PANCHNAMA – Samachar Seva https://samacharseva.in Mission Patrkarita Fri, 20 Sep 2024 17:16:42 +0000 en-GB hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://samacharseva.in/wp-content/uploads/2025/06/cropped-samacharsevalogo-channel-pic-32x32.png PANCHNAMA – Samachar Seva https://samacharseva.in 32 32 पंचनामा : उषा जोशी, सोमवार 26 अक्‍टूबर 2020 https://samacharseva.in/panchnama-usha-joshi-monday-26-october-2020/ Mon, 26 Oct 2020 02:25:44 +0000 https://samacharseva.in/?p=13090 * टाइगर या पेपर टाइगर

पंचनामा : उषा जोशी, सोमवार 26 अक्‍टूबर 2020, जय जंगलधर बादशाह के इलाके में बीकानेर में वर्तमान में राज कर रहे खाकी के लॉयन व टाइगर पेपर टाइगर ही साबित हो रहे हैं। छोटी काशी के रूप में अपनी पहचान रखने वाला यह शहर वेब सीरिज की षा में कहे तो मिर्जापुर बन चुका है।

आये दिन गोलियों की ठांय-ठाय, हत्या, धमकी, शराब व हथियारों की स्मगलिंग व चैन स्रैचिंग जैसी बढ़ती घटनाओं ने लोगों का चैन छीन लिया है। शान से पाटों पर बैठने वाले व धाप कर कचौड़ी पकौड़ी खा कर तय समय पर मरने वाले यहां के लोगों को गुंडों बदमाशों ने असमय ही मौत के दरवाजे पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।

कोरोना महामारी के कारण मरने वालों का गम लोग भूला ही नहीं पाये की गुडों की गोली का शिकार हो रहे किशोर व युवाओं की मौत के गम ने लोगों को आक्रोषित कर दिया है। यही कारण रहा कि पिछले दिन शहर सड़क पर था और एकजुट होकर खाकी की कमजोरी पर रोष जता रहा था।

आग्रह है साहब टाइगर बन जाइये, पेपर टाइगर नहीं। कुछ करिये। या चलते बनिये।

* केवल इधर-उधर करने से नहीं चलेगा काम

जांगळ देश बीकानेर में बढ़ती फायरिंग की घटनाओं के बाद सड़क पर उतरी स्थानीय जनता ने एलान कर दिया है कि ऐसे वारदातों के बाद केवल कुछ थानेदारों को इधर-उधर करने या पुलिस लाइन भेजने से काम चलने वाला नहीं है।

अब कुछ ठोस करना होगा। शहर में पिछले लगभग एक साल से अपराधों में बढ़ी घटनाओं को लेकर अब लोग सोशल मीडिया पर काफी मुखरित होने लगे हैं। ऐसे लोगों ने ऐलान कर दिया है कि अब भी यदि खाकीधारी लोग नेताओं, धन्ना सेठों व बाहुबलियों के ही आगे पीछे नाचकर अपना काम पूरा समझ लेंगे तो उन्हें इस गलतफहमी में नहीं रहना चाहिये।

सोशल मीडिया पर इससे पहले कभी भी स्थानीय खाकीधारियों की इतनी जमकर खारितदारी पहले कभी नहीं हुई जितनी इस बार हो रही है। समझ रहे हैं ना सर।

* संभल जाओ नेताजी

शहर में बढ़ती आपराधिक घटनाओं से आक्रोषित लोगों ने अब नेताओं को भी अपने कोपभाजन का शिकार बनाना शुरू कर दिया है। किस वारदात पर कौनसा नेता क्या बोला इस पर नजर रखी जा रही है। किस नेता ने किस वारदात में किस अपराधी का साथ दिया इसकी ना केवल खबर ली जा रही है बल्कि सोशल मीडिया पर उसको सार्वजनिक भी किया जा रहा है।

लोग आईजी, कलक्टर, एसपी यहां तक की थानेदारों का भी छोटी-छोटी बातों पर स्वागत-सत्कार, सम्मान करने वाले वालों को भी नहीं बक्श रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि पिछले कुछ सालों से कलक्टर एसपी तो बदल रहे हैं मगर उनका स्वागत सत्कार करने वाले, सम्मान करने वाले, सरकारी कार्यों का थोथा प्रचार करने वाले सेम टू सेम रहते हैं।

सोशल मीडिया पर सवाल भी उठाया जा रहा है कि ये ऐसा क्यों हो रहा है।

* बदल रहा है मेरा शहर

एक ताने की वजह से जन्मा मेरा शहर अब बदल रहा है। लोग जागरूक हो रहे हैं। सवाल पूछ रहे हैं। उनके सब्र का बांध टूट गया है। महामारी ने जहां शहर को तोड़ कर रख दिया तो खाकी की उदासीनता ने शहर में आक्रोष भर दिया है। हर आदमी सवाल पूछ रहा है।

क्यों हो रहा है ऐसा। यदि यह जागरूकता लगातार कायम रही तो शहर जो बदलना शुरू हुआ है एक दिन नहीं मंजिल प्राप्त करेगा। जिसमें सबका सहयोग होगा। सब को न्याय मिलेगा। सबको इलाज मिलेगा। सब को सवाल करने की हिम्मत आएगी।

PANCHNAMA -- USHA JOSHI 26 OCTOBER. 2020

PANCHNAMA — USHA JOSHI 26 OCTOBER. 2020

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पंचनामा : उषा जोशी सोमवार 28 सितंबर 2020 https://samacharseva.in/panchnama-usha-joshi-monday-28-september-2020/ Mon, 28 Sep 2020 03:52:24 +0000 https://samacharseva.in/?p=12826 टाइगर को गुस्सा क्यों आता है…

पंचनामा : उषा जोशी सोमवार 28 सितंबर 2020, जांगळ देश के टाइगर अपने मातहतों के मीडिया प्रेम से बड़े नाराज हैं। वे भयंकर गुस्से में हैं। उनका गुस्सा जायज भी है। टाइगर जिस वारदाता का खुलासा अपनी प्रेस कॉन्फ्रेस में करना चाहते थे, मातहतों ने उसे पहले ही मीडिया को बता दिया।

मीडिया ने भी उस खुलासे को बगैर टाइगर के नाम के खबर बनाकर चला दिया। ऐसे में टाइगर गुस्सा होना बनता है। और तो और टाइगर ने मातहतों की करतूत की नाराजगी में प्रेस कान्फ्रेंस में उस बड़ी वारदात का खुलासा ही नहीं किया जिसके लिये प्रेस कॉन्फ्रेस बुलाई गई थी।

