीत प्रेमियों के समक्ष रखा।

इससे पूर्व शुभारंभ समारोह में मुख्य अतिथि संगीत भारती के निदेशक डॉ. मुरारी शर्मा ने कहा कि संगीत की कई विद्याएं लुप्त होने के कगार पर हैं, विद्यार्थी इन विद्याओं की तरफ भी ध्यान देवें और इन्हें अपनाएं तो ये कलाएं वापस जिन्दा हो सकती है।

डॉ. शर्मा ने ढोल, तबला व नगाड़ा वादन की लुप्त होती शैलियों की तरफ ध्यान आकर्षित करते हुए संगीत सभा की सार्थकता को उचित बताया और कहा कि वे खुद अभी संगीत के विद्यार्थी हैं।

विशिष्ट अतिथि कवि-कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने  कहा कि प्रस्तुति देते समय वे कलाकार को अपनी आंखें खुली रखें व चेहरे के हाव-भाव में सौम्यता, मुस्कराहट रखनी चाहिये।

मोहन मारु ने प्रशिक्षुओं के मनोबल की तारीफ की। तबला वादक गुलाम हुसैन ने कहा कि कलाकार की विनम्रता ही उसे आगे बढ़ा सकती है।

कार्यक्रम संयोजक पुखराज शर्मा ने प्रशिक्षु कलाकारों को गजल गाकर प्रस्तुतिकरण का ढंग बताया। संचालन संगीत प्रशिक्षु नूतन सुराणा ने किया।

संस्था अध्यक्ष डालचन्द सेवग ने आभार जताया।

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मैं यातायात पुलिस की वर्दी बोल रही हूं.. सफेद झकाझक झक्कास https://samacharseva.in/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6/ Sun, 03 Jun 2018 13:53:20 +0000 https://samacharseva.in/?p=1842 बीकानेर । स्वास्थ्य एवं साहित्य संगम कवि चौपाल की 154 वीं कड़ी रविवार को वृद्धजन भ्रमण पथ परिसर में आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जब्बार बीकाणवी ने की।  मुख्य अतिथि श्रीमती मधुरिमा सिंह रहीं।

मुख्‍य अतिथि मधुरिया सिंह ने मैं यातायात पुलिस की वर्दी बोल रही हूं… सफेद झकाझक झकास रचना भी पेश की। केलाश ने क्या क्या करके दिखलाउ, जब्बार बीकाणवी ने ईश्वर से प्रेम करे… कु. लक्ष्मी भाटी ने रविवार की महत्ता का कविता में ढाला।

कार्यक्रम में फजल मोहम्मद ने इस संसार में प्रेम का कोई महत्व नही रहा.. रचना पेश की। नरेश खत्री ने जिन्दगी का सफर न जाने कैसे कट गया, पता न चला, श्रीमती कृष्णा वर्मा ने कैसे फिसल गया, लक्ष्मी का अवतार कहो या सरस्वती, राजकुमार ग्रोवर ने फांसी के तख्ते पर वीर भगतसिंह बोला… मां मेरा रंग दे बसन्ती चोला रचना पेश की।

पुखराज सोलंकी ने रोशनी की तलाश में भटक रहा बचपन, बिन आखर के ज्ञान में लटक रहा है बचपन, अजीतराज ने तुम क्यों देना चाहते हो मुझे, जुगलकिशोर पुरोहित ने शब्द ही आधार है काव्य का, कवि चौपाल बेमिसाल है विद्वानों की है महासभा रचना पेश की।

डॉ. तुलसीराम ने मैं हंसता हूं जीवन भर…, किशननाथ खरपतवार ने कितनी प्यारी है मां, नेमचंद गेहलोत ने मुझे ऐसा पति देना भोला भण्डारी… जिसे पति सेवा की हो बिमारी, हनुमंत गोड़ ने तेरे आने की आहट से मेरी दुनिया बदलती है रचना सुनाई।

बाबूलाल छंगाणी ने म्हने क्यों नहीं मिल लुंठों सम्मान कई म्हारे तरकश में कोनी तीर कमान, कसिम बीकानेर ने नहीं है राहते मुझ को… इसी को दोस्तो दुनियां में.., प्रकाशचन्द वर्मा ने इसी को कहते है क्या प्यार, कृष्णा वर्मा ने तू प्यार का सागर है गीत पेश किया।

रामेश्वर द्वारकादास बाड़मेरा साधक ने जब घर के देवी देव है तृप्त उन्हें मंदिर जाने की क्या जरूरत  कविता वृद्धजनों के आदर स्रेह अनुशान पर केन्द्रित थी।

विशिष्ठ अतिथि नेमचंद गहलोत, डॉ प्रकाशचन्द वर्मा थे। हाजी मोहम्मद, कादर खान, लक्ष्मी भाटी, वेदान्त, राजेन्द्र शर्मा, मैना देवी, नेमीचंद पंवार, अकतर खां, मोहनलाल, रजबुदिन, नरेश सिधीं उपस्थित थे।  श्रीगोपाल स्वर्णकार ने धन्यवाद दिया संचालन कैलाशचन्द्र टाक ने किया।

समारोह में गत माह 23 मई को साहित्यकार लेखक कवि डॉ.बस्तीमल सोलंकी भीम (राजसंमद) का देहान्त हो जाने पर कवि चोपाल के साहित्य कवियों ने दुख: प्रकट किया एवं दो मिनट का मोन रखा।

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