विश्व भर में भारतीय मसालों की धाक

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Indian spices
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अनामिका बहुगुणा

बीकानेर, (समाचार सेवा)। विश्व भर में भारतीय मसालों की धाक,भारत विश्व में मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है। भारत का शानदार इतिहास है कि वह कई दशकों से 80 से अधिक देशों में मसालों का निर्यात कर रहा है।

भारत ने मसालों के उत्पादन और निर्यात में अपनी एक अद्भुत पहचान बनाई है जिसकी वजह से भारत विश्वभर में अपने मसालों के लिए काफी मशहूर है। जीरा, काली मिर्च, इलायची, अदरक, मिर्च और हल्दी जैसे उच्च गुणवत्ता वाले मसालों के उत्पादन के लिए भारत विश्वभर में जाना जाता है।

* मसालों का मिश्रण,  भारतीय व्यंजनों की शान

मसालों के व्यापक और रोचक उपयोग के कारण भारतीय व्यंजन हमेशा से विशेष रहे हैं। हम बिना मसालों के इस्तेमाल के अपने भोजन को रोचक स्वाद नहीं दे सकते। कुछ ऐसे मसाले होते हैं जो लगभग सभी के घरों में उपलब्ध होते हैं और हमारे जीवन में रंग, सुगंध और स्वाद भर देते हैं।

* इलायची : –

वह मसाला जो तमाम विश्व व्यंजनों में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा है। इलायची हमारे सबसे अधिक उपयोग होने वाले मसालों में से एक है। इसका बढ़ चढ़कर चाय में उपयोग होता है। जब आपके मीठे व्यंजनों में स्वाद को जोड़ने की बात आती है, तो इलायची सबकी पहली पसंद होती है।

इसके अलावा, इलायची ने कई स्वादिष्ट व्यंजनों, बासमती चावल और विभिन्न प्रकार के करी में भी अपना अलग स्थान पाया है। यही वजह है कि ईलाईची को मसालों की रानी के नाम से भी जाना जाता है। अक्सर आपने लोगों को लगातार कुछ चबाते हुए देखा होगा।

हाँ यह हमारी पसंदीदा इलायची ही होती है। इलायची भारतीय और अंतराष्ट्रीय रसोई का अद्भुत सदस्य है और यह न केवल भारत में लोकप्रिय है, बल्कि मध्य-पूर्वी, स्वीडिश, तुर्की और अरबी लोग भी भारत में उगाई जाने वाली इलायची का व्यापक रूप से इस्तेमाल करते हैं।

काली मिर्च :-

यह विश्वभर में सबसे ज्यादा खाने में उपयोग होने वाले मसालों में से एक है। काली मिर्च पाउडर को आप अक्सर घरों की डाईनिंग टेबल में भी पा सकते हैं। यह त्वचा की खूबसूरती बड़ाने के लिए एक्सफोलिएटर/ स्क्रब के रूप में भी उपयोग में लाया जाता है और त्वचा संबन्धित परेशानियों में मददगार साबित होता है।

यह वजन कम करने में भी मदद करता है। यह आमतौर पर हमारे कई पकवान जैसे सलाद,पेय पदार्थ जैसे लस्सी आदि में उपयोग होता है। यह सादे व फीके भोजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए भी जाना जाता है।

गोल्डन मसाला (हल्दी)

हल्दी में औषधीय गुण होते हैं और यह स्वास्थ्य एवं त्वचा की देखभाल के लिए काफी लाभदायक साबित होती है। हल्दी में कर्क्यूमिन होता है जो एंटी-ऑक्सीडेंट गुण से भरपूर होता है, और यही वजह है कि यह शरीर पे लगे घाव को ठीक करने के लिए दूध में मिलाकर पिया जाता है।

साथ ही हल्दी हमारे व्यंजनों को पीला रंग देता है। हल्दी में अधिक मात्रा में करक्यूमिन एवं औषधीय गुणों की उपस्थिति के कारण, भारतीय हल्दी को दुनिया में सबसे अच्छा माना जाता है। यह कई स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए अच्छा समाधान है। इसका उपयोग दवाइयाँ बनाने के साथ-साथ सौंदर्य प्रसाधन की सामग्रियों में भी किया जाता है।