टाइगर ने पीसी में लूट की वारदातों को अंजाम देने वाले गिरफ्तार लोगों की केवल उस लूट का ही जिक्र किया जिसका खुलासा पहले नहीं किया गया जबकि शहर के एक डाकघर को लूटने वाली मुख्य लूट की वारदात पर कुछ नहीं कहा। जिसके बारे में जानने के लिये हर कलमकार भागकर थाने पहुंचा था। पता चला कि टाइगर ने शहर के एक थाने में बुलाई गई इस प्रेस कान्फ्रेस से पूर्व मातहतों को जबरजंग लताड़ भी लगाई।

बहरहाल टाइगर मीडिया में बिगड़ी अपनी छवि सुधारने का प्रयास करते हैं मगर मातहत उसमें पलीता लगा देते हैं। ऐसे में गुस्सा जायज है।

अजगर करे ना चाकरी, पंछी करे ना काम…

लगता है कि जांगळ देश में खाकीधारियों की काम के प्रति उदासीनता ने अपराधियों, चोर उच्चकों, लुटैरो, बदमाशों, गुंडों, जुआरियों, सटोरियों, नशेड़ियों, तस्करों, मादक पदार्थों की अवैध बिक्री करने वालों, अवैध हथियारों का धंधा करने वालों के अच्छे दिन ला दिये हैं। शहर में दिनदहाड़े दो बाइक सवार लुटैरे डाकघर लूट लेते हैं।

खुले आम फायरिंग की घटनायें हो रही हैं। वाहनों की चोरी थमने का नाम नहीं ले रही। हथियारों व मादक पदार्थों की तस्करी बेखौफ जारी है। मगर जांगळ देश के टाइगर अपनी वाहवाही के लिये एक पत्रकार वार्ता में बड़ी घटनाओं पर टिप्पणी करने की बजाय एक एजेन्ट से हुई लूट का ही खुलासा कर इतिश्री कर लेते हैं।

बाकी मामलों पर आने वाले दिनों में जानकारी देने की गोली देकर प्रेस नोट पकड़ा देते हैं। ये अच्छी बात नहीं सर जी।

मायरा भराई टैक्स से जेब भारी करते खाकीधारी

शहर के एक थाने में अवैध रूप से वसूले जा रहे मायरा टैक्स से इस थाने पहुंचने वाले परिवादी और आरोपी भयंकर परेशान हैं। पता चला है कि इस थाने के खाकीधारी किसी को भी बगैर मायरा टैक्स लिये छोड़ते नहीं है।

सुना है एक बार इस थाने में कार्यरत किसी कार्मिक की पुत्री की शादी में थानेवालों ने अपनी ओर से अच्छा खासा मायरा भरा था। आला खाकीधारियों की फौज इस मायरे की रस्म में शामिल हुई थी। तभी से इस थाने वाले खाकीधारियों को मायरा टैक्स वसूलने का आइडिया आया। अब ये थाने पहुंचने वाले हर किसी से मायरा टैक्स के नाम पर अपनी जेबें भर रहे हैं।

अपने गांव-गुवाड़ से आये परिचितों को भी ये खाकीधारी बगैर टैक्स की रकम अदा करवाये जाने नहीं देते। थाने का नाम आप सोच कर रखो। अगली बार मैं बता दूंगी।

ओ पालनहारे निर्गुण और न्यारे…

कोरोना वायरस या कहें कोविड-19 जांगळ देश के कई थानेदारों के लिये पालनहार बना हुआ है। ये कोरोना काल ही है कि जिसके कारण थानों से कई थानेदारों की विदाई रुकी हुई है। नयाशहर वाले थानेदारजी इसी माह निबटने थे, कोरोना के चलते नहीं निबटे।

सदर वाले सर-सर कहते हुए अपनी थानेदारी आगे ही आगे सरकाते जा रहे हैं। जेएनवी थाने वाले थानेदारजी भी देवी-देवताओं के साथ कोरोना की जे जे कर रहे हैं। शहर के थानेदार तो कोरोना के कारण जैसे तैसे बचे हुए हैं।

गांवों में इधर-उधर करने का काम अभी चुनाव ने रोक रखा है। यही कारण है कि थानों में जमे हुए थानेदारों के इन दिनों अच्छे दिन चल रहे हैं।

PANCHNAMA - USHA JOSHI 28 SEPTEMBER 2020

PANCHNAMA – USHA JOSHI 28 SEPTEMBER 2020

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पंचनामा : उषा जोशी 21 सितंबर 2020 https://samacharseva.in/panchnama-usha-joshi-21-september-2020/ Mon, 21 Sep 2020 04:51:29 +0000 https://samacharseva.in/?p=12744 टाइगर की चाल-ढाल

पंचनामा : उषा जोशी 21 सितंबर 2020, जांगळ देश के टाइगर की चाल-ढाल कुछ-कुछ समझ में आने लगी है। टाइगर ने अच्छी तरह समझ लिया है कि शहर वाले नेताजी शहर में किसी और की पंचायती नहीं चाहते और अनोखा शहर के एक बड़े लाल को गांव-गुवाड़ के इलाके में किसी दूसरे की पंचायती पसंद नहीं है। बस टाइगर ने संतुलन बिठा लिया है।

अनोखा वाले लाल की पंचायती गांवों के थानों में थानेदारों की नियुक्ति हो या किसी जांच अधिकारी को लगाने या बदलवाने का मामला हो टाइगर उनकी बात को सुनकर निर्णय लेते हैं। सुना है अनोखा के लाल का कोई आदमी टाइगर के पास काम लेकर चला जाए तो टाइगर उसे कभी निराश नहीं होने देते।

शहर वाले नेताजी का क्या उनके लोगों को तो कुछ जुआरियों-सटोरियों को बचाने से ही फुर्सत नहीं है। ऐसे में टाइगर को जांगळ देश में अपनी पकड़ मजबूत बनाये रखने में कोई परेशानी नहीं आ रही है।

अपराधियों की फायरिंग रेंज बना जांगळ देश

जांगळ देश के टाइगर की कम होती गर्जना के चलते जांगळ देश अपराधियों की फायरिंग रेंज बनता जा रहा है। किसी दुश्मन को खत्म करना है तो जांगळ देश में दिन दहाड़े फायर कर किसी की भी जान ली जा सकती है। लोगों को डराना है तो कर दो फायरिंग।

बैंक या डाकघर को लूटना है तो फिर पिस्टल कब काम आएगी। पिस्टल है तो कुछ भी संभव है। ऐसा नहीं है कि लॉयन, टाइगर, पीटर अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान का आगाज नहीं करते, करते हैं जी, कई हथियार पकड़े भी जाते हैं मगर जिनको पुलिस को खौफ नहीं वे हथियार तो और भी खरीद ही सकते हैं।

