बीकानेर- यहां आज भी आबाद है जिन्ना

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नीरज जोशी, स्‍वतंत्र पत्रकार


mohammad ali jinnah

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्म्द अली जिन्ना की अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी के छात्रसंघ कार्यालय में लगी एक तस्वीर से भले ही देशभर में लोगों को एतराज हो मगर पाकिस्तान की सीमा से लगते भारत के जिले बीकानेर में कोटगेट के पास की एक सड़क आज भी जिन्ना के नाम से आबाद है। समाचार सेवा की इस एक्‍सक्‍लूजिव रिपोर्ट में कर रहे हैं पड़ताल…

यहां का मीडिया भी इस रोड को आज भी जिन्ना रोड लिखने से नहीं कतराता है। इस लेख के साथ मैने आपके लिये भारत के सबसे तेज बढ़ते अखबार की एक वेबसाइट पर 21 जून 2017 को साया हुए समाचार को लगाया है जिसकी हैडिंग मे ही ‘जिन्ना रोड क्षेत्र का इरफान पांच दिन से लापता’ लिखी गई है। स्थानीय मीडिया व सरकारी सर्वे करने वाले कई बार इस क्षेत्र को जिन्ना रोड क्षेत्र ही लिखते रहते हैं।

भले ही भारत के विभाजन के लिये मोहम्मद अली जिन्ना को दोषी माना जाता हो मगर भारत विभाजन के 71 बीतने के बाद भी बीकानेर में जिन्ना रोड आबाद है। हालांकि आजादी के कई साल बाद संभ      वतया 1967 में इस जिन्ना रोड का नाम नेताजी सुभाषचन्द्र मार्ग कर दिया गया मगर सुभाष मार्ग के साथ यहां जिन्ना रोड आज भी इस सड़क की पहचान है।

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वैसे इस क्षेत्र में हिन्दू व मुसलमान दोनों धर्म के लोग रहते हैं। अधिकांश मुसलमान दुकानदार आज भी इस सड़क मार्ग को जिन्ना रोड लिखते हैं, जबकि हिन्दू दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर पते के रूप में सुभाष मार्ग लिखा हुआ है।

dainik bhaskar me zinna

कह सकते हैं कि यह बीकानेर रेलवे स्टेशन से लालगढ़ रेलवे स्टेशन की ओर रेल लाइन के समानान्तर बसा हुआ चौखूंटी रेल फाटक तक का क्षेत्र मुसलमानों के लिए जिन्ना रोड है तो हिंदुओं के लिए नेताजी सुभाष मार्ग बना हुआ है। इस क्षेत्र में चिकन, मटन की दुकानें हैं, होटल हैं, मोबाइल फोन रिचार्ज की दुकाने हैं। म्यूजिक एलबम बेचने की दुकाने हैं।

चाय की स्टाले हैं सब अपने अपने हिसाब से अपनी दुकान के बोर्ड पर जिन्ना रोड या सुभाष मार्ग लिखवाते हैं। कईयों ने तो जिन्ना रोड व सुभाष मार्ग दोनो ही लिखवा रखा है। हालांकि यह पता नहीं चल सका कि क्या खुद जिन्ना या नेताजी सुभाष चन्द्र बोस खुद कभी बीकानेर आये थे या नहीं।

ऐसा भी नहीं है कि किसी ने बीकानेर में जिन्ना रोड होने पर एतराज नहीं जताया हो। एक दशक पूर्व एक सेवानिवृत्त पशुचिकित्सक ने काफी समय तक जिन्ना रोड लिखने के खिलाफ अभियान चलाया था। कलेक्ट्रेट के सामने धरना दिया था। तब से कुछ सरकारी दस्तावेजों में जिन्ना रोड शब्द लिखना रुक गया था तथा सड़क के दोनों और सुभाष मार्ग के बोर्ड लगाये गए थे।

मगर आज वो बोर्ड तो नहीं दिखते हैं मगर इस सड़क पर जिन्ना रोड लिखने या सुभाष मार्ग लिखने वालों के बीच कभी इस बात को लेकर विवाद नहीं हुआ है। वर्तमान में भले ही अलीगढ़ क्षेत्र में भाजपा के सांसद ने 80 साल से अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी के छात्रसंघ कार्यालय में लगी हुई मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को हटाने के लिये हंगामा मचाया हुआ हो।

भले ही देश का राष्‍ट्री य कहलाने वाला हिन्दी व अंग्रेजी का मीडिया जिन्ना की एक तस्वीर पर खबरे बनाकर टीआरपी बटोर रहा हो बीकानेर में जिन्ना के नाम से आबाद रोड को लेकर यहां कोई विवाद नहीं है।


जिन्‍ना यहां जिन्‍ना वहां, सलाम बीकानेर, धन्‍य बीकानेरी


 

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