केसर :-

केसर के विशिष्ट स्वाद एवं औषदीय गुणों का कोई विकल्प नहीं है और यही कारण है कि केसर दुनिया भर में इतना लोकप्रिय एवं महंगा है। केसर की खेती और छटाई में काफी मेहनत लगती है और यही कारण है कि यह इतना कीमती है। इसकी खुशबू को दिव्य माना जाताहै।

इसे अक्सर मसालों का राजा भी कहा जाता है। इसका उपयोग खाने के साथ-साथ कपड़ों और इत्र के उत्पादन में भी किया जाता है। इसके अनगिनत स्वास्थ्य लाभ भी इसे खास बनाते है, जैसे खांसी और बुखार के इलाज से लेकर चेहरे की समस्याओं तक, यह बहुत लाभदायक है।

* कृषि प्रथाओं का शिकार मसाले

बदलती जलवायु एवं परिस्थितियां भारत को 60 से अधिक मसालों का उत्पादन करने में मदद करती है। परन्तु चिंता की बात यह है कि मसाले भी अत्यधिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग के कारण खराब कृषि प्रथाओं का शिकार हो रहे हैं। रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के व्यापक उपयोग से मिट्टी और पर्यावरण प्रदूषित होता है।

इसके हानिकारक अवशेष मिट्टी से होकर उत्पाद में चले जाते हैं और यही कारण है कि कई मसालों की फसलों को बाहर के देशों द्वारा निर्यात के लिए अस्वीकार कर दिया जाता है। हानिकारक अवशेषों के कारण इन्हें खराब गुणवत्ता वाला करार कर दिया जाता है और यह तय मानकों में विफल साबित होते हैं।

दिन-प्रतिदिन उत्पादन में वृद्धि लाने की वजह से मसाले की फसलें कीटनाशकों एवं अत्याधिक रसायनिक उर्वरकों का शिकार होती जा रही है, इस समस्या का समाधान निकालने की अब सख्त जरूरत है। इफको किसान, सैकड़ों प्रगतिशील किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO-फार्मर प्रोड्यूसिंग ऑर्गनाइज़ेशन) को मसालों की सही खेती के विकल्प एवं महत्व से संबंधित सलाह देता है।

इसके अलावा,  यह संगठन जीरा और हल्दी के व्यापार से भी जुड़ा है, और प्रगतिशील किसानों को मसाले के व्यापार के लिए सुविधा प्रदान कर रहा है। जैविक खेती की एक्सपर्ट सेवाएँ मुहैया कराना और अच्छी कृषि पद्धतियों (जीएपी) को अपनाने के साथ-साथ इफको किसान कई गुणवत्ता वृद्धि कार्यक्रम आयोजित करवाता है।

और यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि भारत से निर्यात होने वाले मसाले व्यापारियों द्वारा तय मानकों व शर्तों पर सफल साबित हो। इफको किसान के एमडी एवं सीईओ,श्री संदीप मल्होत्रा ने कहा, ” हमने किसानों के लिए विभिन्न ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए हैं जिससे वह अच्छी कृषि पद्धतियों को अपनाए। हमारे संगठन की स्थापना के बाद से ही हम किसानों को GAP (गुड एग्रिकल्चर प्रैक्टिस) यानि अच्छी कृषि पद्धतियों को अपनाने और सुरक्षित और हानि रहित मसालों का उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों और मानकों के अनुसार हो”।

“जैविक खेती की व्यापक स्वीकृति के कारण, प्रगतिशील भारतीय किसानों ने मसालों की जैविक खेती भी शुरू कर दी है, जिससे मसालों के स्वाद और स्वास्थ्य लाभ बरकरार रहते हैं। क्यूंकी अमेरिका, वियतनाम और अरब देशों में निर्यात करने के लिए तय मानदंड तथा तय मानकों में खरे उतरना आवश्यक है, इसलिए मसालों में गुणवत्ता महत्वपूर्ण पैरामीटर है।

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