जांगळ देश में खाकीधारियों को धत्ता बताते हुए अपराधी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। जबकि आला खाकीधारी अपनी ही रामायण व महाभारत में व्यस्त हैं।

अपराधियों में विश्वास, पुलिस में भय

कोरोना महामारी ने चोर-पुलिस के रिश्तों को तार-तार कर दिया है। जांगळ देश में चोर दिन दहाड़े वारदातों को अंजाम देते हैं मगर शायद सोशल डिस्टेंसिंग के नियम की पालना करते हुए खाकीधारी चोरों से वाजिब दूरी बनाकर ही चल रहे हैं। पहले अपराधी पुलिस से डरते थे मगर जब से कोरोना महामारी ने अपना जाल फैलाया है पुलिस अपराधियों से डरने लगी है।

जान है तो जहान है को आदर्श वाक्य मानकर  पुलिसकर्मियों ने वर्तमान में बदमाशों से उचित दूरी बनाई हुई है। खाकीधारियों के मन में भय है कौन कब पॉजिटिव मिल जाए। थानों में भी कई पुलिसकर्मी पॉजिटिव आ चुके  हैं।  अपराधियों को पकड़ने में जल्दबाजी दिखाने के बजाया अब उनसे उचित दूरी रखते हुए जांच को अंजाम दिया जा रहा है।

पद सैंकड का मगर काम नंबर वन का

किसानों से पंगा लेने के बाद एक थाने से हटाये गए खाकीधारीजी अब फिर सुर्खियों में हैं। इन खाकीधारी साहब को एक शहरी थाने में सैकंड अफसर तो लगाया गया है मगर साहब को रुतबा पूरा थानेदारी वाला सौंपा गया है। शहर के इस थाने के असली थानेदारजी से तो ना तो लाने वाले खुश हैं और ना महकमे वाले।

ऐसे में अब अपने पूर्व थाने में हंगामा बरपाकर शहर पहुंचे इन सब इन्सपेक्टर साहब ने यहां भी अपनी कारस्तानी दिखानी शुरू कर दी है। साहब यहां को पायलट नहीं बल्कि मुख्य पॉयलट की भूमिका पूरे जोश खरोश से निभा रहे हैं।

अब ये डीएसटी बना मुसीबत

थानेदारों पर अपने आला पुलिस अधिकारियों का प्रेशर हमेशा किसी ना कसी रूप में बना रहता है मगर थानेदार अब जिला पुलिस के विशेष दल (डीएसटी) से भी परेशान हैं। यह दल किसी भी थाने में अपराधियों को पकड़ने व उनके खिलाफ कार्रवाई करता है, यहां तक तो ठीक है मगर जब थानों को मिलने वाले हफ्ते व वसूली में भी इनको भागीदार बनाने की बात कोई भी थानेदार हजम नहीं कर पा रहा है।

थाना क्षेत्रों के जुआरी, सट्टेबाज, अवैध धंधों में लिप्त लोगों का भी करहा है एक काम की दो दो वसूली वे नहीं करवा सकते है। ऐसे में अब कई थानेदारों ने टाइगर से डीएसटी पर लगाम लगाने का आग्रह किया है।

गंदा है पर धंधा है ये

शराब सहित अन्य मादक पदार्थों के अवैध परिवहन, अवैध बिक्री आदि को रोकने वाले खाकीधारी  अपनी कार्रवाई के नाम पर चांदी काटने में लगे हुए हैं। इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिये कई खाकीधारी एक स्थान पर चलने वाले अवैध धंधे को दूसरी जगह बताते हैं और तीसरी जगह कार्रवाई दिखाकर वारे न्यारे कर रहे हैं।

PANCHNAMA - USHA JOSHI 21 SEPTEMBER 2020

PANCHNAMA – USHA JOSHI 21 SEPTEMBER 2020

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पंचनामा : उषा जोशी 14 सितंबर 2020 https://samacharseva.in/panchnama-usha-joshi-14-september-2020/ Mon, 14 Sep 2020 03:01:05 +0000 https://samacharseva.in/?p=12699 हमसे भूल हो गई हमका माफी दई दो…

पंचनामा : उषा जोशी 14 सितंबर 2020, आखिर कार खाकी वालों ने यह माना कि उनके वीरों महावीरों द्वारा दो कलमकारों के  साथ थाने में किया गया बर्ताव उचित नहीं था। इसलिये जांगळ देश के कलमकारों के साथ बैठकर आला खाकीधारियों ने इस बात को मान लेने में ही अपनी भलाई समझी। हालांकि इससे पहले ही लॉयन ने कलमकारों की इच्छा का सम्मान करते हुए कलमकारों से बुरा बर्ताव मामले में थानाधिकारी को जांच होने तक दूर कर दिया था। जांच में भी यही तथ्य सामने आया तो टाइगर ने भी दोषी खाकीवीर के खिलाफ जो कार्रवाई बनती थी उसे करने में देर नहीं की। ओवरऑल मामला आपस में ही समझदारी से निबट गया। खाकीवीरों और कलमकारों की यह लड़ाई लंबी खिंचती तो दोनों पक्षों को ही नुकसान होना साफ दिख रहा था। इस लड़ाई को किसी ने पवन वेग से काम करके तो किसी ने अपना धरम निभाकर तो किसी ने क्षमा मांगकर महावीर बनने में देर नहीं की। इसीलिये कहते हैं, अंत भला तो सब भला।

मैं खुश हूं मेरे आंसुओं पे ना जाना..

एक खाकीधारीजी हैं। हमेशा किसी ना किसी कारण सुर्खियों में ही रहते हैं। अब पता नहीं उनके साथ के खाकीधारियों को क्यों लगता है कि इन खाकीधारीजी को अपने ही प्रमोशन पर खुशी नहीं हो रही है। हालांकि खुद खाकीधारीजी लगातार दावा कर रहे हैं कि वे प्रमोशन से बहुत खुश हैं। जबकि साथी खाकीधारी कहते हैं कि उनको अपने रबड़ीदार थाने से बहुत लगाव है। वे ये रबड़ीदार थाना छोड़ना नहीं चाहते मगर अब और बड़े अफसर बनने पर उनको थाना छोड़ना पड़ रहा है। कहने वाले तो यह तक कह रहे हैं कि थाना छोड़कर जाने वाले साहब इतने पहुंचे हुए हैं कि वे अपनी विरासत को बचाने के लिये लालू-राबड़ी वाली कथा को भी दोहरा दें तो आश्चर्य नहीं। अगर ऐसा संभव हो तो इस रबड़ीदार थाने को एक दबंग महिला अफसर भी मिल सकती है। ये तो सोेने पे सुहागा हो जाएगा। खैर देखते हैं साहब अब क्या नया गुल खिलाते हैं।

ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना…

ताजा ताजा अफसर बने खाकीधारी जी की ‘गोली में चलाउंगा’ की ख्वाहिश अब जल्द पूरी हो जाएगी। साहब ने एक वायरल आॅडियो में एक बदमाश को धमकी देते हुए कह दिया था कि अब गोली वो चलायेंगे और किसी को उपर भेज देंगे। हालांकि साहब जिनको ऊपर भेजने वाले थे उसने भी सोशल मीडिया पर अपनी बात कह दी कि किसी को उपर भेजने या नीचे रखने का फैसला केवल ऊपर वाला ही करता है। बहरहाल साहब को बड़ी जिम्मेवारी लेने के लिये अब प्रशिक्षण लेना होगा और वहां वे अपनी गोली चलाकर पीतल गलाने की ख्वाहिश जरूर पूरी कर लेंगे। साहब के भक्तों ने गोली वाला आॅडियो वायरल करके साहब की ठसक कामय करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। अब साहब की गोली चलाने की ख्वाहिश भी जल्द पूरी हो जाएगी।

जांच तक थानेदार को हटाने की गोली

पुलिस महकमें में कोई थानेदार गलत काम करता है। जनविरोधी काम करता है तो और जनता आंदोलन कर देती है तो आला खाकीधारी उस थानेदार को जांच के चलते तक हटा देते हैं। लोग कहते हैं कि वास्तव में संबंधित थानेदार को हटाया नहीं जाता। ये पुलिस के आला अधिकारी आंदोलनकारी जनता व जनप्रतिनिधियों को एक गोली देने के हिसाब से कह देते हैं कि संबंधित थानेदार को थाने से जांच तक हटा दिया जाएगा। लोग ऐसा इसलिये भी कह रहे हैं क्योंकि जांगळ देश में हाल के कुछ आंदोलनों में आंदोलनकारियों को यही गोली देकर शांत किया गया। जबकि हटाये गए थानाधिकारी बाकायदा थाने में बैठकर ही सारे काम संचालित करते देखे गए। आला खाकीधारी इसे सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे वाली दवा मानकर इसका इस्तेमाल आंदोलनकारियों पर करते हैं।

टाइगर की चाल-ढाल

लगभग नब्बे दिन बीतने के बाद भी स्थानीय खाकीधारी नये टाइगर की चाल-ढाल समझ नहीं पाये हैं। यही कारण है कि जब क्राइम बैठक में टाइगर किसी एक खाकीधारी को आंखों के इशारे से कुछ कहता है तो बाकी खाकीधारी भी उसी का फोलोअप करते हुए काम करते हैं। हाल की क्राइम मीटिंग में जब एक खाकीधारी का मोबाइल बजा तो टाइगर ने आंख तरेरी, बस फिर क्या था आलाखाकाीधारियों सहित सभी थानाधिकारियों ने भी अपने अपने मोबाइल तुरंत साइलेंट मोड पर कर दिये।

एक फूल दो माली

शहर का एक थाना है। मैं बता चुकी हूं कि उस थाने का वर्तमान थानेदार इसी माह के अंत तक थाने से बाहर होगा। ऐसे में दो सीआई साहब इस थाने पर अपना कब्जा जमाने के लिये हर तहर की कोशिश में जुटे हुए हैं। एक सीआई है जो किसी ना किसी बहाने उसी थाना इलाके के अपराधियों को पकड़वा कर अपनी पैठ बनाने में लगा  है तो दूसरे को टाइगर की कृपा की पूरी आशा है।

PANCHNAMA 14-09-2020 USHA JOSHI

PANCHNAMA 14-09-2020 USHA JOSHI

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पंचनामा : उषा जोशी  https://samacharseva.in/panchnama-usha-joshi-2/ Mon, 07 Sep 2020 07:51:11 +0000 https://samacharseva.in/?p=12522 आभारी हैं सरजी, प्रफुल्ल कर दिया आपने 

पंचनामा : उषा जोशी, भला हो बीकानेर के आईजी व कलक्टर का जिन्होंने अपने महकमों ही नहीं बल्कि पूरे बीकानेर संभाग की प्रदेशभर में होने वाली थू-थू से बचा लिया, वरना बीकानेर के कप्तान व उनकी खाकी सेना ने तो प्रदेश में भर बीकानेर का नाम डूबोने के प्रयास में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

Panchnama Usha Joshi

Panchnama Usha Joshi

जिस बीकानेर में दिन दहाड़े फायरिंग हो रही हो, हिस्ट्रीशीटर सीधे-सीधे पुलिस को ही धमकी दे रहे हों, लोगों के घर जला रहे हों वहां पुलिस कप्तान की टीम बजाय अपराधियों को पकड़ने के दो कलमकारों को उनके ही घर के आगे रात में बातचीत करने के दौरान शांति भग करने के आरोप में गिरफ्तार कर लाती है और रातभर उनको हवालात में प्रताड़ित करती। इस घटना के विरोध में कलमकारों ने जब एकजुट होकर सरकारी कार्यक्रमों के बहिष्कार करने की घोषणा की तो आईजी तथा कलक्टर ने कलमकारों का पक्ष जानने के बाद तुरंत एक्सन लेते हैं।

जांच कमेटी बनाई। थानेदार को जांच तक हटाया। आईजी, कलक्टर के इस कदम से सभी ने राहत की सांस ली। वरना कप्तान साहब तो किसी भी परिणाम की चिंता किए बगैर सभी कलमकारों से दो दो हाथ करने को तैयार ही बैठे थे।

खादीधारियों की शरण में थ्री स्टार खाकीधारी 

पुलिस मुख्यालय से सब इन्सपेक्टरों के थानों में भी इन्सपेक्टरों के लगाने के आदेश के बाद से सत्ता पक्ष के खादीधारियों तथा पुलिस कप्तान के यहां थ्री स्टार खाकीधारियों की भीड़ बढ़ने लगी है। जांगळ देश बीकानेर की बात करें तो यहां सब इन्पेक्टरों वाले थाने कोतवाली, बीछवाल, देशनोक, गजनेर, कोलायत। नापासर, छतरगढ़, सेरुणा, कालू, जामसर, जसरासर, दंतौर, पांचू कुल 13 थाने हैं जबकि थानेदारी पाने वाले सीआई की संख्या इससे लगभग डबल है। मुख्यालय के इस साल भर के थाना रूपी तोहफे को हर सीआई पाना चाहता है। अब तक पुलिस लाइन सहित इधर उधर कोनों में ड्यूटी  दे रहे इन्सपेक्टर एनी हाउ थाना पाने की जुगाड़ में जुट गए हैं।

इनका मानना है कि एसएचओ तो एसएचओ ही होता है क्या बड़ा थाना क्या छोटा थाना। वहीं अनेक सब इन्सपेक्टर पुलिस मुख्यालय के ऐसे आदेश से दुखी हैं। गम गलत कर रहे हैं।

बोरिया बिस्तर समेट लो सीआई साहब! 

नयाशहर थाने के सीआई साहब का बोरिया बिस्तर सम्हालने का टाइम आ गया है। इन सीआई साहब से ना तो लाने वाले खादीधारी खुश है ना महकमे वाले आला खाकीधारी। प्लान के अनुसार तो बीच सितंबर में उनका जाना तय है। वैसे भी उनके इलाके में वारदात हो जाए तो क्षेत्र के लोग तथा महकमे के आला अधिकारी भी उनको सूचना देने की बजाय पास के थाने के थानेदार को सूचना देते हैं।

क्योंकि ये सीआई साहब बगैर वर्दी हवाई चप्पल, टी शर्ट व लोअर पहने ही वारदात स्थल का मुआयना करने पहुंच जाते हैं। इन सीआई साहब की हर समय ‘थोड़ी-थोड़ी’ लिये रहने की आदत से भी महकमे के लोग परेशान हैं। हालांकि सीआई साहब ईमानदार हैं। पुलिस के पंच व प्रपंच इनको नहीं आते हैं। ऐसे में ये अपना बोरिया बिस्तर बांधे ही रहते हैं। बस आदेश का ही इनको इंतजार रहता है।

ये डीपी-डीपी क्या है 

जिले के पुलिस महकमे में डीपी कोड वर्ड बहुत चर्चा में है। सुना है आला खाकीधारी किसी भी आला व सामान्य खाकीधारी के बारे में कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले यह पता कर लेते हैं कि संबंधित खाकीधारी डीपी वाला है या डीपी वाला नहीं। उसी हिसाब से खाकीधारी के पक्ष या विपक्ष में निर्णय किया जाता है। शहर के थानों में भी डीपी के थाने व बगैर डीपी वाले थाने के नाम से पुकारे जाते हैं।

आला अधिकारी कहते हैं कि इस कोड वर्ड से प्रमुख कार्यों की छंटनी हो जाती है तथा काम को करने में आसानी होती है मगर कोई यह नहीं बता रहा कि डीपी कोड का मतलब क्या है। बस यही कहा जाता है पुलिस में अभी डीपी युग है। प्रयास है जल्द इस कोड को डिकोड कर लूंगी।

एसपी की पीसी और कलमकार 

शहर में इन दिनों पुलिस कप्तान की एक पीसी की चर्चा जोरों पर है। सुना है कुछ समय पूर्व पुलिस कप्तान ने कलमकारों को एक   मर्डर मिस्ट्री सुलझने पर बातचीत के लिये बुलाया। कलमकार पहुंचे। सवाल शुरू ही किए तभी कप्तान बोल पडे जो कुछ प्रेसनोट में दिया है वहीं हमें कहना है, और कोई सवाल का जवाब नहीं दिया जाएगा। कलमकारों ने कहा सर प्रेसनोट मेल ही कर देते बुलाया क्यों। सर फिर भी चुप ही रहे।

पॉलिसी तो लागू करते रहो सर जी 

एक पुलिस अधिकारी की एक जिले में अधिकतम चार साल रहने की पॉलिसी बनी हुई है मगर कई पुलिस अधिकारी  आज भी इस पॉलिसी के तहत बाहर जाने की बजाय तिकड़में भिड़ाकर उसी जिले में जमे हुए हैं। कई तो ऐसे हैं जो चार साल पूरा होने के बाद जाने को भी तैयार है मगर महकमा अभी उन्हें भेज भी नहीं रहा। इससे दूसरे खाकीधारियों को परेशानी हो रही है। समझ गए ना आप।

किसने कहने से हो रही पेड़ों की कटाई 

गजनेर थाने के सामने के स्कूल ग्राउंड पर लगे कीकर व बबूल के पेड़ों को किसकी परमिशन से काटा जा रहा है ये थाने वालों को भी पता नहीं है। थाने वालों ने तो खुद स्कूल व उसके ग्राउंड को अपना माल खाना बना रखा है। ऐसा कैसे चलेगा कप्तान साहब, लोग बुरा मान रहे हैं।

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आज में उपर आसमां नीचे… https://samacharseva.in/today-i-am-up-and-sky-is-down/ Mon, 31 Aug 2020 03:37:38 +0000 https://samacharseva.in/?p=12359 पंचनामा : उषा जोशी

आज में उपर आसमां नीचे…

शहर के एक थाने को सम्हाल रहे खाकीधारी जी की पूरे शहर के थानों में धाक है। सत्ता के नजदीकी इन खाकीधारी जी के कई शागिर्द जहां इनकी सिफारिश से शहर के थानों में काबिज हो चुके हैं तो इन खाकीधारी जी से भी बडे कई खाकीधारी भी इन सत्ता के निकट के खाकीधारी जी की बदौलत मनचाही जगह पर जिले में सेट हो चुके हैं।

सत्ता के निकट के इन खाकीधारी जी की पांचों उंगलियां घी में हैं और इनका सर भी कहाड़ी में है। शहर के गुंडे तो इन खाकीधारीजी के नाम से थरथर कांपते हैं। हालांकि इनका गोली चलाने का हुनर अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है मगर सुना है ये सरेआम फायरिंग करने वाले बदमाशों को जेल के बजाय अपनी गोलियों से ही उपर पहुंचाने का मादा रखते हैं।

ये खाकीधारी जी विपक्ष के जनप्रतिनिधियों को आइना दिखाने में भी पीछे नहीं रहते। जी, अभी इतना ही पता चला है। उपरोक्त घटनाओं के बाद क्या हुआ उसका पता लगाया जा रहा है।

सबको रखे राम सबको अल्ला रखे

खाकी महकमे में इन दिनों सब अपने में मस्त हैं। शहर में गोलियां चल रही है। बच्चे गोलियों का शिकार हो रहे हैं। कोई पकड़ा  नहीं जा रहा है। दिन दहाड़े बाइक की पिछली सीट पर बैठा व्यक्ति चलती बाइक से फायरिंग कर रहा है।

पांच दिन बाद भी पुलिस उसे पकड़ नहीं पाई है। गोली का शिकार हुआ बच्चे की मौत हो जाती है। खाकी वाले कहते हैं आरोपी को जल्द पकड़ेंगे, पांच दिन पकड़ नहीं सके, अब जल्द पकड़ेंगे। वहीं कोई किसी के घर पहुंचकर आग लगा रहा है। दिन दहाड़े टू व्हीलर, फोर व्हीलर चोरी हो रहे हैं। थाने पहुंचने वाली पीड़िताओं को थाने के ही पुलिसकर्मी बेड टच कर रहे हैं।

सब कुछ उलटा पुलटा चल रहा है। सब यह जानने में व्यस्त हैं कि रसोड़े में कौन था। भाड़ में जाए ऐसा रसोड़ा। शांति शहर को अशांत बना दिया गया है। डोडा पोस्त रखने वालों को पकड़ कर गिरफ्तारियां दिखाई जा रही है। सतर्कता के नाम पर महीनों पुराने आरोपियों को अब पकड़ा जा रहा है। सुन रहे हैं ना टाइगर साहब।

एक अनार सौ बीमार

शहर का एक थाना है पॉश कॉलोनी में बना हुआ है। कॉलोनी के नाम से ही थाना बना हुआ है। इस थाने की थानेदारी पाने के लिये कई सीआई लाइन में है। इन खाकीधारियों ने अपने अपने पक्ष के खादीधारियों को भी संदेश पहुंचा दिया है।

बीकानेर और कोलायत वाले खादीधारी जी इस थाने में अपना आदमी बिठाना चाहते हैं तो नोखा वाले दो लाल खादीधारी इस थाने में अपना खाकीधारी ठूंसना चाहते हैं। सुना है नोखा निवासी खादीधारी ने तो यहां तक कहा है कि वह थाना उसके चुनाव क्षेत्र में रहा है ऐसे में बीकानेर व कोलायत वाले खादीधारियों को इसमें पंचायती नहीं करनी चाहिये।

बहरहाल देखते हैं कौन इस थाने में अपना आदमी बिठाने में कामयाब रहता है।

panchnama 31 agust 2020

panchnama 31 agust 2020

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सीने में जलन आंखों में तुफान सा क्यूं है… https://samacharseva.in/why-is-there-a-burning-sensation-in-the-chest/ Sun, 03 Nov 2019 20:11:20 +0000 https://samacharseva.in/?p=6947 पंचनामा : उषा जोशी

सीने में जलन आंखों में तुफान सा क्यूं है…,सीने में जलन तो होनी ही थी, जांगळ देश के लॉयन ने जब से खाकीधारियों का सीने का माप, पेट का घेराव का माप तथा वजन का हिसाब-किताब मांगा है तब से कई खाकीधारियों के सीने में जलन तथा आंखों में तुफान सा आ गया है। खाकीधारी इंचीटेप व तराजू के आसपास चक्कर लगाने के साथ ही बाग-बगीचों में दौड़ लगाकर अपनी चेस्ट को पेट के घेरे से चार इंच अधिक करने को मजबूर हो गए हैं।

लॉयन के इस आदेश के बारे में पूछने पर अंग्रेजी में गुस्साये शहर के एक थानाधिकारीजी जी बोले, दिस इज अवर पर्सनल मेटर, मैडम डू यू नो इट इज माई पर्सनल लाइफ एंड आय एम नाट बाउंड टू टेल एनी स्टोरी … और फोन काट दिया? वहीं सुना है यातायात महकमे के एक साहब पेट का घेरा कम करने के जतन में जुट गए हैं।  जिम ज्वाइन की है,

बिना चीनी की चाय पीने लगे हैं, मीठे से भी उन्होंने तौबा कर ली है। इधर, खाकी का ‘धरम’  निभाने वाले एक सीआई साहब ने तो लॉयन का आदेश मिलते ही अपने थाने के स्टाफ को पन्द्रह दिन में फिट होने का अल्टीमेटम दे दिया है। सीआई साहब खुद भी वर्षों से जिम जाने का ‘धरम’ निभाते आये हैं। देखते हैं लॉयन का आदेश क्या गुल खिलाता है।

पदोन्नत पर गूंजा बधाई हो बधाई

साल के सबसे बड़े त्योहार के दिनों में अच्छी खबरें आयें तो सोने में सुहागा ही कहा जाएगा। जांगळ देश के कई जिलो में थानेदारी कर चुके अमरजीत चावला सीआई से डीवाईएसपी हो गए। जांगळ देश के कई एसआई भी अब पदोन्नत होकर सीआई बन गए। इनमें जांगळ प्रदेश के उपनिरीक्षक रहे सुशीलकुमार, महावीर प्रसाद, फूलचंद, दिलीप कुमार खत्री, अवधेश संधु, रामचन्द्र कस्वां, सुन्दरमल, मनोज कुमार, मदनलाल, सु•ााषचन्द्र, महेश कुमार, विकास बिश्नोई, रमेश कुमार, दिनेश सारण, आरएस शेखावत, वेदपाल शिवरान, राजकुमार तथा बलवंतराम अब पुलिस निरीक्षक बन गए। भाईयों के लिये बधाई तो बनती है।

मुबारक हो सबको समां ये सुहाना..

दिवाली के मौसम में प्रमोशन का गिफ्ट पाकर कई खुश हुए तो कईयों  की दिवाली की खुशी प्रमोशन नहीं मिलने के चलते दुगनी नहीं हो सकी। साथी बैच के खाकीधारियों का प्रमोशन होने पर खुश दिखाई दिये कईयों को अपना नंबर नहीं आने का भी गम रहा। ऐसे ही खाकीधारियों ने अपना समय यह चर्चा कर बिताया कि मेरिट की सूची में वे कितने नंबर पर हैं और कितने नंबर तक के अधिकारियों को प्रमोट कर दिया गया। सरकार सूची के कुछ और लोगों का प्रमोशन कर देती तो जांगळ प्रदेश के और भी खाकीधारी जश्न मना सकते थे। खैर।

ऐसे कैसे निबटेंगे क्राइम से

सीसीटीवी कैमरे लगाये, खराब हो गए। कहीं चालू नहीं किए गए। अभय कमांड सेन्टर को कोई कमांड करने वाला नहीं दिख रहा। भले ही सूबे के बड़े खाकीधारी साहब साइबर क्राइम को रोकने के लिये विशेष सेल बनाने की बात कर रहे हों मगर सामान्य क्राइम रोकने में भी जांगळ देश की खाकी गश खा रही है।

बाइक चोर, लुटेरे, बलात्कारी, चैन स्रैचर, गुंडागर्दी जैसे अपराध इन दिनों जांगळ देश की मीडिया में सुर्खिया बन रहे हैं। ऐसे में साइबर अपराध का जोर और बढ़ गया है। ये क्या हाल बना रखा है जी, कुछ लेते वेते क्यों नहीं।   

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लो आ गई उनकी याद वो नहीं आये… https://samacharseva.in/lo-aa-gaee-unakee-yaad-vo-nahin-aaye/ Mon, 08 Jul 2019 03:31:28 +0000 https://samacharseva.in/?p=5889 पंचनामा : उषा जोशी

* लो आ गई उनकी याद वो नहीं आये…

लो आ गई उनकी याद वो नहीं आये…,पिछले दो तीन हफ्तों से लॉयन के आने का इंतजार किया, नहीं आये, उनकी याद आती रही मगर वे खुद नहीं आये, हां आये भी होंगे तो चुपचाप आकर चले गए होंगे बस कयास ही लगा सकते हैं। अब सरकार ने जांगळ देश में चर्चित हो चुके लॉयन को यहां से खिसकाने का इंतजाम भी कर दिया।

लगता ऐसा है कि किक्रेट सटोरियों के दुश्मन नंबर वन बन चुके लॉयन साहब का विकट एक बाला की कहानी भर से उड़ गया। खैर, बड़े साहब आते तो कुछ बात भी करते मगर इस बारे में साहब ने तो बस महकमे में ही बचाव के घोड़े दौड़ाये और कामयाब भी रहे। जांगळ देश में बिना कुछ किसी को बताये साहब यहां से रुखसत भी हो गए।

नये लॉयन ने उनकी जगह भी ले ली। अब नया दिन, नई बात। पुराने साहब के किस्से साहब के साथ ही चले जाएं तो बेहतर। दिक्कत तो पुराने साहब के नाम पर दुकान चलाने वाले अधिनस्थ खाकीधारियों को हो रही है। नये सेटअप में नये लोगों की दुकान चलेगी। ये तो सरकारी खेल है। यह शो मस्ट गो ऑन की थीम पर चलता है। रंगमंच वही, नाटक भी वही बस किरदार बदलते रहते हैं।

* जरा सामने तो आओ छलिये..

जांगळ देश के शहरी इलाके के बड़े क्षेत्र के एक थाने के सिपाही की ऊंची पहुंच से थाने के इंचार्जजी भी अनभिज्ञ रहे। वैसे इस सिपाही का काम गाड़ी चलाना बताया गया मगर ये कलाकार तो थाने को ही चला रहा था। हाल में जब क्षेत्र में एक बाइक चोरी करने वाले गिरोह को दबोचा गया तो पहुंचे हुए सिपाही ने अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर ऐसी तस्वीर मीडिया में चलवाई जिसमे उसका चेहरा सबसे अधिक साफ दिखाई दे।

मीडिया में तस्वीर देख थानेदारजी को अपने यहां चल रही सिपाहीजी की दुकान की जानकारी हुई। सुना है थानेदारजी ने जब अपने स्तर पर सिपाही की पहुंच की जांच पड़ताल करवाई तो पता चला कि इलाके में सिपाही का नेटवर्क बहुत तगड़ा है। एक आलाधिकारी जी उसे बेकअप देते रहे हैं। अब सिपाहीजी अपने ही महकमे की निगरानी में आ गए हैं। सहमे हुए है। आलाधिकारी भी उसकी कोई मदद नहीं कर पा रहे हैं। देखते हैं कहानी क्या मोड़ लाती है।

* दरोगा जी चोरी हो गई…

शहर में बाइक चोरी के गैंग पकड़ने व बाइक चोरी होने दोनों का सिलसिला बदस्तूर जारी है। हर शहरी व ग्रामीण थाने ने अपने यहां बाइक चोरों की गैंग को पकड़ कर कई बाइक जब्त की है मगर उन थाना इलकों में भी बाइक चोरी का सिलसिला है कि टूट ही नहीं रहा है।

इधर बाइक चोरी के गैंग को पकड़ने की खबरें प्रकाशित होती हैं उधर बाइक चोरी की भी। कोई करे तो क्या करे। बाइक चोर तो अभय कमांड सेंटर के कैमरों में भी नहीं आ रहे हैं। दिन दहाड़े हमेशा उन्हीं इलाकों से लगातार बाइक चोरी हो रही है जहां पहले भी बाइक गायब होती आई है। गौर करे सरकार।

* पहले फीडबैक, फिर काम

जांगळ देश के नये लॉयन ने रविवार को ही पदभार ग्रहण किया है। सुना है साहब दफ्तर पहुंचते उससे पहले ही पता चला कि कार्यालय पर लहरा रहा तिरंगा तेज हवा के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है। लॉयन ने कार्यभार ग्रहण करने से पहले तिरंगा बदलवाने के आदेश दिये।

कलमकारों से बातचीत में लॉयन ने रूटीन बातों के अलावा बस यही कहा कि पहले फीडबैक लूंगा फिर अभियान चलाकर अपराधियों को उनके ठिकाने पहुंचाया जाएगा। पुलिस को भी आम जन से अच्छा व्यवहार रखने की सीख दी जाएगी।

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कब सुनाई देगी लॉयन की दहाड़ ? https://samacharseva.in/when-will-the-lion-roar/ Sun, 30 Jun 2019 19:59:10 +0000 https://samacharseva.in/?p=5870 पंचनामा – उषा जोशी

* कब सुनाई देगी लॉयन की दहाड़ ?

कब सुनाई देगी लॉयन की दहाड़ ? जांगळ देश के लॉयन की दहाड़ सुनने को लोग तरस गए हैं। एक समय में अपराधियों के साथ-साथ लॉयन के जंगल में उनके साथी अधिनस्थ खाकीधारी भी सहम जाया करते थे। जब से एक बाला की बला लॉयन को लगी है तब से लॉयन की दहाड़ सुनने को लोग तरस गए हैं। बला टलने के इंतजार में लॉयन जांगळ देश में प्रकरण के बाद से नजर नहीं आये हैं।

अब वे वापस जांगळ देश के लॉयन के रूप में आकर फिर दहाड़ेंगे या अपनी छुट्टियां बढ़ाकर सरकार के आदेश का इंतजार करते रहेंगे। खाकी महकमे सहित शहर के पाटेबाज भी अब लॉयन के जांगळ देश आने व ना आने के बारे में शर्तें लगा रहें हैं। कई पाटेबाज तो यह चुटकी लेने से नहीं चूक रहे कि सट्टा बाजार में साहब के नहीं आने के भाव चल रहे हैं।

कुछ पाटेबाज दावा करते हैं कि लॉयन अब तबादले के आदेश के साथ ही आयेंगे जबकि कुछ का दावा है कि बाला की बला प्रकरण से बिगड़ी छवि को सुधारने के लिये लॉयन कुछ समय जांगळ देश में ही रहकर फिर पुरानी दहाड़ लगायेंगे। अब आ भी जाओ लॉयन सर, ये सब तो चलता रहता है।

* जारी है चोर-पुलिस का खेल

टाइगर ने हाल ही में दो बड़ी चोरियों का खुलासा किया। डिजी ट्रेक मशीने चुराने वाले अंतरराज्यीय चोर गिरोह को दिल्ली से दबोचा तो शहर में बाइक चुराने वालों को भी धर दबोचा मगर चोर-पुलिस का खेल शहर में अब भी जारी है। ये तो सीसीटीवी का कमाल है कि लोगों को कुछ पता चल जाता है कि चोर कब आया, क्या ले गया।

पर क्या करें चोर को पकड़ने का काम तो पुलिस ही कर सकती है। शहर में चारों ने खाकीधारियों के नाक में दम कर रखा है। आज तड़के ही टैक्सी में सवार होकर आये चोर ने बाकायदा एक घर के आगे से पानी की मोटर उखाड़ी और आराम से टैक्सी में सवार होकर वापस चला गया। सीसीटीवी से यह पता चला।

मुरलीधर व्यास कॉलोनी में राज्य के बाहर से चौपहिया वाहन पर बैठकर आये चोरों को भी पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पकड़ा। इस सबके बावजूद चोरियां रुक नहीं रही है। वाहन चोरी के एक गिरोह का भंडाफोड़ होता है तो दूसरा गिरोह चोरी का काम बदस्तूर जारी रख रहा है। यही हाल रात को घरों में होने वाली चोरी का है। अब तो एक ही सहारा है, जागते रहो-जगाते रहो।

* नहीं सुधरेगी शहर की यातायात व्यवस्था

शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के नाम पर अनगिनत बैठकें होने के बावजूद यातायात व्यवस्थित रूप से संचालित नहीं हो पा रहा है। जिला प्रशासन ने यातायात व्यवस्था को सुचारू करने के लिये कई प्रयास किए हैं मगर शहर में पर्याप्त पार्किंग सुविधा के अभाव में रास्ते में खड़ी गाड़िया पूरा यातायात ठप कर देती हैं।

हाईवे पर भले ही कुछ व्यवस्था हो मगर शहर के अंदरुनी इलाके में यातायात व्यवस्था भगवान भरोसे हैं। अतिक्रमण के चलते सड़के छोटी हो गई। इन्हे बड़ी करना किसी के बस में नहीं। यातायात व्यवस्था को लेकर होने वाली बैठकों में बड़े बड़े दावे किये जाते हैं मगर शहर में पहुंचते ही सारे दावों की हवा निकल जाती है।

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ए भाई जरा देख के चलो… https://samacharseva.in/a-brother-lets-see/ Sun, 23 Jun 2019 20:52:06 +0000 https://samacharseva.in/?p=5794 पंचनामा : उषा जोशी

* ए भाई जरा देख के चलो…

ए भाई जरा देख के चलो…, जांगळ देश में सबको सही रास्ता दिखाने वाले खाकी महकमे की शांति महकमे के ही दूसरे खाकीधारियों को रास नहीं आ रही है। भारी इंकम कमाने वाला माने जाने वाले इस महमकमे के आलाधिकारी व अन्य स्टाफ के बीच की टयूनिंग से कई खाकीधारी हैरान परेशान हो रहे हैं।

कहने वाले कहते हैं कि लोगों को रास्ता दिखाने वाले इस महकमे को जब से बड़ा अधिकारी मिला तब से ही यहां के बड़े व छोटे अधिकारी में  उपरी कमाई को लेकर आपसी झंझट सार्वजनिक चर्चा का विषय बना मगर इन दिनों इस महकमे के बड़े-छोटे अधिकारी की आपसी खींचातानी नहीं बल्कि टयूनिंग लोगों को परेशान कर रही है।

कुछ को यह टयूनिंग नहीं मजबूरी भी लगती है। कुछ मीडिया मित्र खाकीधारियों की माने तो दोनों बड़े छोटे अधिकारी जांगळ प्रदेश की रग रग से वाकिफ है। पहले भी यहां पर कई थानों में तैनात रह चुके हैं। ऐसे में समझते हैं कि सब कुछ शांति से होता रहे इसी में सबकी भलाई है।

बहरहाल कोशिश की कि कुछ पता चले मगर लोगों को रास्ता दिखाने वाले इस महकमे में ऐसा नहीं लगा कि यह कोई तुफान से पहले वाली शांति हो। आगे देखते हैं क्या रंग दिखाती है खाकी।

* चोर मचाये शोर

जांगळ देश के एक इलाके में लगता है चोरों ने अपना स्थाई अड्डा ही बना लिया है। आये दिन चोरी की घटनाओं से लोग भले ही परेशान हो गए हो मगर लगता है खाकीधारी किसी और ही काम में व्यस्त हैं।

लोग कहने लगे हैं कि शहर में पुलिस ने चोरों को निशाना नहीं बनाया है बल्कि इस बार तो ऐसा लग रहा है कि चोरों व अपराधियों ने पुलिस को अपना टारगेट बना लिया है कि जी हम तो क्षेत्र में आये दिन धमा चौकड़ी करेंगे तुमको जो करना हो कर लो।

शहर में नयाशरह क्षेत्र में लगातार चोरी हो रही है। लाखों रुपये के नकदी व जेवरात ले गए चोर, मामले दर्ज हो रहे हैं। पुलिस को पता नहीं चल पा रहा है कि कौन वारदात कर रहा है। पहुंचे हुए लोगों का कहना है कि शायद खाकीधारियों के बटुए चेक करें तो पता चल सकता है कि कौन किससे कितनी और कब कब बंधी ले रहा है, ये सब करवाने के लिये।

लोगों का क्या, लोगों का काम है कहना, छोड़ो बेकार की बाते। जागते रहो।

* पता कर लो आया क्या बदलावा

लो जी अब तो परिवाद भी ऑन लाइन कर दिया। थाने में एफआईआर दर्ज ना हो तो टाइगर के ऑफिस में मामला दर्ज करा सकते हो। कई नए बदलाव कर दिये। अजी आप तो कलमकार हो, यह स्टडी करो की ये सब बदलाव करने के बाद भी लोगों के जीवन में कोई चेंज आया कि नहीं, महकमे के बर्ताव में कोई चेंज आया कि नहीं।

यह एक खाकीधारीजी की सलाह ऐसी है कि देखलो जी कुछ भी कर लो हम तो वैसे के वैसे रहेंगे। सवाल पूछने पर खाकीधारी जी कहते है आजकल तो सब कुछ ऑन लाइन है। कहां दिक्कत है। बचा ही क्या है बताने को। सब दमादम होता है मुकदमा व एफआईआर। ऑन लाइन पताकरो जो करना है।

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